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ऐसा रहा पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का सफ़र….

छात्र नेता के तौर पर अपनी राजनीतिक सफ़र को शुरू करने वाले पूर्व वित्त और बीजेपी के वरिष्ठ नेता मंत्री अरुण जेटली का आज करीब 12 बजे लगभग 66 वर्ष की उम्र में एम्स में इलाज के दौरान निधन हो गया।
अरुण जेटली कैंसर की बीमारी से झूझ रहे थे और 9 अगस्त से एम्स में भर्ती थे। जहां लगातार उनका हालचाल लेने के लिये राजनीतिक हस्तियों का जमावड़ा लग रहा था।
अरुण जेटली ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र नेता के तौर पर एबीवीपी छात्र संगठन से जुड़े।
जहां उन्होंने सन 1974 में छात्र संघ चुनाव लड़ा और अध्यक्ष घोषित हुए।
उन्होंने राजनारायण और जे पी आंदोलन के दौरान अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। इमरजेंसी के दौरान मीसा के तहत उन्हें 19 माह तक जेल में भी रहना पड़ा था।
जे पी नारायण ने उन्हें उनकी प्रतिभा देखकर युवा संगठन समिति का संयोजक नियुक्त किया।
सन 1977 में अरुण जेटली, जनसंघ से जुड़े। जिसके बाद सन 1980 में उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया। इसके बाद सन 1991 में वे भाजपा के कार्यकारिणी के सदस्य भी रहे। उनके सफ़ल एवं ऊर्जावान कार्य को देखते हुए उन्हें सन 1999 में बीजेपी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर नियुक्त किया और इस दौरान वे सूचना प्रसारण राज्य मंत्री भी बनाये गये।
सन 2000 में वे गुजरात से पहली बार राज्यसभा सदस्य चुने गए। जिसके बाद उन्हें कानून, न्याय और कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई।
हलांकि सन 2002 में उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था और इसकी वजह यह थी कि उन्हें राष्ट्रीय सचिव के तौर पर कार्यभार सम्भालना था।
जनवरी सन 2003-04 तक उन्होंने कानून, न्याय और उद्योग मंत्री के तौर पर काम किया।
सन 2006 और 2012 में वे फिर गुजरात से राज्यसभा सदस्य चुन कर आये और उन्हें सन 2009 में राज्यसभा में विपक्ष का नेता भी बनाया गया।
सन 2014 में जेटली अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरे तो उन्हें कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर से हार का सामना भी करना पड़ा।
सन 2014 में पार्टी ने उन्हें वित्त मंत्री और अन्य प्रभार के तौर पर जिम्मेदारियां दी। लेकिन 2019 में अस्वस्थ होने के कारण उन्होंने स्वयं पार्टी को चिट्ठी लिखकर चुनाव में न तो हिस्सा लिया और न ही कैबिनेट में प्रभार लेने की बात कही ।

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