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अयोध्या में गुनगुनाहट

विवादित परिसर विध्वंस के लगभग ढाई दशक पश्चात एक बार फिर से अयोध्या में गुनगुनाहट महसूस की जा रही है। इसका असर आस-पास के जनपदों समेत राजधानी लखनऊ की जनता में भी देखा जा रहा है। चाय की दुकानों से लेकर बसों और मेट्रो में सवारी करने वालों के बीच गर्मागर्म बहस इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि आने वाले दिनों में राम मन्दिर मुद्दा भी अपना मुकाम हासिल कर लेगा।

विवादित परिसर विध्वंस के लगभग ढाई दशक बाद ऐसे हालात उस वक्त पैदा हुए जब देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसले की तारीख निश्चित की। यह तारीख आगामी 18 अक्टूबर तय की गयी है। माना जा रहा है कि इस दिन अयोध्या स्थित विवादित परिसर का फैसला हर हाल में कर दिया जायेगा। इसकी पुष्टि अमित शाह के उस बयान से भी हो जाती है जिसमें उन्होंने यह कहा है कि ‘राम मन्दिर पर शीर्ष अदालत के फैसले को सबको स्वीकार करना होगा। उच्चतम न्यायालय किसी के चाहने अथवा न चाहने से नहीं चलता, वह अपने तरीके से काम करता है।’
देश के गृह मंत्री अमित शाह के बयान में राम मन्दिर का जिक्र इस बात का संकेत है कि उच्चतम न्यायालय राम मन्दिर के हक में ही अपना फैसला सुनायेगी। सब कुछ तय किया जा चुका है, बस खानापूर्ति ही शेष है।

अमित शाह के बयान के बाद से राजनीति पर कलम चलाने वाले कुछ वरिष्ठ पत्रकार भी यही मानते हैं कि 18 अक्टूबर का फैसला राम मन्दिर समर्थकों के हक में ही लिया जाना है। यदि ऐसा हुआ तो निश्चित तौर पर कश्मीर मुद्दे के बाद आम जनता के बीच भाजपा की एक और बड़ी जीत होगी। भाजपा की टीआरपी तो बढ़ेगी ही साथ ही अमित शाह का कद भी बढे़गा। ऐसा इसलिए कि इससे पहले पांच वर्ष तक सरकार चलाने के बावजूद पूर्व गृहमंत्री राजनाथ सिंह इस तरह का कोई फैसला नहीं ले पाए थे और अमित शाह ने गृह मंत्री के रूप में पहली बार कार्य भार संभाला और कुछ ही दिनों में वह कर दिखाया जो आजादी के बाद से किसी भी नेता ने करने की हिम्मत नहीं जुटायी। कुछ तो अमित शाह को अभी से भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखने लगे हैं।
अयोध्या स्थिति विवादित परिसर पर फैसले को लेकर किसी प्रकार कर अशांति का माहौल पैदा न होने पाए लिहाजा भाजपा इसका तोड़ पहले ही निकाल लिया था। मुस्लिम समुदाय का शिया वर्ग तो पहले से ही भाजपा के पक्ष में लिहाजा सुन्नी वर्ग के बीच ‘डिवाइड एंड रूल’ की पाॅलिसी के तहत काम किया जाना शेष था। भाजपा ने वह भी कर दिखाया। ज्ञात हो इस मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड भी तीसरे पक्षकार के रूप में है। प्रदेश स्तरीय नेताओं ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन जुफर फारुकी को अपने पक्ष में किया और मंदिर मुद्दे पर उनकी सहमति ले ली।


सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन की सहमति से सुन्नी समुदाय के कई बडे़ नेता बौखलाए हुए हैं। जमीयत उलमा के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद मतीनुल हक उसामा कासमी ने तो यहां तक कह दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन बाबरी मस्जिद का सौदा कर चुके हैं। दूसरी ओर बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने सुन्नी वक्फ बोर्ड के चेयरमैन को पक्षकार मानने तक से इंकार दिया है। बताते चलें कि अयोध्या मामले की सुनवाई में 6 मुस्लिम पक्षकार हैं जिनमें से एक पक्षकार के रूप में सुन्नी वक्फ बोर्ड भी है। ऐसे में यदि अहम किरदार निभाने वाला सुन्नी वक्फ बोर्ड राम मन्दिर पक्षकारों के हक में सहमति जता देता है तो निश्चित तौर पर राम मन्दिर निर्माण की राह आसान हो जायेगी।
जहां एक ओर गृह मंत्री अमित शाह इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि उच्चतम न्यायालय का फैसला राम मन्दिर के पक्ष में ही आयेगा उसी तरह से आरएसएस भी पूरी तरह से संतुष्ट नजर आ रहा है। अयोध्या स्थित विवादित परिसर के आस-पास निर्माण कार्य की गति को जिस तरह से बढ़ा दिया गया है उसे देखकर तो ऐसा ही लग रहा है कि 18 अक्टूबर के बाद से राम मन्दिर निर्माण का कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा।
अयोध्या में भारी संख्या में लोगों को जुटाव होने लगा है। चूंकि अयोध्या आने पर किसी प्रकार का हाल-फिलहाल प्रतिबंध नहीं है लिहाजा आस-पास के जनपदों से ही नहीं बल्कि अन्य प्रदेशों से भी कारसेवकों की भीड़ जुटने लगी है। बताया जा रहा है कि इसकी तैयारी काफी पहले ही कर ली गयी थी। यूपी के साथ ही अन्य प्रदेशों में संचालित आरएसएस की टीम ने युवाओं को संकेत दे दिए थे कि फैसला राम मन्दिर के पक्ष में ही आने वाला है।
हालांकि अभी उच्चतम न्यायालय का फैसला आने में लगभग एक माह का समय शेष है फिर भी भाजपा और आरएसएस कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह देखा जा रहा है। अयोध्या की आम जनता में भी कुछ इसी तरह की प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं तो दूसरी ओर किसी अनहोनी की आशंका से लोगों ने घरों में राशन जुटाना भी शुरु कर दिया है। वैसे तो अयोध्या की जनता भी यही मानती है कि स्थानीय प्रशासन की सख्ती के कारण किसी प्रकार की अनहोनी नहीं हो सकती फिर भी चांस कोई नहीं लेना चाहता।
आगामी 18 अक्टूबर को उच्चतम न्यायालय किसके पक्ष में फैसला सुनायेगा? इस पर सबकी नजर है। लेकिन संभावना को देखते हुए फिलवक्त भाजपा की टीआरपी काफी हाई है। अमित शाह की हरओर चर्चा हो रही है। भाजपा को भविष्य में इसका कितना फायदा मिलेगा? यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इतना जरूर तय है कि राम मन्दिर मुद्दे का पटाक्षेप अब बहुत जल्द होने वाला है।

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