[gtranslate]
Country

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद BJP की नजर अब सचिन पायलट पर

ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद BJP की नजर अब सचिन पायलट पर

कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी के 6 रत्न बड़े चर्चित है। कहते हैं कि राहुल गांधी की राजनीति अपने इन 6 रत्नों की सलाह से ही चलती है। यानी कि राहुल गांधी अपने इन 6 रत्नों से विचार विमर्श करने के बाद ही कोई अगला कदम उठाते हैं। 6 रत्नों में पहले नंबर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया थे। जो अब राहुल गांधी ही नहीं बल्कि कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं। राहुल के दूसरे रत्न सचिन पायलट माने जाते हैं। इसके बाद तीसरे रत्न रणदीप सुरजेवाला है। जबकि चौथी दिव्या स्पंदना और पांचवे रत्न राजीव सातव है। छठे रत्न अमरिंदर सिंह राजा बरार कहे जाते हैं।

सूत्र बताते हैं कि बीजेपी कांग्रेस के इन रत्नों को बीजेपी के मुकुट में सजाना चाहती है। इस तरह बीजेपी कांग्रेस के रत्नों को अपने पाले में लाकर राहुल गांधी को भी कमजोर कर देना चाहती है। इसकी शुरुआत बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से कर दी है। बहरहाल, सिंधिया को अपने पाले में लाकर बीजेपी मंत्रमुग्ध है।

सूत्र बताते हैं कि बीजेपी की नजर ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाद अब सचिन पायलट पर है। फिलहाल सचिन पायलट कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में जाने के मूड में नहीं लगते हैं। कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सचिन पायलट पर आंख मूंद कर विश्वास भी करता है। इसका उदाहरण दो दिन पहले वह वाक्य है जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में जाने की खबर आई थी तो कांग्रेस सुप्रीमो सोनिया गांधी ने सबसे पहले सचिन पायलट को याद किया। बताया जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को मनाने और उन्हें वापस कांग्रेस में लाने के लिए सोनिया गांधी ने सचिन पायलट को उनके पास भेजा था। शायद यह सोनिया का विश्वास ही है कि उन्होंने इस काम के लिए सचिन पायलट को चुना।

हालांकि, राजनीतिक पंडित सोनिया गांधी की इस पहल में भी राजनीति देख रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि भविष्य में अगर सचिन पायलट का मन डावाडोल होता है तो ऐसे में वह यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि कांग्रेस सुप्रीमो उन पर कितना विश्वास करती हैं। इसके चलते शायद सचिन पायलट कांग्रेस के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया जैसा विश्वासघात ना कर पाए।

सचिन पायलट कांग्रेस के साथ विश्वास करते हैं या सिंधिया की तरह विश्वासघात यह तो भविष्य के गर्भ में है। अगर गौर करें तो राजस्थान में सचिन पायलट के साथ भी मध्य प्रदेश जैसी राजनीति हो रही है। हालांकि, राजस्थान कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ही है और उसके साथ साथ सचिन पायलट प्रदेश के डिप्टी सीएम भी हैं।

लेकिन जिस तरह से राजस्थान की सत्ता में सिर्फ सीएम अशोक गहलोत का हस्तक्षेप है वह किसी से छुपा नहीं है। राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट को हाशिए पर डालने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कभी उनके खास नेताओ के पर कतर कर तो कभी सचिन पायलट पर दोहरे पद का लाभ उठाने के गाहे-बगाहे आरोप लगाए जाते रहे हैं।

एक साल पहले जब राजस्थान में कांग्रेस बहुमत में आई तो प्रदेश के मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार सचिन पायलट ही थे। सचिन पायलट को तब सीएम घोषित कराने के लिए प्रदेश में व्यापक अभियान चलाया गया। राजस्थान के लगभग हर शहर और गांव में सचिन पायलट के पक्ष में लोग एकजुट हो गए थे। तब सचिन पायलट का सीएम बनना लगभग तय था।

सचिन का सीएम बनना इसलिए भी तय माना जा रहा था कि राजस्थान में विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में हुए और कांग्रेस बहुमत में आई। तब पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी सचिन पायलट के कंधों पर थी। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया भी। पूरे प्रदेश में तब यह चर्चा थी कि सचिन पायलट को इस मेहनत का पारिश्रमिक सीएम पद के रूप में मिलेगा।

लेकिन आखिर में ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने राहुल गांधी के खास और रत्न कहे जाने वाले सचिन पायलट को साइड कर दिया। इसके बाद शीर्ष नेतृत्व ने राजस्थान की कुर्सी पर अशोक गहलोत को बिठा दिया। तब कहा गया कि अशोक गहलोत को राजनीति का ज्यादा अनुभव है। इसके चलते ही उन्हें राजस्थान का सीएम बनाया गया। लेकिन लोगों को यह बात हजम नहीं हुई। जबकि सचिन पायलट भी राजनीति के कम खिलाड़ी नहीं हैं।

अपने पिता पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट के पद चिन्हों पर चलकर सचिन पायलट एक खाटी राजनेता के रूप में चर्चित रहे हैं। जमीनी लड़ाई लड़ना उनका मकसद रहा है और जनता के बीच जाकर उनके दुख दर्द बांटना सचिन का सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट रहा है। इसके बावजूद भी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने जिस तरह से सचिन पायलट को राजस्थान की राजनीति में हाशिए पर डाला उनके समर्थकों को इस बात की टीस आज तक बनी हुई है।

बीजेपी सचिन पायलट और उनके समर्थकों के इस दर्द को बखूबी जानती है। बीजेपी यह भी जानती है कि राजस्थान में कांग्रेस के 107 विधायकों (जिनमें 6 बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए भी हैं) में बहुमत अभी भी सचिन पायलट का ही है। अगर सचिन पायलट उनके साथ आते हैं तो पार्टी का बड़ा धड़ा उनके साथ खड़ा होगा। वैसे भी भाजपा का विपक्ष मुक्त सपना देश में चलाया जा रहा है। जिसके तहत स्थिर सरकारों को अस्थिर किया जा रहा है।

You may also like

MERA DDDD DDD DD