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शर्तों के साथ अविनाश दास को मिली जमानत

फिल्म ‘अनारकली ऑफ आरा’ से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत करने वाले फिल्म निर्देश अविनाश दास को अहमदाबाद कोर्ट से जमानत मिल गई है।अविनाश दास को आईएस पूजा सिंघल और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की फोटो शेयर कर भ्रम फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में अविनाश को अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने मुंबई से हिरासत में लिया था। लेकिन अब कोर्ट से अविनाश दास को राहत मिल गई है। इसके साथ ही मजिस्ट्रेट एम. वी. चौहान ने अविनाश को इस शर्त के साथ कोर्ट से जमानत मिली है कि जब तक आरोपपत्र दायर नहीं हो जाता तब तक उन्हें हर महीने अहमदाबाद अपराध शाखा के सामने उपस्थित होना होगा।

 

क्या है पूरा मामला?

अविनाश दास को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की छवि धूमिल करने के आरोप में गुजरात क्राइम ब्रांच ने मुंबई से हिरासत में लिया था। अविनाश दास ने झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल के साथ अमित शाह की एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की थी। जिसके बाद अविनाश दास के ख़िलाफ़ गुजरात क्राइम ब्रांच ने भ्रम फैलाने और राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला दर्ज किया था। हालांकि उस समय अविनाश ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अहमदाबाद की जिला अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी लेकिन अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इंकार कर दिया था। लेकिन अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने दास को बीते 19 जुलाई को  उनके घर से हिरासत में लिया था और उन्हें क्राइम ब्रांच की टीम गुजरात ले गई थी।अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने इसी साल 14 मई को अविनाश के खिलाफ गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ झूठा भ्रम फैलाने का मामला दर्ज कर लिया था। क्राइम ब्रांच ने इस एफआईआर में अविनाश दास के खिलाफ गृहमंत्री की छवि को धूमिल करने और लोगों को भ्रामक जानकारी देने के प्रयास का मामला दर्ज किया था ।

इसके अलावा अविनाश दास पर एक और आरोप है कि उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर तिरंगा पहने एक महिला की तस्वीर साझा की थी। इस तस्वीर को  साझा करने के लिए उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का मामला भी दर्ज किया गया था। इस मामले में भी अविनाश के खिलाफ जालसाजी और आईटी अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। हालाँकि दास ने इस मामले में भी अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी लेकिन कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ‘तिरंगे में लिपटी एक नग्न महिला की तस्वीर अपलोड करना दास की मानसिक विकृति को दिखाता है और इस कारण देश की संस्कृति का अपमान हुआ है और लोगों में नफरत की भावना पैदा हुई है। इसके चलते यह अदालत उनकी जमानत की याचिका को खारिज करती है।

कोर्ट ने दास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते वक्त यह भी कहा था कि अगर इस तरह के मामलों में आरोपी को जमानत दे दी जाती है तो फिर देश में साइबर अपराधों में तेजी आ जाएगी। इसके अलावा हमारे देश के राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को भी बढ़ावा मिलेगा।अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि अविनाश दास खुद एक फिल्म निर्देशक हैं एवं उन पर देश की गरिमा बनाए रखना और राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना उनका कर्तव्य माना जाता है लेकिन फिर भी उन्होंने इस तरह की फोटो को जानबूझकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

पहले सेशन कोर्ट से जमानत नहीं मिलने के बाद अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की एक टीम दो बार उनके घर पर दबिश दे चुकी थी , लेकिन अविनाश दास क्राइम ब्रांच की टीम को घर पर नहीं मिले थे। इसके बाद क्राइम ब्रांच की एक टीम पिछले 2 दिनों से मुंबई में डेरा डाले हुई थी। जैसे ही पुलिस की टीम को जानकारी मिली वैसे ही दास को मुंबई के वर्सोवा से हिरासत में ले लिया गया और गुजरात क्राइम ब्राचं  की एक टीम उन्हें लेकर गुजरात के लिए निकल चुकी है। अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के डीसीपी चैतन्य मांडलिक का कहना है कि उन्होंने फिल्म डायरेक्टर अविनाश दास को मुंबई से हिरासत में लिया है और उनकी एक टीम उन्हें लेकर गुजरात के लिए निकली है। जैसे ही क्राइम ब्रांच की टीम अविनाश दास को लेकर अहमदाबाद पहुंचेगी तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दास के परिवार वालों का कहना है कि अविनाश ने अग्रिम जमानत की याचिका के लिए सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया हुआ है जिस पर अगले दिन को सुनवाई होनी थी,लेकिन सुनवाई से ठीक पहले गुजरात पुलिस ने अविनाश को हिरासत में ले लिया।हालाँकि कुछ दिनों पहले झारखंड कैडर की आईएएस अधिकारी पूजा सिंघल को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। एक कार्यक्रम के दौरान पूजा सिंघल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाक़ात की थी जिसकी तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। जैसे ही पूजा सिंघल के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार का मामला सामने आया वैसे ही फिल्म डायरेक्टर अविनाश दास ने पूजा सिंघल की अमित शाह की तसवीर को सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। इसके बाद गुजरात क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ झूठी अफवाह फैलाने का मामला दर्ज कर लिया था।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर को मिलने वाली जमानत महत्ब्पूर्ण है  क्योंकि पुलिस ने एक पुरानी फिल्म के कुछ दृश्यों पर टिप्पणी को आस्था के सवाल से जोड़कर उन्हें गिरफ्तार किया और उन्हें जिस तरह पच्चीस दिन परेशान किया उससे लग रहा था कि जुबैर की जमानत मुश्किल होगी।लेकिन उच्चतम न्यायालय ने मोहम्मद जुबैर को को सभी मामलों में अंतरिम जमानत दे दी।इस दौरान अदालत ने कहा कि उन्हें अंतहीन समय तक हिरासत में बनाए रखना उचित नहीं है। अदालत ने साथ ही यूपी में दर्ज सभी 6 एफ. आर. आर  को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। साथ ही यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई एसआईटी को भी भंग कर दिया। उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद मोहम्मद जुबैर की रिहाई हो गई है। इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि ज़ुबैर को लगातार जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है, उन्हें तत्काल जमानत दें। न्यायलय ने यह भी कहा कि किसी नई एफ.आई.आर में उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

इन दो घटनाओं ने जो राहत दी है वह पिछले मामलों को देखते हुए बहुत महत्वपूर्ण है। पिछले दिनों गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की याचिका पर जिस तरह पांच लाख जुर्माने की बात हो या तीस्ता सीतलवाड़ और श्रीकुमार की गिरफ्तारी का मामला हो इससे जो छवि अदालत की बनी उसके परिप्रेक्ष्य में यह उम्मीद जताई जा रही है कि देर सबेर इन मामलों पर भी सुप्रीम कोर्ट ध्यान केंद्रित करेगा।सबसे अहम सवाल इस बात को लेकर है कि उपर्युक्त दो मामलों में दिल्ली और अहमदाबाद की पुलिस की जो भूमिका रही है उसको लेकर लोगों का कहना है कि  वे किसके इशारों पर काम करते हैं।

 

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