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इलाहाबाद : पुलिस की लाठी ने बिगाड़ा भाजपा का चुनावी समीकरण

उत्तर प्रदेश के चुनावों में पांचवें चरण में इलाहाबाद में पुलिस की लाठी भाजपा पर भारी पड़ रही है। पिछले माह छात्रों पर चली पुलिस की लाठी की आवाज चुनावी शोरगुल में बहुत दूर तक सुनाई दे रही है। कहा जा रहा है कि युवाओं पर बरसाई गई पुलिस की लाठी ने चुनावी फिजा को ही बदल दिया है। संगम घाट से लेकर छात्रों के लॉज तक सत्ता विरोधी स्वर सुने जा रहे हैं। धर्म और अध्यात्म की इस नगरी में हिन्दुत्व और राष्ट्रवाद पर बेरोजगारी का मुद्दा हावी हो रहा है।
गौरतलब है कि एक महीने पहले प्रयागराज के बघाड़ा में प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों ने आरबीटी भर्ती परीक्षा रिजल्ट को लेकर विरोध किया था। इस दौरान छात्र प्रयाग रेलवे स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर आ गए थे। उस समय पुलिस द्वारा छात्रों को बलपूर्वक ट्रैक से हटाया गया था। इस पुलिसिया कार्रवाई में लगभग 90 छात्रों को गिरफ्तार किया गया था। इसमें लगभग 200 छात्र घायल हुए हैं और 30 गंभीर रूप से चोट खा गए थे।  इस मामले में पुलिस ने कारवाई करते हुए हॉस्टल और प्राइवेट लॉज में घुसकर छात्रों की बर्बरतापूर्वक पिटाई के कई वीडियो वायरल हो हुए थे। जिस पर विपक्षी पार्टियों ने भी कई सवाल खड़े किए।
 हालांकि, इस  प्रकरण में एसएसपी प्रयागराज ने छह पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया‌ था। इसमें एक इंस्पेक्टर, दो दरोगा और तीन सिपाही शामिल हैं। जबकि कुछ छात्रों के खिलाफ भी कारवाई की गई थी।   समाजवादी पार्टी के साथ ही कांग्रेस और बसपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था। तब सत्तारूढ़ भाजपा को छात्रों और बेरोजगारों की सबसे बड़ी दुश्मन करार दिया गया था। साथ ही कहा गया कि भाजपा युवाओं को रोजगार देने की बजाय लाठियों की चोट दे रही है।

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