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सबूतों के अभाव में बरी सभी आरोपी

उत्तरप्रदेश के पूर्व बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में
करीब 6 साल तक चली सुनवाई के बाद सीबीआई के विशेष अदालत ने मुख़्तार
अंसारी समेत सभी आरोपियो को बरी कर दिया है। न्यायधीश अरुण भारद्धाज
द्वारा मुख्तार अंसारी के साथ ही उनके भाई अफजाल अंसारी ,मंसूर अंसारी
,एजाज उल हक़ ,राकेश पांडेय ,रामू मल्लाह व संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा को
सबूतों के अभाव में मामले से बरी कर दिया गया।
वर्तमान में मुख्तार अंसारी मऊ से बसपा विधायक है। मुन्ना बजरंगी की कुछ
समय पहले ही जेल में हत्या कर दी गई थी ,और एक आरोपी के मौत हो गयी। एक
आरोपी अफरोज खान पहले ही आरोप मुक्त हो चुका है। जबकि तीन आरोपित विश्वास
,जफ़र और अताउर्रहमान को अदालत द्वारा भगोड़ा घोषित किया जा चुका था।  अन्य
गवाह अपने बयान से मुकर गए जिससे न्याय मिलने की उम्मीदे और धूमिल होती
चली गयी।
14 साल बाद भी कानूनी शिकंजे में नहीं  विधायक कृष्णानंद राय के हत्यारे
कृष्णानंद राय  की 29 नवंबर में हत्या कर दी गई थी उनकी पत्नी अलका राय
द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की गई थी कि इस मामले की जांच
सीबीआई से करवाई जाये। जिसके पश्चात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ये केस सीबीआई
को सौंप दिया था। इसके बाद अलका राय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में यह भी
याचिका दायर की गई कि केस के सुनवाई उत्तरप्रदेश से बाहर ट्रांसफर की
जाये। याचिका में अलका राय द्वारा आशंका व्यक्त की गई थी कि आरोपियों को
सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष सुनवाई असंभव
है। अलका राय के याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई को
उत्तरप्रदेश से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया था। नेताओं उस दौरान रहे
धरना प्रदर्शन  भी इसका एक कारण थे।
क्या थी घटना :
घटना वाले दिन विधायक कृष्णानंद राय गाज़ीपुर जिले के गोड़उर गांव में शाम
को पहुंचे थे।  वे वहां से पड़ोस के गांव सियारी जाने की तैयारी में थे।
सियारी गांव में एक क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन पर चीफ गेस्ट के तौर
पर उन्हें बुलाया गया था।  वे इस बात से पुरी तरह बेख़बर थे कि आने वाले
चंद घंटे उनकी जिंदगी के आखरी घंटे होंगे। कृष्णानंद हमेशा बुलेटप्रूफ
गाड़ी में घर से निकलते थे। लेकिन घटना वाले दिन वह सामान्य वाहन से
पहुंचे थे। बसनिया चट्टी से डेढ़ किलोमीटर आगे जाने पर उनकी गाड़ी के सामने
एक गाड़ी आकर रुकी। इसमें से आधुनिक हथियार के साथ कई लोग निकले और बिना
देर किए कृष्णानंद राय की  गाड़ी पर सीधे ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे।
कृष्णानंद को विशेष तौर पर निशाना बनाया गया और उन पर अन्धाधुंध गोलियों
की बौछार की गई थी। वारदात में गाड़ी में सवार कृष्णानंद के समेत अन्य लोग
भी मरे गए थे। इस हत्याकांड में आधुनिक हथियारो का उपयोग पहली बार किया
गया था।
कृष्णानंद की हत्या के बाद बलिया से लेकर मऊ ,गाज़ीपुर और बनारस तक उनके
समर्थको का जबरदस्त गुस्सा देखा गया था।  इस हत्याकांड के विरोध में
समर्थको द्वारा जगह जगह आगजनी ,तोड़फोड़ और हिंसा की गयी। वाराणसी के कई
इलाको में भी उपद्रव देखने को मिला। समर्थको के आक्रोश को देखते हुए कई
निजी स्कूल और कॉलेजों को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया गया था,साथ ही
गाज़ीपुर और बनारस में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था।
कृष्णानंद की हत्या के बाद वरिष्ठ बीजेपी नेता और वर्तमान रक्षा मंत्री
राजनाथ सिंह ने सीबीआई जांच की मांग करते हुए वाराणसी में अनशन शुरू कर
दिया गया था।  तब की सपा सरकार ने सीबीआई जांच से साफ इंकार कर दिया और
राजनाथ का धरना प्रदर्शन विफल रह गया। जब बात नहीं बनी तब भाजपा द्वारा
उत्तर प्रदेश में न्याय यात्रा निकाली गई। इस यात्रा को रवाना करने स्वंय
वाराणसी पहुंचे थे।
सीबीआई कोर्ट :
कृष्णानंद राय हत्याकांड के आरोपों से मुख्तार अंसारी समेत आठ आरोपियों
को बरी करते हुए कोर्ट द्वारा कहा गया कि यह एक बड़ा मामला था,जिसमें सात
लोगों की हत्या कर दी गई। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा
की गई टिप्पणी का भी जिक्र किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हर
मामले में गवाह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,जो अंधकार को समाप्त कर देता
है,अज्ञानता से घिरे न्याय का चेहरा रोशन कर देता है। इसके बावजूद भारतीय
कानून -व्यवस्था में गवाहों को खतरों का सामना करना पड़ता है।  सुप्रीम
कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद गवाहों को सुरक्षा मुहैया करने के लिए कई तरह
के प्रावधान लागू किए गए ताकि गवाह अपना बयान दे सकें।  किसी दवाब में
अपना बयान न बदले। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और 2018 में बनाईं गई गवाह
सुरक्षा योजना का जिक्र इस मामले में फैसले में किया गया। विशेष अदालत
द्वारा कहा गया कि अगर कृष्णानंद राय हत्याकांड के मामले में भी गवाहों
को सुरक्षा योजना का लाभ मिला होता तो शायद नतीजा कुछ और हो सकता था। बता
दें कि इस केस में कुल 53 गवाहों के बयान दर्ज़ किये गए थे ,जिसमें कुछ
चश्मदीद गवाह भी शामिल थे।
शहादत दिवस:
बीजेपी द्वारा इस हत्याकांड के विरोध में हर साल कृष्णानंद राय का शहादत
दिवस भी मनाया जाता है। मुहम्मदाबाद के शहीद पार्क में शहादत दिवस का
आयोजन किया जाता है। उनकी पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव गोड़उर में मनाई गई
थी।
इस हत्याकांड के फैसले का सभी को इंतज़ार था और सबकी नज़रे फैसले पर थी
हालांकि 14 साल बाद आए इस फैसले से सवाल अब भी कायम है कि कृष्णानंद राय
की हत्या किसने की?

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