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जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत, 20 मई को हुई थी गिरफ्तारी

जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत, 20 मई को हुई थी गिरफ्तारी

जामिया छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी है। उन्हें बीते हफ्ते गिरफ्तार किया गया था। नागरिकता संसोधन कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े एक मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

तन्हा को अदालत ने बृहस्पतिवार को जमानत दे दी। इससे पहले बुधवार की सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी की थी कि मामले की जांच एक ही पक्ष की को निशाना बनाती नजर आ रही है।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरवरी महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा से जुड़े मामले में 20 मई को 24 वर्षीय तन्हा को गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 13 के तहत गिरफ्तार किया था।

उस समय पुलिस ने उन्हें स्थानीय मजिस्ट्रेट के सामने पेश करते हुए कहा कि दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा की पूरी साजिश का खुलासा करने के लिए तन्हा को रिमांड पर लेना जरूरी है। उसके बाद उन्हें 27 मई तक हिरासत में भेजा गया था।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उन्हें बुधवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा के सामने पेश करते हुए पुलिस ने 30 दिन की न्यायिक हिरासत मांग की थी। आरोप लगाया गया था कि वे दिल्ली हिंसा में सक्रिय रूप से शामिल थे।

सुनवाई के दौरान जज धर्मेंद्र राणा ने कहा, “केस डायरी पढ़ने पर परेशान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच एक ही पक्ष को निशाना बनाती हुई नजर आती है। इंस्पेक्टर लोकेश और अनिल से सवाल-जवाब करने पर वे दूसरे पक्ष के इसमें शामिल होने के बारे में अब तक की गई जांच को लेकर कुछ भी नहीं बता सके। इस बात को ध्यान में रखते हुए संबंधित डीसीपी को इसकी निगरानी करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।”

इसके बाद जामिया के छात्र तन्हा अदालत ने गुरुवार को जमानत दे दी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव राव ने तन्हा को यह राहत 25,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की जमानत पर दी। अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि मामले के 10 आरोपियों में से आठ जमानत पर हैं, साथ ही इस पर भी गौर किया कि तन्हा एक छात्र हैं और 24 सा के हैं।

अदालत ने कहा, “आरोपी का पिछला जीवन साफ सुथरा रहा है, समानता के आधार पर और सबसे महत्वपूर्ण कोविड-19 के चलते उत्पन्न वर्तमान स्थिति को देखते हुए आरोपी को जमानत दी जाती है।” हालांकि, तन्हा को अदालत ने साथ ही निर्देश दिया कि चाहे जो भी हो वह किसी हिंसा के कृत्य में लिप्त न हों और एक अच्छे जिम्मेदार नागरिक की तरह बर्ताव करें और कानून का पालन करें।

वीडियो कान्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त लोक अभियोजक अशोक कुमार ने जमानत अर्जी का विरोध दिया और कहा कि तन्हा की घटनास्थल पर मौजूदगी जांच के दौरान कॉल डेटा रिकार्ड से स्थापित हुई है। उन्होंने साथ ही यह भी आरोप लगाया कि तन्हा ने व्यापक पैमाने पर हुई हिंसा में सक्रिय भूमिका निभाई और उसके खिलाफ आरोपों की प्रकृति गंभीर है।

तन्हा के लिए पेश हुईं वकील एस. शंकरन ने अदालत को बताया कि तन्हा को झूठे मामले में फंसाया गया है। तन्हा के लिए पेश हुईं वकील ने कहा कि वह अपने परिवार का कमाने वाले मुख्य सदस्य हैं और पढ़ाई के साथ एक रेस्त्रां में पार्टटाइम काम करते थे। जमानत अर्जी में दावा किया गया कि आरोपपत्र में उसके खिलाफ हिंसा के विशिष्ट आरोप नहीं हैं। अर्जी में ये भी कहा गया कि तन्हा को 17 मई को गिरफ्तार किया गया था, जबकि मामले में आरोप पत्र 12 फरवरी को दाखिल किया गया था।

उल्लेखनीय है कि फरवरी में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। 23 से 26 फरवरी के बीच हुईं हिंसा में सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 53 लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग घायल हो गए थे। इस मामले में 13 अप्रैल तक पुलिस ने इस मामले में 800 से अधिक गिरफ्तारियां की थीं।

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