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देश में ब्लैक फंगस के बाद अब व्हाइट फंगस की आहट, बिहार में मिले 4 मरीज

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना को बहरूपिया बताया है। कोरोना के बहरूपिया यानी कि कई रूप अब सामने आ रहे हैं। जिनमें कोरोना हो जाने के बाद ब्लैक फंगस के मामले सामने आ रहे है।

ब्लैक फंगस उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के अलावा कई प्रदेशों में पैर पसार रहा है। यहां तक कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्लैक फंगस को भी महामारी घोषित कर दिया है। लेकिन मामला यहीं पर नहीं रुका है, बल्कि ब्लैक फंगस से आगे अब व्हाइट फंगस तक बीमारी विस्तार ले चुकी है। व्हाइट फंगस का पहला मामला बिहार में सामने आया है।

पटना मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग के मुखिया डॉ. एसएन सिंह की माने तो अब तक बिहार में ऐसे चार मरीज मिले हैं, जिनमें कोविड-19 जैसे लक्षण थे, लेकिन असल में वे कोरोना पॉजिटिव नहीं बल्कि व्हाइट फंगस से पीड़ित पाए गए। यही नहीं बल्कि मरीजों के कोरोना के तीनों टेस्ट रैपिड एंटीजन, रैपिड एंटीबॉडी और आरटीपीसीआर टेस्ट निगेटिव पाए गए। हालांकि ज्यादा चिंता की बात इसलिए नही है कि बिहार के अलावा अभी किसी दूसरे किसी राज्य में व्हाइट फंगस संक्रमण के मामले नहीं मिले हैं।

अभी तक जो सामने आये है उसके अनुसार व्हाइट फंगस संक्रमण शरीर के महत्वपूर्ण कामकाज को प्रभावित कर सकता है। वहीं ब्लैक फंगस सिर्फ साइनस और फेफड़ों को प्रभावित करता है।

गौरतलब है कि ब्लैक फंगल इंफेक्शन से वे लोग संक्रमित हो रहे हैं, जिनकी इम्यूनिटी पावर कमज़ोर है, जो पहले से किसी गंभीर बीमारी के शिकार हैं, जैसे डायबिटीज़ या फिर उनहोंने स्टेरॉयड्स का इस्तेमाल किया है। जिन लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट की ज़रूरत पड़ी थी उन्हें भी इस बीमारी का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है।

डाँक्टरो का कहना हैं कि व्हाइट फंगस रोग, ब्लैक फंगस से ज्यादा खतरनाक है। यह रोग सीधे फेफड़ों पर हमला करता है। संक्रमण बढ़ने पर इसकी मौजूदगी नाखूनों, त्वचा, पेट, मस्तिष्क और प्राइवेट पार्ट में भी देखी जा सकती है।

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