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दो साल बाद खुला हत्या का राज, लुटेरों ने खुद खोली अपनी पोल 

अक्सर फिल्मों में या आम जीवन में हम सुनते हैं कि जुर्म कितना भी हम छुपाएं, परंतु कभी न कभी वह सामने आ ही जाता है। ऐसे ही एक मामला हरियाणा के अंबाला में सामने आया है जिसकी कहानी बिल्कुल किसी फिल्म की तरह है। यहां 26 महीने बाद जुर्म करने वाला पकड़ा गया है। अंबाला के अजित नगर में 12 जुलाई 2018 को कर्नल संदीप सिंगला की मां उषा सिंगला को मृत पाया गया था। पुलिस कार्रवाई में इस मामले को लूट के इरादे से हुई हत्या कहा गया था और पुलिस मामले को अनट्रेस मान चुकी थी।
दरअसल, जिस डिटेक्टिव स्टाफ ने यह मामला सुलझाया उसके इंचार्ज अजायब सिंह उस समय महेश नगर थाना के प्रभारी थे। जिन लोगों ने इस लूट और हत्या को अंज़ाम दिया था वह मामले को रफा-दफा मानकर बैठे थे। लेकिन आरोपियों के बीच लूट के पैसों को लेकर आपस में झगडा हो गया था जिसकी रंजिश उनके मन में थी। जो दारू पीने के बाद सामने आयी और उन्होंने सब कुछ नशे में बाहर निकाल दिया। इस बात की सूचना पुलिस तक पहुंची और 26 महीने पुराने मामले की गुत्थी सुलझ गई। हत्या को बब्याल के नवीन उर्फ नोनी, धीरज उर्फ सुक्खा व साहिल बग्गन ने अंजाम दिया था।
इन आरोपियों में गिरफ्तार धीरज लखबीर चंद की हत्या के मामले में पहले ही जेल में बन्द है। लखबीर चंद को धीरज ने 9 जून 2020 रात को लूट के इरादे से पीटा था। उसके बाद लखबीर की हॉस्पिटल में मौत हो गई थी। नोनी को 2 दिन की रिमांड के बाद जेल भेज दिया है, और साहिल को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा।
डिटेक्टिव स्टाफ के इंस्पेक्टर अजायब सिंह ने बताया कि “आरोपियों ने पैसा आपस में बांट लिया था। चांदी के सिक्के करीब 50 हजार रुपए में बेच दिए थे। 12 जुलाई को पड़ोस में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान ठेकेदार ने रात 9:30 बजे उनके घर के शेड में सीमेंट के कट्‌टे रखने के लिए दरवाजा खटखटाया था। जब दरवाजा नहीं खोला तो जाली के दरवाजे से झांका तो बेड पर शव दिखा था। पड़ोसी दीपक बवेजा के बयान पर थाना महेश नगर में केस दर्ज किया गया था। जिले में नए तैनात हुए एसपी राजेश कालिया ने आते ही डिटेक्टिव स्टाफ काे अनट्रेस केसाें पर काम करने के निर्देश दिए थे। इसी कड़ी में सेना के कर्नल की मां की हत्या का मामला ट्रेस किया गया है”।
वहीं मामले में अपनी मां की हत्या के आरोपियों  को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने पर कर्नल संदीप  ने कहा कि  “मेरे मन में निराशा थी कि मेरी मां के हत्यारों का पता नहीं चल पाया, लेकिन 2 दिन पहले ही मुझे पुलिस से पता चला कि आराेपी पकड़े गए हैं। डिटेक्टिव स्टाफ के इंचार्ज अजायब सिंह, टीम में शामिल खुशी राम व अन्य सदस्यों ने जो सराहनीय कार्य किया है वे इसको लेकर वह उच्चाधिकारियाें से भी बात करेंगे। अभी चंडी मंदिर में ही तैनात हूं। उस वक्त मैं राजस्थान में था”।

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