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राजनीतिक दृष्टि से अहम होंगे विधानसभा चुनाव!

भारतीय राजनीति के लिए साल के अंत में प्रस्तावित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को राजनीति दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। ऐसे में एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने के लिए एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ज्यादा जोर दे रही है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन चुनावों में पार्टी के अच्छा प्रदर्शन करने का विश्वास जताते हुए कहा कि हम संभवतः तेलंगाना जीत रहे हैं और अभी की स्थिति के अनुसार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ भी जीत रहे हैं। बकौल राहुल राजस्थान में बेहद करीबी मुकाबला हो सकता है

साल के अंत में प्रस्तावित पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का काउंटडाउन शुरू हो गया है। ऐसे में आने वाले दो महीने भारतीय राजनीति के लिए बेहद अहम होने जा रहे हैं। जिनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों के चुनावों को 2024 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। जिसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियां जोर आजमाइश करती हुई दिखाई दे रही हैं। इन सबसे से इतर एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी चुनाव जीतने के लिए एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में ज्यादा जोर दे रही है वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के अच्छा प्रदर्शन करने का विश्वास जताया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में किसी भी राज्य में जीत हासिल न करे, यह सवाल ही पैदा नहीं होता। हम संभवतः तेलंगाना जीत रहे हैं और अभी की स्थिति के अनुसार कांग्रेस निश्चित रूप से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव जीत रही है। हालांकि राहुल ने यह भी माना कि राजस्थान में बेहद करीबी मुकाबला हो सकता है। लेकिन हमें लगता है कि हम जीत जाएंगे। क्योंकि कांग्रेस ने कर्नाटक में एक महत्वपूर्ण सबक सीखा है कि भाजपा ध्यान भटकाकर और हमें हमारी बात रखने से रोककर चुनाव जीतती है और इसलिए हमने अपनी बात प्रमुखता से रखकर चुनाव लड़ा।

Rahul Gandhi Congress Ledear

हर बार जब भी हम कोई मुद्दा पेश करते हैं, तो वे हमारा ध्यान भटकाने के लिए इस तरह की चीजों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अब हम सीख गए हैं कि इससे कैसे निपटें। ‘‘हमने कर्नाटक में जो किया वह यह है कि राज्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टिकोण दिया। यह सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रम है, जो हम आपके लिए बनाने जा रहे हैं और उसके बाद हम विमर्श को नियंत्रित करते हैं।’’ अगर आप तेलंगाना चुनाव देखें तो हम विमर्श को नियंत्रित कर रहे हैं, जबकि भाजपा विमर्श में है ही नहीं। तेलंगाना में भाजपा का सफाया हो गया है और वह खत्म हो गई है। राहुल ने दावा किया कि कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव से पहले विमर्श तय कर रही है। अगर आप राजस्थान में लोगों से बात करेंगे कि सत्ता विरोधी लहर के लिहाज से क्या मुद्दा है तो वे आपको बताएंगे कि वे सरकार को पसंद करते हैं।’’

हम भारत की 60 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। भाजपा को 2024 के लोकसभा में झटका लगेगा। विपक्ष इस चुनाव के बारे में इससे पहले के किसी भी अन्य चुनाव की तुलना में मौलिक रूप से अलग तरीके से सोच रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘विपक्षी दल इस विचार को लेकर एकजुट हैं कि भारत पर अब हमला हो रहा है। भारत की अवधारणा, स्वतंत्र चुनाव की, मुक्त अभिव्यक्ति की-अब भीषण खतरे में है। इस सोच पर हम सभी के बीच एकमत है, जिसका अर्थ है कि हमें लचीला रुख रखना होगा और हमें भारत की आत्मा के लिए लड़ना होगा, जिसके लिए एक अलग स्तर के सहयोग की आवश्यकता है।’’ विपक्षी खेमे में ज्यादातर गठबंधन केरल, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में बने हुए हैं। कुछ छोटी जगहों पर हमें कुछ मुद्दों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें हम दूर करने की कोशिश करेंगे। अब हम इसे भारत की अवधारणा की रक्षा की लड़ाई के रूप में देख रहे हैं, जबकि पहले हम इसे केवल राजनीतिक दलों के बीच एक मुकाबले के रूप में देखते थे।

