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भीमा- कोरेगांव मामला : नवलखा की याचिका पर अब 15 मार्च को होगी सुनवाई

महाराष्ट्र के पुणे स्थित भीमा-कोरेगांव में साल 2018 की शुरुआत में भड़की हिंसा के मामले में पुणे पुलिस ने कई शहरों में एक साथ छापेमारी कर 5 कथित नक्सल समर्थकों को गिरफ्तार किया था।

उसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गौतम नवलखा की जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया है। मामले की 15 मार्च को सुनवाई होगी। कोर्ट ने NIA को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है। नवलखा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने डिफॉल्ट जमानत देने से इनकार किया था। इसके पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अक्टूबर, 2018 को नवलखा की नजरबंदी को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया था।

बाम्बे हाई कोर्ट ने माओवादियों से जुड़ी एलगार परिषद के मामले में आरोपी गौतम नवलखा की जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि विशेष अदालत के तार्किक आदेश में दखल देने का उसे कोई कारण नजर नहीं आता। विशेष अदालत पहले ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर चुकी है।

कोर्ट की पीठ ने कहा था कि, “नवलखा द्वारा 2018 में घर में नजरबंदी के दौरान बिताए गए 34 दिन डिफॉल्ट जमानत के लिए नहीं गिने जा सकते हैं। पुणे पुलिस ने 28 अगस्त, 2018 को नवलखा को गिरफ्तार तो किया था, लेकिन उन्हें हिरासत में नहीं लिया था।” वह 28 अगस्त से एक अक्टूबर, 2018 तक घर में नजरबंद रहे थे।वह न्यायिक हिरासत में फिलहाल नवी मुंबई स्थित तलोजा जेल में बंद है।

नवलखा ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के 12 जुलाई, 2020 के आदेश को पिछले साल हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने हिरासत में 90 दिन बिताने और इस दौरान अभियोजन की ओर से आरोप पत्र दाखिल नहीं किए जाने के आधार पर डिफॉल्ट जमानत मांगी थी।

भीमा-कोरेगांव मामला क्या है?

भीम कोरेगांव महाराष्ट्र के पुणे जिले में है । इस छोटे से गांव से मराठा का इतिहास इतिहास जुड़ा है। 200 साल पहले यानी 1 जनवरी, 1818 को ईस्ट इंडिया कपंनी की सेना ने पेशवा की बड़ी सेना को कोरेगांव में हरा दिया था पेशवा सेना का नेतुत्व बाजीराव II कर रहे थे। बाद में इस लड़ाई को दलितों के इतिहास में एक खास जगह मिल गयी।

बीआर अम्बेडकर को फॉलो करने वाले दलति इस लड़ाई को राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की लड़ाई नहीं कहते हैं।दलित इस लड़ाई में अपनी जीत मानते हैं।उनके मुताबिक इस लड़ाई में दलितों के खिलाफ अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी।

साल 2018 इस युद्ध का 200वां साल था। ऐसे में इस बार यहां भारी संख्या में दलित समुदाय के लोग जमा हुए थे जश्न के दौरान दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी।इस दौरान इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हो गए थे।इस बार यहां दलित और बहुजन समुदाय के लोगों ने एल्गार परिषद के नाम से शनिवार वाड़ा में कई जनसभाएं की। शनिवार वाड़ा 1818 तक पेशवा की सीट रही है। जनसभा में मुद्दे हिन्दुत्व राजनीति के खिलाफ थे । इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी थी।

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