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अपूर्वा के बदलते बयानों से उलझी पुलिस,सामने नही आ रही हत्या की असली वजह

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की हत्या के एक सप्ताह बाद भी असली वजह  का पता न चल पाना  कहीं ना कहीं  दिल्ली पुलिस की नाकामी को उजागर करता है  । दिल्ली पुलिस ने  रोहित शेखर की हत्या में  उसकी पत्नी  अपूर्वा शुक्ला को तीन दिन पूर्व ही गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया ,लेकिन  आखिर अपूर्वा ने  रोहित शेखर तिवारी की हत्या क्यों की  इसकी असली वजह का  पता अभी नही लगा पाई है  । अपूर्वा शुक्ला  सुप्रीम कोर्ट की  अधिवक्ता है  । वह  कानूनी दांवपेच  बखूबी जानती है । चर्चा हैं कि हत्या को वह  हादसे का रूप देना चाहती है । जिसके चलते  वह बार-बार बयान  बदल रही है  । कभी वह कहती है कि  16  अप्रैल को  उत्तराखंड से आने के बाद  रात में वह  रोहित के साथ  अंतरंग संबंध बना रही थी  । तभी  उसका गला  दब गया।   इसका उसे अगले दिन हास्पिटल ले जाने तक पता भी नहीं चला  कि वह मर चुका है या नहीं ।  हालांकि यह संभव नहीं है कि  कोई पत्नी अपने पति का  फिजिकल रिलेशन बनाते समय  इस कदर गला घोटकर हत्या कर दे कि उसको उसका पता ही ना चले । इसी के साथ साथ रोहित की पत्नी अपूर्वा का  राजनीति से जुड़ाव भी सामने आ रहा है  ।बताते हैं कि वह इंटक की  नेता थी ।  उसकी मंशा थी  कि वह  रोहित के कंधे पर  सवार होकर  राजनीति की दुनिया  में आना चाहती थी  । लेकिन  रोहित का राजनीति से दूर रहना उसको नागवार गुजर रहा था । आरोपी अपूर्वा  यह भी कह रही है कि  हत्या का कारण रोहित के साथ  उसकी भाभी का  वीडियो कॉलिंग में  शराब पीते हुए देखना था  ।शराब पीते हुए  यह दोनों  उसको  फूटी आंख नहीं सुहाए और जब  रात को घर आए  तो अपूर्वा और रोहित शेखर की  इस बात को लेकर तकरार हो गई । देवर भाभी के रिश्ते पर  तंज कसने पर  रोहित ने उसके साथ  बदतमीजी की ।  जिसके फलस्वरूप उसने  रोहित की गला दबाकर हत्या कर दी  । हालांकि  रोहित तिवारी की मां  उज्जवला तिवारी  का यह भी कहना  मायने रखता है कि  रोहित शेखर तिवारी और अपूर्वा में  शादी के बाद से ही संबंध  मधुर नहीं थे । जब  रोहित शेखर तिवारी की बाईपास सर्जरी हुई  तो उसके बाद  उसकी सेवा  अपूर्वा ने नहीं की  बल्कि उसकी भाभी ने की  । इसी को वह गलत नजरिए से देखने लगी  और उस पर झूठे आरोप लगाने लगी ।गौरतलब हैं कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नारायण दत्त तिवारी के बेटे रोहित शेखर तिवारी की 16 अप्रेल की रात हत्या उनकी पत्नी अपूर्वा शुक्ला ने की थी। अपूर्वा ने पूछताछ में अपना अपराध कबूल कर लिया है। इससे पहले अपूर्वा को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्राँच ने गिरफ़्तार कर लिया था।
दिल्ली पुलिस का कहना है कि अपूर्वा शादी से ख़ुश नहीं थी । इसलिए उसने रोहित की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के दौरान रोहित नशे में था। रोहित की माँ उज्जवला तिवारी ने भी कहा था कि शादी के बाद पहले दिन से ही अपूर्वा और रोहित में झगड़े होते थे और इससे उनका बेटा बेहद तनाव में था। बता दें कि 16 अप्रैल को रोहित अपने घर में मृत पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में रोहित की हत्या की पुष्टि के बाद पुलिस ने अपूर्वा और घर के अन्य लोगों से पूछताछ की थी।
पुलिस को शुरुआती जाँच में ही अपूर्वा पर शक हो गया था और इसके बाद पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही थी। अपूर्वा ने 15 अप्रैल की रात को रोहित के कमरे में जाने की बात स्वीकार की थी लेकिन इसे लेकर वह सही जवाब नहीं दे पा रही थी। यहीं से पुलिस का उस पर शक पुख्ता हुआ और पूछताछ में उसे अपना गुनाह कबूल करना पड़ा।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई थी कि रोहित की गर्दन पर उंगलियों के निशान मिले हैं। यह भी बात सामने आई थी कि हत्या से पहले उन्हें नशीला पदार्थ पिलाया गया और बेहोश होने पर उनकी हत्या की गई। तभी से यह सवाल उठ रहा था कि आख़िर रोहित की हत्या क्यों की गई और किसने की?
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक़, रोहित की मौत 15-16 अप्रैल की रात 1:30 बजे के आसपास हुई थी। जबकि उन्हें 16 अप्रैल को शाम क़रीब 5 बजे अस्पताल ले जाया गया। रोहित की मौत की ख़बर सामने आने के बाद से ही यह मामला संदिग्ध दिखाई दे रहा था। यह माना जा रहा था कि यह स्वाभाविक मौत नहीं है, रोहित की हत्या हुई है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह बात सही साबित हुई।
बता दें कि रोहित ने ख़ुद को एन.डी.तिवारी का बेटा साबित करने के लिए लंबी क़ानूनी लड़ाई लड़ी थी। मृत्यु से कुछ साल पहले कोर्ट के आदेश पर तिवारी ने उन्हें अपना बेटा मान लिया था और उनकी माँ उज्जवला से शादी की थी। तिवारी अपने अंतिम समय में रोहित और उज्जवला के साथ ही रहे थे। रोहित राजनीति में करियर बनाना चाहते थे और 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी में शामिल हुए थे। लेकिन बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया था। उसके बाद भी रोहित अपनी सियासी ज़मीन मजबूत करने के लिए लगातार उत्तराखंड के दौरे कर रहे थे।  11 अप्रेल को वह उत्तराखंड के नैनीताल में अपनी माँ उज्जवला के साथ वोट डालने भी गये थे ।

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