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बाबा रामदेव का करोड़ों की कमाई का प्लान है कोरोनिल

देहरादून। तमाम विरोधों और आशंकाओं के बावजूद बाबा रामदेव अपने कोरोनिल दवा किट के जरिये करोड़ों रुपए का मुनाफा आसानी से कमा सकते हैं। देश में पतंजलि की कोरोनानिल औषधि किट को इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर बेचे जाने की अनुमति मिलने के साथ ही ऐसा लगता है कि बाबा राम देव की वह योजना सफल होती नजर आ रही है जिसे एक बड़ी सोची- समझी रणनीति के तहत देश की जनता के सामने प्रस्तुत किया गया था।

दरअसल, इस पूरे प्रकरण को देखें तो शुरूआत से ही यह साफ हो गया था कि जिस तरह से बाबा रामदेव के द्वारा प्रेस वार्ता करके यह बताने का प्रयास किया कि उनके संस्थान पतंजलि योग पीठ ने कोरोना कोविड- 19 महामारी की दवा के तौर पर अनुसंधान करके कोरोना को ठीक करने की दवा खोज ली है। बकायदा बाबा रामदेव और उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने प्रेस वार्ता में यह दावा किया था कि उनके द्वारा निम्स के साथ इस दवा का क्लीनिकल ट्रायल करके यह पाया गया कि इस दवा का कोरोना मरीजों पर प्रयोग हुआ जिससे तीन दिन में 60 और सात दिनो में 100 प्रतिशत कोरोना के मरीज ठीक हुये हैं।

यही नहीं स्वयं बाबा रामदेव ने प्रेसवार्ता में स्पष्ट तौर पर विदेशी दवा कम्पनियों और ऐलोपैथिक दवा निर्माताओं की निंदा करते हुये कहा कि उनको सबसे ज्यादा पीड़ा होने वाली है कि जिस कोरोना बीमारी की दवा को विश्व के वैज्ञानिक नहीं खोज पाये उसे भारत के एक हिमालय में विचारने वाले भगवाधारी सन्यासी ने खोज डाला है। बाबा रामदेव के इस वक्तव्य से यह तो साफ हो गया कि पतंजली के द्वारा कोरोना महामारी के उपचार के लिए कोरोनानिल दवा खेज ली गई है, और इसकी कीमत महज 535 रुपये प्रति किट रखी गई है। यह बाबा रामदेव का पतंजली की दवाओं के प्रचार और विक्री का पहला चरण आरंभ हुआ।

अब इस पूरी रणनीति की बात करें तो बाबा रामदेव की प्रेसवार्ता के कुछ ही घंटे के बाद भारत के आयुष मंत्रालय ने बाबा राम देव की कोरोना बीमारी के ईलाज के लिये खोजी गई दवा के दावे और उसके प्रचार- प्रसार पर रोक लगाते हुये दवा के अनुसंधान और क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े सभी दास्तावेज आयुष मंत्रालय को सौंपने का आदेश जारी कर दिया।

केंद्रीय आयुष मंत्रालय के आदेश जारी करने के बाद आचार्य बाल कृष्ण इसको केवल एक कम्युनिकेशन गैप होने की बात कह कर मामले को सामान्य करने का प्रयास करते रहे, लेकिन केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के आदेश के बाद उत्तराखण्ड राज्य का आयुष विभाग भी सक्रिय हुआ और उसने बयान जारी करके साफ कर दिया कि पतंजलि द्वारा केवल खांसी, बुखार और जुकाम आदि की दवा के निर्माण के लिये ही लाईसेंस का आवेदन किया था जिस पर उसी दवा के लिये आयुष विभाग के द्वारा लाईसंेस जारी किया गया है। प्रदेश के आयुष विभाग ने कोरोना के इलाज के लिये दवा खोजने के दावे पर पतंजलि को नेाटिस जारी करने की बात कह कर मामले को और दिलचस्प बना दिया।

यहीं से बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की असल रणनीति का दूसरा चरण आरंभ किया गया जिसके तहत एक सप्ताह में पतंजलि कोरोना की दवा खोजने के अपने दावे से ही पलट गई ओैर केन्द्रीय आयुष मंत्रालय के साथ- साथ उत्तराखण्ड प्रदेश के आयुष विभाग को अपना जवाब यह कहकर दिया कि पतंजलि ने कभी भी यह दावा नहीं किया कि कोरोनिल दवा किट से कोरोना का इलाज किया गया है। यह केवल शरीर के इम्युनिटी सिस्टम को विकसित करने के लिये ही एक दवा का मिश्रण है। हालांकि इस पर भी बड़ी चतुराई से आचार्य बालकृष्ण के द्वारा कहा गया कि हमने कोरोना के मरीजों पर इस कोरोनिल इम्युनिटी बूस्टर का उपयोग किया जिसमें कोरोना के मरीजों का बहुत फायदा हुआ।

आचार्य बालकृष्ण का यह एक छोटा सा वाक्य ही उनके अपनी दवा को एक तरह से कोरोनिल के इलाज के लिए दवा के तौर पर बताने की चालाकी पतंजलि की रणनीति का सबसे सफल और मजबूत तीसरा चरण मानी जा सकती है। एक वाक्य से यह साफ करने का सफल प्रयास करते हुये अघोषित तौर पर यह प्रचारित किया जा रहा है कि पतंजलि के द्वारा बनाई गई कोरोनानिल दवा किट कोरोना का सफल इलाज कर सकती है, क्योंकि इसके प्रयोग से एक सप्ताह में ही 100 प्रतिशत कोरोना के मरीज ठीक हो चुके हैं।
हुआ भी यही ओैर आश्चर्यजनक तौर पर उत्तराखण्ड सरकार ने पतंजली को कोरोनिल दवा किट के नाम से ही इम्युनिटी बूस्टर दवा के तोैर पर दवा की विक्री करने की अनुमति प्रदान कर दी है। केन्द्रीय आयुष मंत्रालय ने भी कोरोनानिल इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर पतंजलि की दवा को मंजूरी दे दी है और जल्द ही इसकी बिक्री करने की इजाजत भी पतंजलि को दी जा सकती है।

बाबा रामदेव यह अच्छी तरह से जानते थे कि आईसीएमआर और केन्द्रीय आयुष मंत्रालय की कठोर गईडलाईनों के चलते कोई भी दवा कम्पनी या संस्था कोरोना के इलाज का न तो दावा कर सकती है ओर न ही किसी दवा से कोरोना को ठीक करने का दावा कर सकती है। इसके लिये तमाम तरह की अनुमति और रिसर्च की जरूरत होती है जिसमें कई महिनों का समय लगता है। बावजूद इसके बाबा रामदेव ने पतंजलि पर करोड़ों लोगों का भरोसा होने का फायदा उठाते हुए प्रचार किया कि उनके द्वारा कोरोना का इलाज खोज लिया गया है, परंतु नियमों के चलते बाद में इस दावे से ही पलटी मार गये, लेकिन बाबा रामदेव ने जो रणनीति बनाई उस पर बाबा रामदेव पूरी तरह से सफल हो गये और अब बाबा रामदेव और पतंजलि देश में और अपने पतंजलि के आउटलेटों जो कि तकरीबन 4 हजार के बताये जाते हैं में आसानी से अपनी कोरोनिल दवा किट को इम्युनिटी बूस्टर के तौर पर बेचने को मुक्त हैं। एक अनुमान के मुताबिक बाबा रामदेव कोरोनिल को इक्युनिटी बूस्टर के तौर पर बेचकर ही करोड़ों कमा पाएंगे।

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