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आप को अलविदा कर घर वापिसी करेगी अलका लांबा 

आम आदमी पार्टी की राजनीति में कुछ नेताओ को छोड दे तो बहुत से नेता ऐसे है जो पार्टी हाईकमान की कार्यशैली से नाखुश है। ऐसी ही एक नेता है अलका लांबा जो आम आदमी पार्टी की चाँदनी चौक से विधायक भी है। लांबा कांग्रेस से आम आदमी पार्टी में आई थी। लेकिन अब वह घर वापिसी के लिए उतावली हो रही है।
आम आदमी पार्टी की विधायक अलका लांबा की दो दिन पूर्व कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात होते ही दिल्ली की गलियों में चर्चा ए आम होने लगी है। इससे अटकलें लगनी शुरू हो गई हैं कि अलका जल्द ही कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं ।
अलका लांबा की पिछले एक साल से ज्यादा समय से आ

प संयोजक अरविंद केजरीवाल से अनबन चल रही है । फिलहाल लांबा उनकी कार्यशैली की जबरदस्त आलोचक बनी हुई हैं । कारण रहा दिल्ली में लोकसभा की सातों सीट हरने के बाद लाम्बा ने उनके नेतृत्व पर ही प्रश्न खड़े करना ।इसके बाद अल्का को केजरीवाल के व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल दिया गया था । इससे पहले अप्रैल में लांबा की पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज की ट्वीटर पर लंबी बहस हुई थी । तब भारद्वाज ने अल्का को पार्टी से इस्तीफा देने की सलाह दे डाली थी ।
याद रहे कि अल्का पहले भी कह चुकी हैं कि वह आप छोड़ना चाहती हैं । सूत्र बता रहे है कि अब अल्का ने अब अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापस आने का मन बना चुकी है । गौरतलब है कि 2015 के चुनाव में दिल्ली में आप की लहर में अलका चांदनी चौक से विधायक चुनी गई थीं । 2020 में दिल्ली में फिर चुनाव होने जा रहे हैं । वह पिछले महीने कह चुकी हैं कि वह इस बार स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर दिल्ली विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी ।
हालांकि अल्का लांबा को उम्मीद है कि उसकी पुरानी पार्टी कांग्रेस उसको अपने साथ शामिल कर लेगी। शायद यही वजह है कि सोनिया गाँधी से हुई मुलाकात से अलका लांबा अति उत्साहित है। यहा तक कि मुलाकात के बाद अलका लांबा ने ट्वीट किया है- ‘सोनिया गांधी कांग्रेस की अध्यक्ष ही नहीं यूपीए की चेयरपर्सन भी हैं और सेकुलर विचारधारा की एक बहुत बड़ी नेता भी। देश के मौजूदा हालात पर उनसे लंबे समय से चर्चा बाकी थी।आज मौक़ा मिला तो हर मुद्दे पर खुल कर बात हुई। राजनीति में ये विमर्श का दौर चलता रहता है और चलते रहना चाहिए।’ गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी से बगावत कर चुकीं दिल्ली की चांदनी चौक विधानसभा से विधायक अलका लांबा का छात्रों खासकर युवाओं में खासा असर है। कांग्रेस को भी ऐसे तेज तर्रार नेता की दरकार है।
गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी में शामिल होने से पहले अलका लांबा कांग्रेस पार्टी की सक्रिय सदस्य रह चुकी हैं। 90 के दशक में अलका लांबा कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया की नेता के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय में छात्र इकाई के अध्यक्ष पद का चुनाव जीत चुकी हैं।
यहां पर यह भी बता दें कि इसी साल मार्च महीने में चांदनी चौक सीट से विधायक अलका लांबा ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी से दोबारा जुड़ना उनके लिए सम्मान की बात होगी। हालांकि, तब अलका लांबा ने कहा था कि उन्हें कांग्रेस की ओर से अभी कोई प्रस्ताव नहीं मिला है।
अलका लांबा ने तब कहा था कि मुझे कांग्रेस की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला। 25 साल के राजनीतिक करियर में मैंने 20 साल कांग्रेस को दिए हैं। जब दिल्ली में केवल भाजपा और कांग्रेस में लड़ाई होती थी, तब 15 साल तक लोगों ने भाजपा की सरकार नहीं बनने दी। लोगों ने भाजपा को हराने के लिए एक बार फिर विकल्प देखा और अरविंद केजरीवाल ने वह किया। अब बात देश की है। मैंने देखा है कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कितना अच्छा काम किया है। कांग्रेस लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकती है, इसलिए पार्टी को मजबूती देने के लिए हमें आगे आना चाहिए।
यहा यह याद दिलाना जरुरी है कि पिछले महीने यानी अगस्त महीने की शुरुआत में आम आदमी पार्टी (आप) से नाराज चल रहीं चांदनी चौक से विधायक अलका लांबा ने पार्टी से इस्तीफा देने का एलान किया था। अलका लांबा ने अपने विधानसभा क्षेत्र में रायशुमारी के बाद आप छोड़ने का फैसला किया था। तब आगे के रुख पर उन्होंने कहा था कि वह निर्दलीय चुनाव लड़ेंगी।
अलका लांबा की यह नाराजगी पुरानी है। वह दिसंबर 2018 से आम आदमी पार्टी से नाराज चल रही हैं, जब आप के एक विधायक ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिया गया ‘भारत रत्न’ वापस लेने की मांग वाला एक प्रस्ताव विधानसभा में रखा था।  आप पार्टी और लांबा के बीच चल रही तनातनी और हालात खराब होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि तब अलका लांबा ने दावा किया था कि अरविंद केजरीवाल से जब बात की तो केजरीवाल ने मुझे पार्टी छोड़ने के लिए कहा था। इसके बाद लोकसभा चुनाव के दौरान भी अलका लांबा और आप नेता सौरभ भारद्वाज आमने-सामने आ गए थे। तब अलका लांबा ने कांग्रेस में जाने की इच्छा जताई थी। अभी पिछले दिनों चल रहे दिल्ली के विधानसभा सत्र में एक मुद्दे को उठाने और उस पर अडे रहने के चलते लांबा को विधानसभा से बाहर तक निकलवा दिया गया था।

 

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