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स्वास्थ्य मंत्री की फटकार के बाद बाबा रामदेव का यू टर्न, ऐलोपैथी मामले में बैकफुट पर

एलोपैथी पर दिए गए अपने विवादास्पद बयान के बाद योग गुरु बाबा रामदेव बुरी तरह घिर गए। देश के डॉक्टरों की संस्था इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आई एम ए ) ने बाबा रामदेव को इस मुद्दे पर जमकर घेर लिया । यही नहीं बल्कि देशभर के डॉक्टर योग गुरु के खिलाफ लामबंद हो गए। यही नहीं बल्कि डाँक्टरो ने रामदेव को गिरफ्तार करने तक की मांग कर डाली। इसके बाद डॉक्टरों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन को इस मामले पर दबाव में ले लिया। डॉ हर्षवर्धन ने अपने करीबी बाबा रामदेव को दो पेज का लंबा चौड़ा पत्र लिखकर अपनी नाराजगी व्यक्त की। बहरहाल बाबा यू टर्न ले गए। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को इस मुद्दे पर फटकार लगाई। इसके बाद वह ऐलोपैथी पर अपने शब्दों को वापिस लेने पर मजबूर हुए।

बाबा रामदेव पर एलोपैथी इलाज के खिलाफ झूठ फैलाने का आरोप लगा था। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को लिखे पत्र में आईएमए ने कहा था कि सोशल मीडिया पर रामदेव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें बाबा एलोपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस कह रहे हैं। जिसके चलते आईएमए ने रामदेव को एक लीगल नोटिस भेजा था। इसके बाद रामदेव की तरफ से पतंजलि योग संस्थान के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने बयान जारी कर आरोपों को गलत बताया था। बालकृष्ण ने कहा था कि मॉडर्न साइंस और उसकी प्रैक्टिस करने वाले लोगों के प्रति बाबा रामदेव कोई दुर्भावना नहीं रखते हैं ।आईएमए ने उन पर जो आरोप लगाए हैं वह गलत हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इस मसले पर रामदेव को एक दो पेज का पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने कहा कि एलोपैथिक दवाओं और डॉक्टरों पर आपकी टिप्पणी से देशवासी बेहद आहत हैं। लोगों की इस भावना से मैं आपको फोन पर पहले ही अवगत करा चुका हूं। संपूर्ण देशवासियों के लिए कोरोना के खिलाफ युद्धरत डॉक्टर और दूसरे स्वास्थ्य कर्मी भगवान के समान हैं। आपने अपने वक्तव्य से न केवल कोरोना योद्धाओं का निरादर किया, बल्कि देशवासियों की भावनाओं को भी गहरी ठेस पहुंचाई है। कल आपने जो स्पष्टीकरण जारी किया, वह लोगों की चोटिल भावनाओं पर मरहम लगाने में नाकाफी है।

हर्षवर्धन ने आगे लिखा है कि कोरोना महामारी के संकट भरे दौर में एलोपैथी और उससे जुड़े डॉक्टरों ने करोड़ों लोगों को जीवनदान दिया है। आपका यह कहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि लाखों कोरोना मरीजों की मौत एलोपैथी की दवा खाने से हुई। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना महामारी के खिलाफ ये लड़ाई सामूहिक प्रयासों से ही जीती जा सकती है। इस लड़ाई में हमारे डॉक्टर, नर्सें और दूसरे स्वास्थ्यकर्मी जिस तरह अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने में दिन-रात जुटे हैं, वह कर्तव्य और मानव सेवा के प्रति उनकी निष्ठा की अतुलनीय मिसाल है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि आप इस तथ्य से भली-भांति परिचित हैं कि कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में भारत सहित पूरे विश्व के असंख्य डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी जानें न्यौछावर की हैं। आज लाखों लोग कोरोना से ठीक होकर घर जा रहे हैं । आज अगर देश में कोरोना से मृत्युदर सिर्फ 1.13% और रिकवरी रेट 88% से अधिक है, तो इसके पीछे एलोपैथी और उसके डॉक्टरों का अहम योगदान है।

आप सार्वजनिक जीवन में रहने वाली शख्सियतों में से हैं। ऐसे में आपका कोई भी बयान बहुत मायने रखता है। मैं समझता हूं कि आपको किसी भी मुद्दे पर कोई भी बयान समय, काल औरऔर परिस्थिति देखकर देना चाहिए। ऐसे समय में इलाज के मौजूदा तरीकों को तमाशा बताना न सिर्फ एलोपैथी बल्कि उनके डॉक्टरों के मनोबल को तोड़ने और कोरोना महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को कमजोर करने वाला साबित हो सकता है।

साथ ही उन्होंने कहा कि आपको यह पता होना चाहिए कि चेचक, पोलियो, इबोला, सार्स और टी.बी. जैसे गंभीर रोगों का निदान एलोपैथी ने ही दिया है। आज कोरोना के खिलाफ वैक्सीन एक अहम हथियार साबित हो रही है। यह भी एलोपैथी की ही देन है।

आपने अपने स्पष्टीकरण में सिर्फ ये कहा है कि आपकी मंशा मॉडर्न साइंस और अच्छे डॉक्टरों के खिलाफ नहीं है
मैं आपके द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं मानता। आशा है, आप इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए और विश्वभर के कोरोना योद्धाओं का सम्मान करते हुए अपना आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण वक्तव्य पूरी तरह से वापस लेंगे। इसके बाद योग गुरु बाबा रामदेव ने एलोपैथी पर कहे गए अपने विवादास्पद बयानों को वापस ले लिया। कयास लगाए जाने लगें हैं कि पिछले कई दिनों से चला आ रहा आईएमए और बाबा रामदेव का विवाद अब थम सकता है।

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