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एक राष्ट्र, एक चुनाव के मुद्दे पर बुलाई सर्वदलीय बैठक हुई रद्द

कांग्रेस और  उसके सहयोगी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ के विषय पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक रद्द कर दी गई है। कल  सोनिया गांधी की अध्यक्षता में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने घटक दलों की बैठक हुई थी पर एक राष्ट्र एक चुनाव के मुद्दे  पर कोई बात नहीं हुई थी।
सोनिया गांधी से कल  जब इस विषय पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कल बताया जाएगा। कांग्रेस एवं विपक्षी दल लगातार देश में एक साथ सारे चुनाव करवाने का विरोध कर रहे हैं। वहीं भाजपा एक साथ सारे चुनाव करवाने का पक्षधर है। पार्टी का तर्क है कि इससे चुनाव में होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। वहीं विपक्ष का तर्क है कि लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में मुद्दे अलग-अलग होते हैं दोनों को साथ करवाने से मुद्दों पर चुनाव नहीं हो सकेगा। साथ ही ग्रामीण परिवेश के चुनाव तो चेहरों पर होते हैं। अगर चुनाव एक  साथ होगा तो पार्टीवाद वहां भी हावी हो जाएगा। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस बैठक का बहिष्कार किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज संसद भवन में सभी दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की एक अहम बैठक बुलाई थी । संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक, पीएम मोदी इस बैठक में एक देश, एक चुनाव के मुद्दे के साथ ही महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से जुड़े कार्यक्रमों और कुछ  अहम मुद्दों पर  को लेकर भी चर्चा होनी थी । पीएम  सदन में एक टीम स्पिरिट की भावना लाना चाहते हैं इसलिए उन्होंने आज  सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की बैठक बुलाई थी । इस बीच राष्ट्रीय अध्यक्षों की आज बुलाई बैठक में कांग्रेस , टीएमसी नेता ममता बनर्जी और बसपा सुप्रीमों मायावती और अन्य घटक दलों ने इस बैठक में  शामिल होने से  इनकार कर दिया । उन्होंने इस मामले में संसदीय कार्यमंत्री को एक जवाबी चिट्ठी भेजी ।

उन्होंने इस संबंध में   पत्र लिखकर सरकार को सलाह दी कि वह ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर ‘‘जल्दबाजी’’ में फैसला करने के बजाए इस पर एक श्वेत पत्र तैयार करे। बनर्जी ने पत्र में लिखा, ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ जैसे संवेदनशील एवं गंभीर विषय पर इतने कम समय में जवाब देने से इस विषय के साथ न्याय नहीं होगा। इस विषय को संवैधानिक विशेषज्ञों, चुनावी विशेषज्ञों और पार्टी सदस्यों के साथ विचार-विमर्श की आवश्यकता है।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि वह और उनका दल 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे होने और महात्मा गांधी की 150वीं जयंती वर्ष समारोहों में बढ़-चढ़ कर भाग लेंगे, लेकिन संसद की उत्पादकता में सुधार के तरीकों का मामला निचले सदन का है और संबंधित मंत्रालय को इससे निपटना चाहिए।

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