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पर्यावरण के साथ-साथ मानव शरीर के लिए भी खतरा बन रहा प्लास्टिक

वर्तमान में प्लास्टिक हमारे जीवन को सबसे ज्यादा पर्यावरण को प्रभवित कर रही है और यह हमारे लिए सबसे गंभीर चिंता का विषय हैं। देश में भूख मिटाने के लिए गरम-गरम खाने से लेकर ठंडे पानी तक प्लास्टिक की वस्तुओं के उपयोग से दिन -दिन बीमारियों का खतरा भी बढ़ता ही जा रहा है। पर्यावरण संबंधी एक समूह का कहना है कि धरती पर कचरा फैला रहे प्लास्टिक के लाखों टुकड़े पूरी दुनिया में फ़ैल जाते हैं। आज हमारे आस-पास प्लास्टिक ही प्लास्टिक है। दुनिया में पहली बार मानव रक्त में भी माइक्रो प्लास्टिक पाया गया है।

इसी बीच अमेरिकी केमिकल सोसाइटी की ओर से एक ताजा अध्ययन किया गया है जिसमें बताया गया है कि ओवन में खाना पकाने व गर्म रखने के लिए नायलॉन बैग या प्लास्टिक की परत वाले कप-गिलास के जरिए प्लास्टिक कण मानव शरीर में पहुंच रहे हैं।

यह रिपोर्ट अध्ययनकर्ता क्रिस्टोफर जांगमेइस्टर की है जो ‘एन्वायर्नमेंट साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ जर्नल में प्रकाशित हुई है। गौरतलब है कि आज सामान्यत: नायलॉन बैग या यह कप इस्तेमाल हो रहे हैं, लेकिन इनके माध्यम से हमारे शरीर में प्लास्टिक के नैनो-पार्टिकल के अंश लाखों करोड़ की संख्या में शरीर में जा रहे हैं।

इन बैग व कप से पिया गया करीब आधा लीटर पानी हमारे शरीर की हर 7 कोशिकाओं के अनुपात में 1 प्लास्टिक नैनो पार्टिकल शरीर के भीतर पहुंचा सकता है। यह संख्या अमेरिकी खाद्य व औषधि प्रशासन के नियमों के अनुसार सुरक्षित हैं, हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार लंबे अध्ययनों की भी जरूरत है।

क्या है नायलॉन बैग और प्लास्टिक ?

अध्ययनकर्ताओं के अनुसार यह फूडग्रेड प्लास्टिक खाने-पीने की कई चीजों के सीधे संपर्क में आता है। भोजन की नमी बनाए रखने के लिए नायलॉन बैग इस्तेमाल किए जाते हैं। ओवन में भी इसका यूज होता है।

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