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आजाद और सिब्बल ने फिर साधा सोनिया पर निशाना, थम नहीं रहा कांग्रेस का घमासान

कांग्रेस में नेतृत्व बदलने की मांग को लेकर लिखी गई चिट्ठी पर मचा  घमासान  थमने के बजाय बढ़ता ही जा रहा  है। हाल  ही में हुए चिट्ठी विवाद  के बाद एक तरफ सोनिया गांधी  डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश में लगी हुई हैं ,तो दूसरी तरफ उनका इन बागी  नेताओं से भरोसा उठ गया है।इस सबके बीच राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और पार्टी के वरिष्ठ नेट कपिल सिब्बल के बागी सुर और तेज हो गए हैं।

गुलाम नबी आजाद ने एक बार फिर कांग्रेस वर्किंग कमेटी और संगठन के प्रमुख पदों पर चुनाव करवाने पर जोर दिया है। आजाद ने कहा, “चुने हुए लोग लीड करेंगे तो पार्टी के लिए अच्छा होगा, नहीं तो कांग्रेस अगले पचास  साल तक विपक्ष में बैठी रहेगी। हो सकता है कि नियुक्त (अपॉइंट) किए जाने वाले अध्यक्ष को एक प्रतिशत  लोगों का भी समर्थन नहीं हो।”चुने हुए लोगों के नेतृत्व करने के राजनितिक मायने तो यही निकले जा सकते हैं कि आजाद नहीं चाहते कि नेतृत्व थोपा जाए बल्कि चुनकर आए। साफ़ है कि उनका इशारा यह है कि सोनिया या फिर राहुल गांधी भी चुनकर ही अध्यक्ष बनें।

आजाद ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी समेत, राज्यों के प्रमुख, जिला अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष के पदों पर भी चुनाव करवाने पर जोर दिया। साथ ही कहा “जो लोग चुनाव करवाने का विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने पद खोने का डर है। जो वफादार होने का दावा कर रहे हैं, वे हकीकत में ओछी राजनीति कर रहे हैं। इससे पार्टी और देश को नुकसान होगा। आंतरिक चुनाव में 51% वोट मिलने वाले की जीत होती है। इसका मतलब ये हुआ कि चुने हुए अध्यक्ष के साथ 51% लोग होते हैं। अगर कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य चुनाव से तय होंगे, तो उन्हें हटाया नहीं जा सकता। इस बात में परेशानी क्या है?”

कांग्रेस में नेतृत्व बदलने की मांग को लेकर लिखी गई चिट्ठी पर इस बीच कपिल सिब्बल ने कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद तीन दिन बाद कहा कि  कांग्रेस अपने ऐतिहासिक रूप से सबसे खराब दौर से गुजर रही है, पार्टी को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है तो 24 घंटे काम करने को तत्पर रहे। कपिल सिब्बल उन 23 नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने कांग्रेस पार्टी में नेतृत्व बदलने समेत व्यापक सुधार की मांग को लेकर विवादास्पद चिट्ठी लिखी। कपिल सिब्बल ने कहा है कि हमारा इरादा पार्टी को पुनर्जीवित करना है। हम इसके पुनरुद्धार में भागीदार बनना चाहते हैं। यह पार्टी संविधान और कांग्रेस की विरासत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता है और पूर्ण विश्वास है कि कांग्रेस को एक ऐसी सरकार का विरोध करने के लिए एक-दूसरों का सहयोग करने की आवश्यकता है, जिसने उस बुनियाद को बर्बाद किया है, जिस पर भारतीय गणतंत्र बना है।इस समय पार्टी  सबसे खराब दौर से गुजर रही है और 2014 और 2019 के आम चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं। सिब्बल ने 24 घंटे काम करने वाले नेतृत्व वाली जो बात रही उसे सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर निशाना समझा जा रहा है। सब जानते हैं कि सोनिया अब अस्वस्थता की वजह 24 घंटे काम नहीं कर सकती हैं। राहुल गांधी भी इस दृष्टि से शायद ही फिट बैंठे ।

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