[gtranslate]
Country

वन रैंक – वन पेंशन के बाद अब P M मोदी की चाहत ‘वन नेशन – वन इलेक्शन’ 

वन रैंक वन पेंशन की सफलता के बाद अब केंद्र की भाजपा सरकार देश में ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ यानि की  ‘एक देश, एक चुनाव’ लागू करने की योजना बना रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते है कि पुरे भारत में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव हो , जिससे बार बार होने वाले चुनाव से न केवल विकास का रास्ता अवरुद्ध होने से बचेगा बल्कि चुनावो में होने वाला खर्च भी बचेगा। देश में ये स्थिति है कि हर महीने चुनाव होते हैं. हर बार चुनाव होता है तो उसमें खर्चा होता है। आचार संहिता लगने के कारण कई प्रशासनिक काम भी रुक जाते हैं और हर प्रदेश के चुनाव में बाहर के पदाधिकारी पोस्टेड होते हैं, जिसकी वजह से उनके अपने प्रदेश के काम पर असर पड़ता है।

जबकि दूसरी तरफ अधिकतर विपक्षी पार्टी इसके विरोध में है। ‘एक देश, एक चुनाव’ के विचार का विरोध करने वालों का कहना है कि अगर ये दोनों चुनाव एक साथ होंगे तो मतदाता केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी के लिए वोट कर देगाहालाँकि देश के बहुत से ऐसे भी लोग है जो चाहते है कि देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ नहीं होने चाहिए बल्कि कुछ दिनों के अंतराल में चुनावी प्रक्रिया चलती रहनी चाहिए। इससे देश में न केवल स्वस्थ लोकतंत्र की चर्चा होती रहती है बल्कि चुनावो के बहाने से ही देश की जनता राजनैतिक दलों आकलन का करती रहती है। साथ ही चुनावो के बहाने ही सही जनता देश के उन मुद्दों से वाकिफ हो जाती है जिसे पार्टिया चुनाव जितने के हथियार के तौर पर एक दूसरे पर चलती रहती है।

ऐसा नहीं है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन नेशन वन इलेक्शन का एजेंडा लागु करने का मन पहली बार उठाया है बल्कि पिछले साल भी मोदी जून माह में इस मामले पर मुख्यमंत्रियों से बात कर चुके है।प्रधानमंत्री मोदी कई बार कह चुके हैं कि अगर लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे तो इससे पैसे और समय की बचत होगी। प्रधानमंत्री मोदी का मानना है कि बार-बार चुनाव होने से प्रशासनिक काम पर भी असर पड़ता है। अगर देश में सभी चुनाव एक साथ होते हैं तो पार्टियाँ भी देश और राज्य के विकास कार्यों पर ज़्यादा समय दे पाएंगी।

दरअसल , मोदी चाहते थे कि मध्यप्रदेश के साथ ही बिहार और महाराष्ट्र के चुनावो को भी वन नेशन वन इलेक्शन का ही हिस्सा बनाया जाए। लेकिन चौकाने वाली बात यह रही कि भाजपा के ही कई मुख्यमंत्री इसके लिए सहमत नहीं हुए। ऐसे में सवाल यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विपक्ष को इस मुद्दे पर एकजुट कैसे कर पाएंगे?

गौरतलब है कि देश में पहली बार वर्ष 1951 – 52 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव हुए थे। उसके बाद 1957 , 1962 और 1967 में भी पुरे देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। लेकिन उसके बाद लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ नहीं हुए। यह यह भी बताना जरुरी है कि वर्ष 1999 में विधि आयोग ने पहली बार अपनी रिपोर्ट में कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हों। जबकि वर्ष 2015 में कानून और न्याय मामलों की संसदीय समिति ने एक साथ चुनाव कराने की सिफ़ारिश की थी।

You may also like

MERA DDDD DDD DD