दूसरी तरफ भाजपा तीनों बड़े राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में चुनावी यात्रा निकाल कर प्रदेश की जनता को साधने की कोशिश कर रही है। भाजपा राजस्थान में परिवर्तन तो मध्यप्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा निकाल अपनी ओर हवा का रुख मोड़ना चाहती है। इन तीनों राज्यों में बीजेपी अपनी जीत के लिए पूरी ताकत झोंकती हुई नजर आ रही है लेकिन पार्टी के नेताओं के अंदर असंतोष की भावना साफतौर पर देखी जा रही है। तीनों राज्यों में तीन पूर्व सीएम हाईकमान से नाराज चल रहे हैं। जिसकी वजह से आलाकमान के सामने बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। मध्य प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने खुलकर नाराजगी जाहिर कर दी है, छत्तीसगढ़ में डॉक्टर रमन सिंह निष्क्रिय चल रहे हैं। राजस्थान में वसुंधरा राजे को लेकर भी पार्टी पसोपेश में नजर आ रही है। मध्य प्रदेश में उमा भारती उमा भारती बीजेपी के लिए मुसीबत बनी हुई हैं। हाल के दिनों में वो पार्टी से खासा नाराज चल रही हैं। कुछ दिनों पहले ही बीजेपी ने प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा की शुरुआत की। जिसको लेकर उमा भारती की ओर से कड़ा बयान सामने आया था। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि उमा भारती का असली दर्द ये है कि उनको अभी से ही एक्टिव पॉलिटिक्स से दूर किया जा रहा है।

बीजेपी को लेकर कहा जाता है कि उनकी पार्टी में चुनाव लड़ने की उम्र 75 साल तक रखी गई है लेकिन उमा अभी 64 साल की हैं। अभी से उन्हें मुख्यधारा की राजनीति से दूर किया जा रहा है जबकि उनके पास 10 साल का समय है। उमा भारती राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख चेहरा रही हैं। उन्होंने साल 2003 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर हल्ला बोला था जिसकी वजह से कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा था। उमा को एक्टिव देख बीजेपी हाईकमान ने एमपी की कमान उनके हाथ में सौंप दी थी। लेकिन महज एक वर्ष के बाद भारती को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था। उसके बाद से उन्हें प्रदेश में तवज्जो आसानी से नहीं मिली। लेकिन उमा भारती ने भी हर बार मुखरता से इस ओर ध्यान खींचा है। वहीं चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा ने अब उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। इस सूची में 39 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। जिसमें कुछ नाम केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों के भी हैं, लेकिन इनमें से दो नाम ऐसे हैं जिनके बेटे या भाई वर्तमान में विधायक हैं और अब टिकट के दावेदार भी हैं। ये नाम हैं बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और केंद्रीय राजयमंत्री प्रहलाद पटेल का।

कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय फिलहाल इंदौर-3 से विधायक हैं तो प्रह्लाद पटेल के भाई जालम सिंह पटेल नरसिंहपुर से विधायक हैं। अब प्रहलाद पटेल और कैलाश विजयवर्गीय को टिकट मिलने के बाद आकाश विजयवर्गीय, जालम सिंह पटेल का टिकट कटना तय माना जा रहा है वहीं भाजपा के बड़े नेता और प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य राजेश मिश्र ने टिगट न मिलने पर नाराजगी जाहिर करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया। जिससे भाजपा में भगदड़ मची हुई है। यही हाल राजस्थान का भी है। गत् सप्ताह पार्टी की ओर से राजधानी जयपुर में मेगा इवेंट किया गया। इसमें पीएम मोदी, केंद्रीय नेताओं समेत प्रदेश बीजेपी के भी बड़े नेताओं ने शिरकत की। इस दौरान लोगों की निगाह पूर्व सीएम वसुंधरा राजे पर भी रही। लेकिन जयपुर के दादिया गांव में हुई इस जनसभा में कुछ ऐसा हुआ, जो चर्चा का विषय बना हुआ है। जब शाम 4 बजे पीएम मोदी जनसभा स्थल पर पहुंचे तो इस दौरान पीएम मोदी ने सभा स्थल में खुली जीप में एंट्री ली और इस दौरान उनके साथ बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी थे। हालांकि इस जीप में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को जगह नहीं मिल पाई।

