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भाजपा में इस समय पूरी तरह मोदी-शाह का कब्जा है। पार्टी को फर्श से अर्श तक लाने वाले सभी पुराने भाजपाई वर्तमान परिदृश्य में पूरी तरह हाशिए पर हैं। कहा तो यहां तक जाता है कि अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ तक का प्रभाव खासा कमतर हो चला है। एक समय था जब नागपुर का हर आदेश भाजपा के लिए पत्थर की लकीर समान होता था। अब लेकिन ऐसा नहीं है। संघनिष्ठ भाजपा नेताओं को साइड लाइन कर मोदी-शाह ने पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी से लेकर प्रदेश संगठनों तक में अपने विश्वस्तों की ताजपोशी करा डाली है। संघ से भाजपा में भेजे गए रामलाल और राममाधव सरीखे कई बड़े नाम अब दिल्ली के सत्ता गलियारों से गायब हो चले हैं।

ऐसे में हाशिए में पड़े नेताओं की उम्मीदें यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर जा टिकी हैं। योगी अकेले ऐसा नेता और सीएम बन उभरे हैं जो दिल्ली दरबार के आदेशों को खास तरजीह नहीं देते। इसके पीछे एक बड़ा कारण योगी की वह कट्टर
हिंदुत्ववादी छवि है जिसके चलते 2017 तक पूर्वाचंल को राजनीति से बाहर अनजाने रहे आदित्यनाथ आज पूरे देश में हिंदुत्व का ब्रांड बन उभर चुके हैं। मोदी सरकार के सात साल देश में भारी निराशा के साल रहे। स्वयं पीएम तक की कार्यशैली को लेकर प्रश्न अब उठने लगे हैं। राफेल विमान सौदे से लेकर अंबानी-अडानी संग उनके रिश्तों ने उनकी छवि को खासा प्रभावित कर डाला है। दूसरी तरफ चार बरस से यूपी की सत्ता संभाल रहे योगी पर एक भी भ्रष्टाचार का आरोप नहीं है। ऐसे में योगी भला क्यों दिल्ली के इशारों पर नाचते? उन्होंने एक तरह का अघोषित विद्रोह कर दिल्ली दरबार को सकते में डाल दिया। संघ समेत सारा सिस्टम एक्टिव हो डैमेज कंट्रोल में जुट गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग योगी आदित्यनाथ

चर्चा खासी गर्म है कि योगी को दिल्ली बुलाकर काफी ऊंच-नीच समझाई गई। वे लेकिन हठयोगी हैं। कुछ बातों पर उन्होंने अपनी सहमति दे दी तो कुछ से साफ इंकार कर दिया। खबर गर्म है कि योगी अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर पीएम के खास अरविंद कुमार शर्मा को मंत्री तो बनाने जा रहे हैं। किंतु उन्हें गृहमंत्री बनाने से योगी ने स्पष्ट मना कर डाला है। अब सबकी निगाहें यूपी पर जा टिकी हैं। यदि योगी मंत्रिमंडल में एके शर्मा जगह पाते हैं और उन्हें गृह मंत्री बनाया जाता है तो इसे योगी की हार माना जाएगा। खबर गर्म है कि योगी को ऐसे में कई असंतुष्ट भाजपाई इन दिनों समझाने में लगे हुए हैं कि वे अपना हठयोग जारी रखें। सूत्रों की मानें तो योगी को यह भी समझाया जा रहा है कि यदि वे डटे रहे तो आने वाले समय में उनका राष्ट्रीय राजनीति में आना तय रहेगा और यदि वे झुक गए तो 2022 के बाद उनका भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।

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