Country

खतरे में आजम खां की लोकसभा सदस्यता,जया प्रदा ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका

गत लोकसभा चुनाव में रामपुर की पूर्व सांसद जयाप्रदा और समाजवादी पार्टी के तत्कालीन उम्मीदवार रहे आजम खां के बीच शीत युद्ध जोर शोरों से चला था । तब आजम खां जयाप्रदा पर एक अभद्र टिप्पणी को लेकर विवादास्पद हो गए थे । लेकिन अब रामपुर का सांसद बनने के बाद उनकी मुश्किलें कम होती नहीं दिखती है । इस बार जयाप्रदा ने आजम खां को मुश्किल में डाल दिया है । जयाप्रदा ने आजम खां पर लाभ का पद रहते हुए लोकसभा सदस्य बनने को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी है । जया प्रदा ने कोर्ट के समक्ष सबूत पेश करते हुए कहा है कि आजम खां ने लोकसभा चुनाव लडते समय निर्वाचन आयोग से यह जानकारी छुपाई थी।
इसके लिए जयाप्रदा ने हाईकोर्ट इलाहाबाद में एक याचिका भी दायर की है । इस याचिका में जयाप्रदा ने जो खुलासे किए हैं उसमे पूर्व में भी लाभ के पद पर रहे सांसदों का विस्तृत ब्यौरा दिया है । फिलहाल हाईकोर्ट इलाहाबाद ने याचिका  स्वीकार कर ली है। जिसके चलते  जल्द ही आजम खान कानून के कटघरे में कडे होंगे । इस तरह जयाप्रदा ने इस बार आजम खां को कानूनी शिकंजे में कसने की पूरी कोशिश की है । इससे लोक सभा चुनाव में मात्र 5 सीटें जीतने वाले समाजवादी पार्टी को  बड़ा झटका लग सकता है। अगर हाईकोर्ट में जया प्रदा की तरफ से  मजबूत पैरवी हुई तो रामपुर से जीतने के आजम खां की लोकसभा की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है।
गौरतलब है कि जयाप्रदा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की याचिका में कहा है कि चुनाव के दौरान आजमखां लाभ के पद पर कार्यरत थे और उन्होंने यह जानकारी निर्वाचन आयोग से छुपाई है।
जया प्रदा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट से कहा है कि इसी आरोप में उनकी लोकसभा की सदस्यता खत्म किये जाने के आदेश पारित किये जायें। खास बात यह है कि जया प्रदा की याचिका में सौंपे गये सुबूतों को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है।

जयाप्रदा ने अपनी याचिका में कहा है कि मोहम्मद आजम खां ने दो अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था, उस समय वह मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में कुलाधिपति के रूप में लाभ के पद पर थे। यह अनुच्छेद 102(1) ए व लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के सेक्शन 9(ए) और संविधान के अनुच्छेद 191(1)ए का उल्लंघन है।

उन्होंने कई मामलो का हवाला देते हुए कहा है कि वर्ष 2006 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लोकसभा से इस्तीफा देकर रायबरेली से फिर से चुनाव लड़ना पड़ा था, क्योंकि सांसद होने के साथ-साथ वह राष्ट्रीय सलाहकार परिषद में लाभ के पद पर थीं। इसी तरह जया बच्चन राज्यसभा सदस्य होने के साथ उत्तर प्रदेश फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष भी थीं। इसके कारण उनकी सदस्यता भी समाप्त हो गई थी।
यही नही बल्कि जयाप्रदा ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का भी हवाला दिया है, जिसमें उनका कहना है कि किसी सांसद या विधायक ने लाभ का पद लिया है तो उसकी सदस्यता समाप्त होगी, चाहे उसने वेतन और दूसरे भत्ते आदि लिए हों या नहीं। बहरहाल समाजवादी पार्टी के लिए महागठबंधन से अलग होने के बाद यह मुश्किल चुनौती सामने आ गई है।

You may also like