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उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान में चुनावी चेहरे पर छिड़ी जंग 

राजस्थान कांग्रेस में गहलोत बनाम पायलट के घमासान पर चुटकियां लेने वाली भाजपा के लिए अब अपने घर में ही मुश्किलें सामने आने लगी है। फ़िलहाल अपने घर में चल रहे इस घमासान से पार पाना भाजपा के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। राजस्थान में भाजपा की लड़ाई उत्तराखंड कांग्रेस की तर्ज पर हो रही है।  जिस तरह उत्तराखण्ड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत , इंदिरा ह्रदेश और प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बीच चुनावी चेहरे पर सियासी वार चल रहा है , ठीक इसी तरह अब राजस्थान की भाजपा में आपसी जंग जारी है।

जिसमे गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, सतीश पूनिया, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ के समर्थको के बीच  शोसल मीडिया पर मोर्चा खुला हुआ है। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समर्थक मंच ने राजस्थान के  25 जिलों में वसुंधरा राजे समर्थक मंच टीम का गठन किया जा चुका है। इस मंच के नेताओं का दावा है कि उनके साथ भाजपा  के ज़मीनी कार्यकर्ताओं से लेकर सांसद-विधायकों तक का भी समर्थन है।

 दूसरी तरफ राजे समर्थक मंच टीम के जवाब में सतीश पूनिया समर्थक मोर्चा भी राज्य में बन चुका है। हालांकि पूनिया ने ख़ुद को इससे अलग करते हुए कहा था कि यह किसी की शरारत है और वह ऐसे किसी मोर्चे का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा था कि ऐसा मोर्चा बनाने वालों के बारे में जांच की जा रही है। इस बाबत पूनिया ने कुछ दिन पहले ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाक़ात की थी और वसुंधरा के समर्थन में सोशल मीडिया पर चल रहे इन अभियान के बारे में उन्हें बताया था।

सभी जानते है कि राजस्थान में भाजपा कई गुटों में बंटी हुई है। यहां गजेंद्र सिंह शेखावत, अर्जुन राम मेघवाल, सतीश पूनिया, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उप नेता राजेंद्र राठौड़ के भी अपने-अपने समर्थक हैं। लेकिन फ़िलहाल इन सब पर भी वसुंधरा राजे भारी पड़ती दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा के 72 में से 47 विधायक वसुंधरा राजे के समर्थक है।

भाजपा हाईकमान वसुंधरा को राजस्थान से दूर करना चाहता है।  इसके चलते ही उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया। लेकिन वह राज्य की राजनीति से बाहर नहीं निकलीं। राजे के खिलाफ अमित शाह पूरी तैयारियों में जुटे है। 2018 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद मोदी-शाह की जोड़ी ने नेता विपक्ष के पद पर वसुंधरा की दावेदारी को नकारते हुए गुलाब चंद कटारिया को इस पद पर बिठाया था और राजे के विरोधी माने जाने वाले राजेंद्र राठौड़ को उप नेता बनाया था।

 राजस्थान भाजपा में बीते कुछ समय में पार्टी के पोस्टर्स से वसुंधरा राजे का चेहरा ग़ायब होने को लेकर भी घमासान हो चुका है। पिछले महीने बीजेपी ने अपने बाग़ी नेता घनश्याम तिवाड़ी को फिर से पार्टी में शामिल किया है। तिवाड़ी का राजे से छत्तीस का आंकड़ा था। लेकिन इस सबके बाद भी राज्य में वसुंधरा राजे की लोकप्रियता में कमी नहीं दिखाई दे रही है।  राजे फिलहाल तो सब पर भरी पड़ती दिखाई दे रही है।

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