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गुजरात और बिहार के बाद अब मध्य प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध 

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐलान किया है कि उनकी सरकार प्रदेश में शराब पर प्रतिबंध लगाना चाहती है। इसके लिए उन्होंने लोगों से इसमें सहयोंग करने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने नशामुक्ति में सहयोग देने के लिए  लोगों को संकल्प भी दिलाया। हालांकि  प्रदेश सरकार ने पहले ही नर्मदा नदी के किनारे और पवित्र शहरों में शराब की बिक्री को प्रतिबंधित किया । इससे पहले गुजरात और बिहार में शराब पर प्रतिबंध होने के  बावजूद इसके इन दोनों राज्यों में अवैध शराब  के मामले आते रहे हैं ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि शिवराज सरकार प्रदेश में शराबबंदी के इस फैसले पर कितना नियंत्रण कर पाती है। या फिर गुजरात और बिहार की तरह मध्य प्रदेश में भी अवैध शराब के धंधे  देखने को मिलेंगे ।

अगर हम बात करें बिहार की तो बिहार में शराबबंदी कानून लागू होने के बाद से लेकर अब तक शराब तस्कर और पुलिस के बीच चूहे-बिल्ली का खेल जारी है। बावजूद क्षेत्र में न तो अवैध शराब का निर्माण रुक रहा है, न हीं तस्करी। हालांकि पुलिस ने दर्जनों जगहों पर अवैध शराब निर्माण का भंडाफोड़ करते हुए भट्ठियों को ध्वस्त करने और, अर्ध निर्मित शराब को नष्ट कर तस्करों को बड़ा झटका जरूर दिया है।

ऐसा ही हाल गुजरात का भी है। गुजरात में भी शराब पर प्रतिबंध होने बावजूद शराब तस्करों का मजबूत तंत्र कार्य कर रहा है।वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुजरात  में तीन बार सत्ता रहने के बावजूद शराब के अवैध धंधे को रोक नहीं सके, गौरतलब है कि गुजरात में शराब की बिक्री पर पूरी तरह से रोक है लेकिन फिर भी शराब का अवैध धंधा चल रहा है। महात्मा गांधी की जन्मस्‍थली रहे गुजरात में उनके सम्मान के लिए वर्ष 1960 से शराब की बिक्री पर कानूनी रूप से रोक लगा दी गई थी। बहुत से लोगों को अब ये लगता है कि  ड्राई स्टेट की नीति बदलने का समय आ गया है। लोग पूछते हैं कि उन्हें गुजराती होकर भी गुजरात में शराब पीने की अनुमित नहीं है जबकि अगर कोई विदेशी आता है तो उसे परमिट दिया जाता है और वो शराब पी सकता है। गुजरात में मदिरापान करने के लिए सरकार से परमिट लेना पड़ता है। यह हेल्थ परमिट के नाम से जाना जाता रहा है। इससे पहले हेल्थ ग्राउंड पर यह परमिट मिलता था। इसके तहत सिविल सर्जन लिखकर देते थे कि अमुक व्यक्ति को मदिरापान से कोई समस्या नहीं होगी।

ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या शिवराज सरकार अपने इस फैसले से राज्य में शराबबंदी करने में सफल हो पाएंगे या नहीं ? मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हम मध्य प्रदेश  को शराब मुक्त राज्य बनाना चाहते हैं। यह सिर्फ शराब पर प्रतिबंध लगाने से पूरा नहीं होगा। अगर लोग शराब का सेवन करते हैं तो वह शराब कहीं से भी ले आएगें। इसके लिए हम शराब मुक्त अभियान चलाएंगे ताकि लोग शराब का सेवन करना बंद कर दें। इसके लिए हमें संकल्प लेना पड़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले तीन वर्षों में कटनी जिले के प्रत्येक गांव के घरों में नलों के माध्यम से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति की जाएगी। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों को पक्के मकान बनाने के लिए पैसे मुहैया कराए जाएंगे। इसके अलावा करीब 3 लाख 25 हजार  आयुष्मान कार्ड धारकों के लिए 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा है।

कटनी में एक परियोजना का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश पहली सरकार है जिसने राज्य की बेटियों के साथ दुराचार के लिए मृत्युदंड की घोषणा की है। और  मुस्कान अभियान के तहत 50 लड़कियों को बचाया गया है। अब तक 37 को सजा सुनाई जा चुकी है, दो ने दया याचिका दायर की है।

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