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यूपी में कांग्रेस के खिलाफ कांग्रेस का ही एक बड़ा घटक बगावत के मूड में है। यह बगावत अपनों को नजरअंदाज करते हुए दूसरी पार्टी के उन नेताओं की पार्टी के लिए सीट छोडे़ जाने को लेकर है जो पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के मामले में दागी रहे हैं। बगावत का यह आलम है कि कुछ वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने इस संवाददाता को व्यक्तिगत तौर पर फोन करके कांग्रेस के इस अनैतिक कदम पर कलम चलाने का आग्रह किया है।
कुछ ऐसा ही हाल है कांग्रेस का। जब प्रियंका गांधी की कोशिशें रंग ला रही थीं तभी कांग्रेस हाई कमान ने ऐसा फैसला किया जिससे न सिर्फ वे कांग्रेसी सकते में हैं जिन्होंने अपनी सारी उम्र कांग्रेस की सेवा में लगा दी बल्कि यूपी कांग्रेस के कई बड़े नेता भी हाई कमान के इस फैसले को लेकर संतुष्ट नजर नहीं आ रहे। कांग्रेस का यह विवादित फैसला बाबू सिंह कुशवाहा की पार्टी को आधा दर्जन सीटें दिए जाने से सम्बन्धित है। कांग्रेस के इस फैसले ने कांग्रेस के उन नेताओं को बगावत करने पर मजबूर कर दिया है जो अन्तिम क्षणों तक टिकट की आस लगाए बैठे थे। कई ने तो प्रेस वार्ता के उपरांत पार्टी कार्यालय में हंगामा तक किया लेकिन हाई कमान अपने इस फैसले को लेकर विचार करने तक का आश्वासन देने को तैयार नहीं। इस हंगामे में कई पत्रकार तक चोटिल हो गए। अनुशासनहीनता और अव्यवस्था का यह हाल था कि जिसे जो स्थान नजर आ रहा था वह उसी ओर भाग रहा था। यह स्थिति प्रेस कांफ्रेंस से एक दिन पूर्व हाई कमान के उस फैसले के बाद से उत्पन्न हुई जिसमें उन्होंने सपा-बसपा गठबन्धन को सात सीटों के साथ ही बाबू सिंह कुशवाहा की जनाधिकारी पार्टी के लिए भी सात सीटें छोड़ने का फैसला किया था। इतना ही नहीं अपना दल की कृष्णा पटेल को भी दो सीटों का आॅफर दिया है।
बस यहीं से शुरुआत हुई कांग्रेस में बगावत की। लगभग डेढ़ दर्जन हाथ से गयी सीटें और इन सीटों पर उम्मीदवारी की आस लगाए बैठे वरिष्ठ कांग्रेसी हाई कमान के इस फैसले को किसी प्रकार से हजम नहीं कर पाए। कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की मानें तो हाई कमान का यह फैसला पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। ऐसा इसलिए कि हाई कमान ने पार्टी के कर्मठ नेताओं को नजरअंदाज करके जिस बाबू सिंह कुशवाहा के लिए सात सीटों की कुर्बानी दी है वह बाबू सिंह कुशवाहा पूर्ववर्ती मायावती सरकार के कार्यकाल में खनन घोटाले को लेकर खासे चर्चित रहे हैं। इनके खिलाफ तमाम जांचें वर्तमान समय तक चल रही हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिन कांग्रेसियों ने अपना पूरा जीवन पार्टी की सेवा करने में बिता दिया उन नेताओं को भनक तक नहीं लगने पायी और दागी नेता की पार्टी के लिए सात सीटें छोड़ दी और वह भी अपनी पार्टी के नेताओं की इच्छाओं का गला घोंटकर। बाबू सिंह कुशवाहा ने अपनी पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ने वालों की जो पहली सूची जारी की है उनमें से दो स्थानों पर उनके पारिवारिक सदस्य हैं। चंदौली से शिवकन्या कुशवाहा को टिकट दिया गया है जो बाबू सिंह कुशवाहा की धर्मपत्नी हैं। झांसी लोकसभा सीट से शिवशरण कुशवाहा को टिकट दिया गया है जो बाबू सिंह कुशवाहा के छोटे भाई हैं। इसके अतिरिक्त एटा से सूरज सिंह शाक्य और बस्ती से चन्द्र शेखर सिंह को बाबू सिंह कुशवाहा की जन अधिकारी पार्टी की तरफ से टिकट दिया गया है। ये सभी किसी न किसी मामले में दागी है। कांग्रेस से बगावत का बिगुल फूंक चुके कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि यही लोग कांग्रेसी की ताबूत में कील ठोंकेंगे।
यही हाल सपा-बसपा गठबन्धन के लिए छोड़ी गयी सात सीटों का भी है। कांग्रेसी अपने वरिष्ठ नेताओं के इस फैसले को भी मानने के लिए कतई तैयार नहीं। कहते हैं कि इन दलों से गठबन्धन करके कांग्रेस को कई बार अनुभव हो चुका है। जितनी बार इन दलों के साथ गठबन्धन करके कांग्रेस ने चुनाव लड़ा है, फायदा सपा-बसपा को ही मिला है, कांग्रेस इन दलों से समझौते का कभी कोई फायदा नहीं उठा पायी है। बगावत की डोर थाम चुके कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ये वही सपा-बसपा गठबन्धन है जिसने गठबन्धन करते वक्त कांग्रेस को पूछा तक नहीं था और दान स्वरूप महज दो सीटें ही छोड़ी थीं।
हाई कमान के फैसले के बाद से यूपी कांग्रेस में बगावत की पराकाष्ठ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है जहां एक ओर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी चुनावी दौरे पर निकली हैं वहीं दूसरी ओर यूपी के तमाम स्थानों पर मौजूद कांग्रेसी अपनी नेता का विरोध करने की ठान चुके हैं। अन्दरूनी सूत्रों की मानें को प्रियंका गांधी को अपने चुनावी दौरे के दौरान कांग्रेस के पुराने नेताओं की तरफ से काले झण्डे दिखाए जाने की योजना है।
जाहिर है ऐसी स्थिति में प्रियंका गांधी का चुनावी दौरा तो प्रभावित होगा ही साथ ही कांग्रेस के पक्ष में हवा बनाने की जो योजना तैयार की गयी है उसके भी फ्लाॅप होने की संभावना काफी है।
कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि इस बार भी कांग्रेसियों का भाग्य साथ देने वाला नहीं है तो शायद अनुपयुक्त न होगा।

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