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बिहार में चमकी बुखार से 60 बच्चों की मौत, बनाया जा रहा लीची का बहाना 

बिहार में चमकी बुखार के नाम से पुकारी जाने वाली बीमारी एईएस हर साल कहर बरपाती है । इस बार पिछले दो सप्ताह में अब तक 60 बच्चों की इससे मौत हो चुकी  । चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त करने की बजाय इस बुखार के लिए लीची को दोषी ठहराया जा रहा है।
बिहार में उमस भरी गर्मी के बीच मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में बच्चों पर कहर बनकर टूटने वाली बीमारी ‘चमकी बुखार’ से पीड़ित बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। मौसम की तल्खी और हवा में नमी की अधिकता के कारण संदिग्ध एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम  (एईएस) और जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) नामक बीमारी से पिछले करीब एक सप्ताह में 60 बच्चों की मौत हो चुकी है। इस बीच, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस बीमारी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग इस पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रत्येक वर्ष इस मौसम में मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में इस बीमारी का कहर जारी है। इस बीच पीड़ित बच्चों को मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेमोरियल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) और केजरीवाल मातृ सदन (अस्पताल) में भर्ती होने का सिलसिला जारी है।
अधिकांश बच्चों में हाइपोग्लाइसीमिया यानी अचानक शुगर की कमी और कुछ बच्चों के शरीर में सोडियम (नमक) की मात्रा भी कम पाई जा रही है।  एईएस के संदिग्ध मरीजों का इलाज शुरू करने से पहले चिकित्सक उसकी जांच कराते हैं। ब्लड शुगर, सोडियम, पोटाशियम की जांच के बाद ही उसका इलाज शुरू किया जाता है। हालाकि इसके लिए लीची को दोषी ठहराया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह क्षेत्र लीची ज्यादा उगाता है।  सुबह नाश्ते में ही लोग अधिक लीची का सेवन करते है जिसकी वजह से यह बीमारी ज्यादा फैल रही है।

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