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चुनौतियों के बीच उड़ने को तैयार ‘आकाशा’

देश-दुनिया में कोरोना संकट के कारण एयरलाइन कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा रहा है, बावजूद इसके दिग्गज उद्योगपतियों को लगता है कि आने वाले दिनों में यह फायदे का सौदा हो सकता है। ऐसे समय में जब ज्यादातर एयरलाइंस अपने सर्वाइवल की कामना कर रही हैं। बिग बुल के नाम से मशहूर दिग्गज इंवेस्टर राकेश झुनझुनवाला ‘आकाशा’ नाम से एक एयरलाइंस की शुरुआत करने जा रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी दे दी है।

टाटा समूह के पास इंडियन एयरलाइंस का मालिकाना हक जाने के बाद भारतीय उड्डयन क्षेत्र के लिए दूसरी बड़ी खबर जेट एयरवेज के संभावित पुनर्जन्म को लेकर आई। अब बिग बुल राकेश झुनझुनवाला ने इंडियन एविएशन क्षेत्र में अपनी एंट्री करवा तेजी से पटरी पर आ रहे एविएशन सेक्टर को मजबूती देने का काम कर डाला है। गौरतलब है कि टाटा ग्रुप की दोनों मौजूदा एयरलाइंस प्रॉफिटेबिलिटी की तलाश में हैं और एयर इंडिया को खरीदने से मिला स्केल उन्हें उस दिशा में ले जा सकता है, खासकर एविएशन सेक्टर में दशकों से जमे ‘महाराजा ब्रांड’ के दुनिया भर में फैले नेटवर्क के जरिए।

एयरलाइन चलाना हमेशा से ही बेहद चुनौती पूर्ण रहा है और आगे भी रहेगा। लेकिन इंडस्ट्री के जानकार कहते हैं कि झुनझुनवाला एक सधी हुई राजनीति और अनुभवी टीम के सहारे इन चुनौती से पार पाने का माद्दा रखते हैं। उनकी टीम में विनय दुबे और आदित्य घोष जैसे एविएशन के दिग्गज शामिल हैं। अगर वह ऐसा कर सकें तो आकाश चूमने के लिए ‘आकाशा’ के लिए इससे बेहतरीन समय कोई और नहीं हो सकता है।

किसी भी नए क्षेत्र में ऐसे समय में कदम रखना जब बाकी दिग्गज मुश्किल हालातों का सामना कर रहे हों तो पैर जमाना बेहद मुश्किल होता है। गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते भारत की इकलौती मुनाफे में चल रही एयरलाइन ‘इंडिगो’ को भी नुकसान के काले बादलों ने ढंक लिया है। कोरोना की दहशत के करीबन 19 महीनों बाद बड़ी हवाई कंपनियों में सिर्फ ‘इंडिगो’, ‘टाटा’ और वाडिया ग्रुप की ‘गो फर्स्ट’ एयरलाइंस के प्रमोटरों के पास संसाधन बचे हैं। ऐसे में अगले साल की शुरुआत में ‘एयर इंडिया’, ‘एयर इंडिया एक्सप्रेस’, ‘एयर एशिया’, ‘विस्तारा’ और ‘इंडिगो’ के बीच असली घमासान देखने को मिलेगा। इस बीच झुनझुनवाला का नया वेंचर भी अपने पांव जमा सकता है, लेकिन एकाध साल बाद।

प्रधानमंत्री मोदी संग राकेश झुनझुनवाला और रेखा झुनझुनवाला (फाइल फोटो)

कोविड ने दुनियाभर की एयरलाइंस की कमर इस तरह से तोड़ दी है कि आज नई कंपनी को कम वेतन पर प्लेन और ट्रेंड मेनपावर जैसे पायलट मिल सकते हैं। एक कैप्टेन का मासिक वेतन लगभग 7-8 लाख हुआ करता था, जो अब 5-6 लाख हो गया है। फर्स्ट अफसर का वेतन सामान्य रूप से 4 .5-5 लाख से घटकर 3 .5-4 लाख हो गया है। हवाई अड्डे में जहां पहले स्लॉट उपलब्ध नहीं थे अब उड़ानों की तलाश कर रहे हैं। दरअसल, कुछ एयरलाइंस की हालत इतनी खराब है कि भारी कटौती के बाद भी वे कर्मचारियों को वेतन नहीं दे पा रही हैं। इसलिए उनके कर्मचारी दूसरी कंपनियों में जाने को तैयार हैं। ‘आकाशा’ के साथ सबसे अच्छी बात यह है कि वह नए सिरे से शुरुआत कर रही है। वह भी ऐसे समय जब दूसरी एयरलाइंस मुश्किल में हैं, नुकसान झेल रही हैं और उनके पास धंधे में लगाने को बहुत पैसा भी नहीं है।

उम्मीद की ये सारी किरणें ऐसे समय में दिख रही हैं, जब कोविड पर थोड़ा नियंत्रण है। पिछले मार्च से घरेलू उड़ानों पर लगाई क्षमता प्रतिबंध खत्म की जा रही है। इसका मतलब है कि एयरलाइंस अपनी पूरी क्षमता के साथ घरेलू उड़ानें भर सकती हैं। सरकार ने पिछले मार्च से विदेशी पर्यटकों पर से भी प्रतिबंध हटाना शुरू कर दिया है। इसलिए एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या भी बढ़ा सकती हैं। ऐसे समय में एयरलाइन सेक्टर में झुनझुनवाला का आना किसी ऐसे बल्लेबाज की तरह है, जिसका सामना खतरनाक गेंदबाजों से है, लेकिन पिच थोड़ी अच्छी जरूर हो गई है।

एविएशन सेक्टर लंबे समय से निवेश के लिए बिग बुल को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा था। कुछ साल पहले जब ‘इंडिगो’ का आईपीओ आया था, तब उसके तत्कालीन अध्यक्ष आदित्य घोष ने झुनझुनवाला से मुलाकात की थी। उन्होंने उनसे आईपीओ में निवेश करने को कहा। बिग बुल ने किया भी। 2019 में ‘जेट एयरवेज’ बंद होने के बाद से उसके सीईओ रहे विनय दुबे के मन में एक बिल्कुल नई एयरलाइन शुरू करने का विचार आया। महामारी के दौरान जब विनय दुबे ‘आकाशा’ के अपने प्रपोजल को झुनझुनवाला के पास ले गए। तब तेल की कीमत के अलावा, अधिकांश अन्य जटिल समस्याएं अपने आप हल हो गईं। आज हवाई अड्डे तेजी से बन रहे हैं। अब कोविड नियंत्रण में है और दुबे-घोष अपने पेशेवर कौशल के साथ यात्रियों के लिए आकर्षक एयरलाइन ‘आकाशा’ लाते हैं, तो सीट बेल्ट बांधकर, वे इस तूफानी मौसम में भी लाभ के गंतव्य का पता लगाना जारी रख सकते हैं। ‘इंडिगो’ उनसे पहले यह चमत्कार कर चुकी है।

कुल मिलाकर कोविड महामारी चलते पैदा हुए आर्थिक मंदी के बादल अब धीरे-धीरे छंटते नजर आ रहे हैं। स्टॉक मार्किट के एक्सपर्ट राकेश झुनझुनवाला का ऐसे समय में एयरलाइंस सेक्टर में प्रवेश करना एक लड़खड़ाती इंडस्ट्री के लिए संजीवनी समान है। ‘इंडियन एयरलाइंस’ का निजीकरण और ‘जेट एयरवेज’ का पुनर्जीवित होना आने वाले दिनों में इस सेक्टर को रफ्तार देने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।

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