जयपुर में हुए बीजेपी की हुई विशाल जनसभा के दौरान प्रदेश के कई बड़े नेताओं का संबोधन हुआ। वसुंधरा राजे समर्थकों को भी यह उम्मीद थी कि वसुंधरा राजे प्रदेश की जनता को संबोधित करेंगी। लेकिन पीएम मोदी के आने के बाद सीपी जोशी और राजसमंद सांसद दिया कुमारी ने उनका मंच से स्वागत किया। इसके बाद सीधे पीएम मोदी को मंच से संबोधित करने के लिए आमंत्रित कर लिया गया। इससे पहले भी अजमेर में हुई पीएम मोदी की सभा में वसुंधरा राजे ने अपनी बात नहीं रखी थी। इस सब के बीच यह सवाल बार- बार उठ रहा है कि क्या पार्टी ने वसुंधरा को साइडलाइन कर दिया है? राजनीति विश्लेषकों का कहना है कि साल 2018 में राजे के नेतृत्व में मिली हार के बाद राजे को बीजेपी हाईकमान ने धीरे- धीरे किनारे लगाना शुरू कर दिया था। लेकिन जैसे ही चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे पार्टी वसुंधरा को अपने कार्यक्रमों और पोस्टरों में खूब उपयोग कर रही है ताकि चुनावी लाभ लिया जा सके। गौरतलब है कि वसुंधरा राजे और बीजेपी के अन्य नेताओं की लड़ाई जग जाहिर है।

सभी जानते हैं कि कैसे राजे को प्रदेश बीजेपी ने ठिकाने लगाने के लिए काम किया था। पार्टी को पता है कि राजस्थान विधानसभा में अगर जीत हासिल करनी है तो वसुंधरा की आवश्यकता होगी। तभी वो पीएम मोदी के कार्यक्रमों में दिखाई दे रही हैं नहीं तो बीते चार वर्षों में बीजेपी ने राजे को इन गतिविधियों से दूर ही रखा है। कहा जा रहा है कि राजे को लेकर बीजेपी हाईकमान असमंजस की स्थिति में है न ही उन्हें आगे कर रही है। न ही खुलकर सीएम फेस को लेकर उम्मीदवार घोषित कर रहा है। वसुंधरा को लेकर कहा जाता है कि प्रदेश की 200 विधानसभा सीटों में से 60 सीटों पर उनका प्रभाव जबरदस्त है। वो सीधे तौर पर जीत और हार का फैसला कर सकती हैं। वहीं छत्तीसगढ़ में पूर्व सीएम रमन सिंह और बीजेपी की हालात ठीक नहीं बताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक प्रदेश में बीजेपी का कोई कद्दावर नेता नहीं है जो अपने बलबूते पर पार्टी को जीत दिला सके। रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ पर 15 सालों तक राज किया है लेकिन कहीं न कहीं उनकी पैठ जनता के बीच अब तक नहीं बन पाई है। बीजेपी के लिए इस बार का चुनाव बड़ा ही चुनौतियों भरा रहने वाला है क्योंकि रमन सिंह प्रदेश की राजनीति से काफी कटे हुए नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में बीजेपी के पास ऐसा कोई नेता भी नहीं है जो पार्टी को चुनाव में जीत की दहलीज तक भी ले जा सके।

 

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