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आंध्र प्रदेश: 21 दिन में दुष्कर्म दोषियों को मिलेगी सजा, राज्य कैबिनेट से ड्राफ्ट बिल पास

महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनज़र आंध्र प्रदेश सरकार अब महिलाओं की सुरक्षा के लिए एक नया कानून लाने जा रही है। इस कानून के जरिए बलात्कारियों को मृत्युदंड की सजा का प्रावधान तय होगा। आंध्र प्रदेश कैबिनेट द्वारा इस बिल को मंजूरी दे दी गई है। बिल पास होते ही आंध्र प्रदेश रेप के मामलों में मौत की सजा देने वाला पहला राज्य होगा। वर्तमान में रेप के दोषियों के लिए अब तक भारतीय संविधान में मृत्युदंड का प्रावधान नहीं है।
हाल ही में तेलंगाना में एक महिला डॉक्टर के साथ रेप और हत्या की दुखद घटना के बाद ही यह कानून लाया जा रहा है। इस घटना के बाद लोगों में काफी गुस्सा है जिसे देखते हुए तेलंगाना सरकार द्वारा इस बिल को लाया गया है। इस कानून के मुताबिक ,सभी 13 जिलों में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी जो रेप , यौन उत्पीड़न, तेजाब हमला और सोशल मीडिया के जरिए उत्पीड़न जैसे महिलाओं व बच्चों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में मुकदमा चलाएंगी। साथ ही विधेयक में पॉक्सो ऐक्ट 2019 की संशोधित तर्ज पर बच्चों के साथ यौन शोषण के लिए मौत की सजा का भी प्रस्ताव है, जिसे इस साल की शुरुआत में ही संसद से मंजूरी दे दी गई थी।
प्रस्तुत ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम’ के तहत बलात्कार दोषियों के लिए मौत की सजा का प्रावधान किया गया है। संशोधित कानून, ऐसे मामलों में जहां संज्ञान लेने लायक साक्ष्य उपलब्ध हो ,जाँच को सात दिनों में पूरी करने और अगले 14 दिनों में अदालत मुकदमा चलाने का प्रावधान करता है ताकि दोषियों को 21 दिनों के भीतर ही सजा दी जा सके। वर्तमान में कानून ऐसे मामलों में मुकदमा चलाने के लिए चार महीने का समय देता है।

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