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 जमरानी बांध परियोजना के लगे पर, संसद में अजय भट्ट ने उठाई आवाज 

 

बहुप्रतीक्षित जमरानी बांध परियोजना को मानो अब पर लग गए है । इस मुद्दे पर आज नैनीताल के सांसद अजय भट्ट ने संसद में आवाज उठा कर एक बार फिर तराई भावर के वाशिंदो की उम्मीदों को हरा कर दिया है । अजय भट्ट की संसद में की गई पहल के बाद लगने लगा है की उत्तराखंड के लिए जीवनरेखा मानी जा रही बहुउद्देश्यीय जमरानी बांध परियोजना के निर्माण का कार्य अब शुरू होने जा रहा हैं।

याद रहे कि फरवरी 2019 में ही इस योजना को लेकर उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड एमओयू साइन कर चुके है लेकिन तब से लेकर अब तक पुरे चार माह तक इस योजना पर आगे कोई प्रगति नहीं हो सकी थी

सर्वविदित है कि सन 1975 में सैद्धांतिक रूप से स्वीकृति मिलने के बाद भी जमरानी बांध परियोजना ने अपने इस सफर में अनेक उतार-चड़ाव देखे।कभी इसने केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की कई आपत्तियों का सामना किया।तो कभी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच जल बंटवारे में उलझ गयी।लेकिन तमाम बधाओं को पार करते हुए लगभग 43 साल बाद अब यह परियोजना अपने मंजिल तक पहुँच ह़ी गई हैं।क्योंकि 11 फरवरी 2019 को इसके निर्माण कार्य के लिये 2584.10 करोड रुपए की फाइनल डीपीआर को केंद्रीय जलआयोग(जलायोग) ने अपनी मंजूरी दे दी है।इस बीच राज्य में कितनी सरकारें आयी और चली गई और इस बांध को बनाने की आस लिए ना जाने आफिसर व इंजीनियर आये और चले गये। 43 साल के लम्बे इंतजार के बाद अंतत:अब बांध निर्माण का कार्य शुरू होने की उम्मीद जग गई है 

 

सन 1975 से 11 फरवरी 2019(43 साल) तक बांध निर्माण के बजट में लगभग 42 गुना की बृद्धि हुई हैं।सन 1975 में जब जमरानी बांध परियोजना की शुरुवात हुई थी तो बांध के लिए सिर्फ 6 1.25 करोड़ रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई थी।लेकिन 11 फरवरी 2019 को नई दिल्ली में तकनीकी सलाहाकार समिति (टीएसी)की बैठक हुई जिसमें बाँध निर्माण के सभी बिन्दुओं तथा तकनीकी पहलुओं की गहन जानकारी व अध्ययन के बाद तकनीकी मंजूरी दे दी

और इसी के साथ इस योजना में बांध निर्माण के लिए 2584.10 करोड रुपए की धनराशि को केंद्रीय जलआयोग(जलायोग) ने भी मंजूरी दे दी। जिसके बाद बांध निर्माण की सभी बाधाएँ दूर हो गयी। बांध निर्माण के लिए धनराशि मिलते ह़ी काम शुरू कर दिया जायेगा।

 

जमरानी बांध परियोजना में बनने वाला बाँध 9 किलोमीटर लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा होगा।और यह 368 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है।इससे 42.7 एमसीएम  पानी शुद्ध मिलेगा जो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों की प्यास बुझाएगा।और साथ ह़ी 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा। इस बाँध से कुल 142.3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी सिंचाई के लिए मिलेगा। जिसमें से 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड(43%) को और 61(57%)एमसीएम पानी उत्तर प्रदेश को सिंचाई के लिए मिलेगा।जमरानी बांध में  208.60  मिलियन क्यूबिक मीटर की जल संग्रहण क्षमता होगी।

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