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एशिया में फ्लाइंग कार लांच करने वाला पहला देश बनेगा भारत 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ साल पहले ही भारत को एक विनिर्माण हब के रूप में विकसित करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेड इन इंडिया ‘ के माध्यम से अलग – अलग देशों की कंपनियों को भारत में कर छूट देकर अपना उद्योग भारत में ही लगाने के लिए प्रोत्साहित किया था । जिससे की भारत का आयात बिल कम हो सके और देश में रोजगार का सृजन हो सके। उनका मकसद था  लोकल फॉर वोकल के जरिए देश और देश के नागरिकों को ऊंचाई पर पहुंचना। इसी के तहत भारत ने एक कदम आगे बढ़कर एक और सफलता हासिल की है। दरअसल ,भारत जल्द ही एशिया की सबसे पहली हाइब्रिड फ्लाइंग कार लांच करने जा रहा है।

जिससे अब भारतीय लोग अपने ही देश में बनाई गई उड़ने वाली कार में यात्रा का आनंद ले पाएंगे। यह कार चेन्नई बेस्ट स्टार्टअप की यंग टीम ने तैयार की है। इस फ्लाइंग कार का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट, डिलीवरी के साथ – साथ मेडिकल एमर्जेन्सी के लिए भी किया जाएगा। इस कार में डिजिटल इंस्ट्रूमेंटस के साथ आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस भी दिया गया है। जिससे इस कार में ड्राइविंग भी बेहतरीन तरीके से की जा सकेगी। इसके अलावा इसमें GPS , एंटरटेनमेंट की  सुविधाएं भी उपलब्ध  हैं । इतना ही नहीं इसमें पैनोरमीड विंडो कैनोपी जिससे  360 डिग्री का अनुभव किया जा सकेगा।

फ्लाइंग कार को लेकर उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा कि उन्हें एशिया की सबसे पहली हाइब्रिड फ्लाइंग कार के बारे में बताया गया है। जिसे चेन्नई बेस्ड विनाता ऐरोमोबिलिटी अगले महीने 5 अक्टूबर को लांच करेगी ।
‘विनाता ऐरोमोबिलिटी’ दुनिया की सबसे बड़ी हेलिटेच प्रदर्शनी एक्सेल फ्लाइंग कार को लंदन में लांचकरने को तैयार है , लेकिन भारत चाहता है कि इस कार को भारत में ही लांच किया जाए।

कंपनी का दावा है कि यह कार दिखने में बेहद शानदार है। इसके अंदर जितनी सुविधाएं हैं उससे भी ज्यादा यह बाहर से आकर्षित है। इस कार का वजन 1100 किलोग्राम है और यह दो पैसेंजर्स के साथ 1300 किलोग्राम भार उठाकर टेकऑफ कर सकती है। विनाता ऐरोमोबिलिटी के द्वारा हाइब्रिड फ्लाइंग कार को ड्यूल ट्रैवल के लिए तैयार किया गया है। यह कार प्रति घंटा 100 से 120 किलोमीटर की रफ्तार से उड़ान भर सकती है। यही नहीं इसमें  3000 फीट तक की ऊंचाई तक उड़ान भरने क्षमता भी है।

इसकी सबसे ख़ास बात यह है कि इसमें बायो फ्यूल का इस्तेमाल किया गया है। इसका निर्माण पर्यावरण को कोई नुकसान ना पहुंचाते हुए किया गया है। इसमें सेफ्टी का भी काफी ख्याल रखा गया गया है। अगर किसी अवस्था में कोई कार में लगे गुणक भाग (रोटर ) काम करना बंद कर दें, तो ऐसी स्थिति में बाकी लगे गुणक भागों के द्वारा सुरक्षित नीचे उतरा जा सकता है।

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