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प्रदूषण का कहर, एम्स की रिसर्च का सच

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अब मरीजों के शरीर में टॉक्सिन का पता लगाएगा। देश के किसी भी अस्पताल से मरीज एम्स आकर अपने यूरिन या ब्लड सैंपल के जरिये इन घातक रसायनों के बारे में जानकारी हासिल कर सकता है।
बता दे की एम्स के डाक्टरों ने हाल ही में शुरु हुई इकोटॉक्सिलॉजी प्रयोगशाला में एक रिसर्च की। जिसमे उन्होंने 216 मरीजों के यूरिन या ब्लड सैंपल लिये। इस रिसर्च में पता लगा कि उन 216 मरीजों में से 32 यानि 16% मरीजों के शरीर में बहुत सारी मात्रा में टॉक्सिन के (आर्सेनिक, सीसा, क्रोमियम, फ्लोराइड और कैडियम) जैसे खतरनाक पदार्थ थे।
हाल ही में शुरू हुई इकोटॉक्सिलॉजी प्रयोगशाला के तहत  एम्स अपने यहां आने वाले मरीजों के ब्लड व यूरिन सैंपल के जरिये घातक रसायनों के बारे में पता लगा रहा है। अब एम्स इस सुविधा को सभी अस्पतालों के लिए भी देना चाहता है। अगले दो सप्ताह के भीतर इसकी शुरुआत भी हो जाएगी। हालांकि इसके लिए एम्स ने रियायती दरों को तय किया है।
एम्स प्रसाशन ने तय किया है कि अगर मरीज के शरीर में घातक रसायनों की मौजूदगी का पता चलता है तो उसके घर से पानी का सैंपल लेकर निशुल्क जांच की जाएगी। एम्स अपने यहां आने वाले और रेफरल मरीजों के पॉजिटिव मिलने पर खाने और पानी की जांच का पूरा रिकॉर्ड भी तैयार करेगा, ताकि उसे देश भर के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषित पानी और भोजन का सही आंकलन मिल सके।

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