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दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिए गए अंसल ग्रुप के मालिक

सैकड़ों लोगों से ठगी के आरोप में आरोपित रियल एस्टेट कंपनी अंसल एपीआई के उपाध्यक्ष प्रणव अंसल को 29 सितंबर को दिल्ली एयरपोर्ट से पुलिस हिरासत में ले लिया गया। माना जा रहा है कि वह लंदन भागने की फिराक में थे। पुलिस द्वारा उन्हें रविवार शाम लखनऊ लाया गया। उनकी कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें जेल भेज दिया गया। आव्रजन अधिकारियों के अनुसार, अंसल लंदन के लिए एयर इंडिया की एक उड़ान पकड़ने वाले थे, लेकिन हवाईअड्डे पर ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया। 

एसएसपी कलानिधि नैथानी द्वारा बताया गया कि उनके खिलाफ पूर्व में ही लुकआउट नोटिस जारी कर दिया गया था। इंटरपोल से सूचना मिलने के बाद विभूतिखंड पुलिस सक्रिय हो गई और दिल्ली पुलिस की मदद से अंसल को एयरपोर्ट से ही दबोच लिया गया। इंस्पेक्टर विभूतिखंड राजीव द्विवेदी, विवेचक दशरथ मौर्या समेत तीन सदस्यीय टीम उन्हें शाम को लखनऊ ले आई, जहां पहले कोर्ट में पेश किया गया और फिर जेल भेज दिया गया। प्रणव अंसल के विरूद्ध विभूतिखण्ड थाने में 406, 420, 467, 468, 471, 504, और 506 की धाराओं में एफआईआर दर्ज है।

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अंसल टाउनशिप घोटाले में सुशील अंसल सहित तीन अन्य निदेशकों के गिरफ्तारी की कवायद लखनऊ पुलिस की ओर से पहले से ही शुरू कर दी गई थी। सभी पर लखनऊ अंसल टाउनशिप में घोटाले और पैसा हड़प कर धोखाधड़ी करने के आरोप लगे थे। विभूतिखंड, गोमतीनगर, हजरतगंज, पीजीआइ समेत राजधानी के अलग-अलग थानों में करीब 25 मुकदमे सिर्फ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में दर्ज हैं। अंसल ग्रुप पर गरीबों ,रिटायर्ड जज, कर्नल, विंग कमांडर समेत कई अधिकारियों के भी लाखों रुपये हड़पे जाने का आरोप है।

 हालाँकि कंपनी ने अपने बयान में कहा कि अंसल एपीआई कंपनी के खिलाफ दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया था। इन तीन एफआईआर में एक केस हाईकोर्ट की ओर से निरस्त कर दिया गया था, जबकि दो मामले शिकायतकर्ता के साथ सुलझा लिए गए थे। सेटलमेंट एग्रीमेंट को रजिस्टर किया जा चुका है और संबंधित कोर्ट और पुलिस अथॉरिटी में इसे जमा करा दिया गया है। हैरानी की बात है कि कंपनी की ओर से इतना कुछ किए जाने के बावजूद लुकआउट सर्कुलर अभी तक बना हुआ है। प्रणव अंसल के देश छोड़ कर भागने की रिपोर्ट बिल्कुल गलत है। अंसल एक जिम्मेदार व्यक्ति हैं और अथॉरिटी के साथ पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। बाकी बचे मामले निपटाने के लिए कस्टमर्स के साथ कोशिशें जारी हैं।

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