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असमत उल्ला ने पेश की हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल 

स्वतंत्रता के बाद से ही हिन्दू और मुस्लिम धर्म के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। कई बार देखा गया है की यह तंव हिंसक रूप भी ले लेता है जिसके चलते देश में आतंकी हमले भी होते आये हैं। लेकिन इसी बीच मुस्लिम धर्म के एक व्यक्ति असमत उल्ला उर्फ बाबू जी ने अपनी एक बीघा जमीन कछियाना खेड़ा हनुमान मंदिर की पुनर्स्थापना के लिए दान करते हुए हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक बड़ी मिशाल पेश की है।

 

दरअसल  कछियानी खेड़ा हनुमान मंदिर लखनऊ-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। यह मंदिर हाईवे चौड़ीकरण में बाधा बन रहा था जिसके बाद मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई जिसके तहत मंदिर को तोड़ने की प्रक्रिया के विरोध को लेकर इसे पीछे हटाए जाने की योजना बनाई गई। लेकिन मंदिर के विस्थापन में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) द्वारा दी गई जमीन काम पद गई। जिसके बाद आसपास की जमीन को खरीदने की योजना बनाई गई जो असमत उल्ला की थी। जमीन को खरीदने के विषय में बात करने के लिए पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद के हस्तक्षेप पर मुख्यमंत्री के माध्यम से असमत उल्ला से बात की गई। इसके बाद असमत उल्ला मंदिर के पीछे की अपनी जमीन में से एक बीघा जमीन बजरंगबली के मंदिर के नाम दान करने के लिए राजी हो गए।

असमत उल्ला ने अपनी जमीन को दान करते हुए कहा है कि मैंने हिंदू-मुस्लिम एकता की साझी विरासत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबका साथ-सबका विकास से प्रेरित होकर हनुमान मंदिर के लिए अपनी एक बीघा भूमि बजरंगबली हनुमान के नाम दान कर दी है। शाहजहांपुर जिले में हमेशा गंगा-जमुनी तहजीब को कायम रखा गया है। मैं चाहता हूं कि मेरे न रहने के बाद भी मुझे इस तहजीब के लिए याद किया जाता रहे।

 

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