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कांग्रेस से अमेठी के बाद अब रायबरेली को छीनने में जुटी भाजपा 

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कांग्रेस के सामने पहले से ही चुनौतियों का पहाड़ है। मौजूदा समय में  कांग्रेस अपने गठन के बाद से  सबसे बड़े संकट के दौर से  गुज़र रही है। ये दौर लंबा खिंचता जा रहा है। दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी बीजेपी अपने मिशन कांग्रेस मुक्त भारत पर लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच अब भाजपा की नजर कांग्रेस की परंपरागत सीट रायबरेली पर बड़ा  उलटफेर करने की  है। इससे पहले   2019  के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का गढ़  मानी जाने वाली  सीट अमेठी पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला था। भारतीय जनता पार्टी की फायरब्रांड नेता स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को चुनाव में मात दी थी ।ऐसा ही उलटफेर  अब बीजेपी  सोनिया गांधी की परंपरागत सीट और कांग्रेस पार्टी के अंतिम गढ़ रायबरेली में  करना चाहती  है। ऐसे में यह भी  माना जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस को अब रायबरेली में ही उलझाए रखना  चाहती है। उसकी रणनीति यह हो सकती है कि कांग्रेस के महारथी रायबरेली में अपना परंपरागत किला बचने में ही पूरी ताकत लगा दें और देश के अन्य हिस्सों में महारथी विकी सेना का मनोबल टूट जाए।

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, रायबरेली में लोगों तक पहुंचने की कोशिशों को आगे बढ़ाया जा रहा है। आने वाले महीनों में केंद्रीय मंत्रियों सहित कई वरिष्ठ नेताओं के निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करने की बातें सामने आ रही  हैं ।

उत्तर प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष विजय पाठक ने कहा है कि रायबरेली भाजपा के लिए महत्वपूर्ण है। पार्टी लोगों के लिए  काम करती है और राजनीति में लिप्त नहीं । भाजपा उन सीटों पर काम करती है जहां वह कोई भी चुनाव हारती है। हमने 2014 और 2019 के चुनावों के बाद भी ऐसा किया। 2019 के लोकसभा चुनावों में हमने अमेठी जीती। हम अगले चुनाव में रायबरेली जीतेंगे।

पाठक के दावे निराधार नहीं हैं। अमेठी जीतने के बाद भाजपा नेहरू-गांधी परिवार के दूसरे गढ़, रायबरेली लोकसभा सीट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अमेठी के अलावा रायबरेली भी जाती रही हैं। उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को रायबरेली का प्रभारी मंत्री बनाया गया। पार्टी के लोगों ने पीएम  मोदी और योगी सरकारों की उपलब्धियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपना अभियान तेज कर दिया है।

रायबरेली भाजपा अध्यक्ष रामदेव पाल ने कहा कि  हम मोदी और योगी सरकारों की उपलब्धियों को लोगों तक ले जा रहे हैं। हमारे पास बूथ स्तर तक एक मजबूत पार्टी संरचना है। कांग्रेस ने भले ही 2019 के चुनावों में रायबरेली को जीत लिया, लेकिन पार्टी की जीत का अंतर काफी कम था । भाजपा रायबरेली में 2022 के विधानसभा चुनावों में सभी विधानसभा सीटों को जीतने के लिए बाध्य है और निश्चित रूप से 2024 के चुनावों में लोकसभा सीट जीत सकती है।

भाजपा अध्यक्ष के रूप में, अमित शाह ने  2018 में रायबरेली में एक मेगा रैली को संबोधित किया था। और कांग्रेस एमएलसी दिनेश सिंह को भाजपा में शामिल किया। 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद, रायबरेली से कांग्रेस के दोनों विधायक, राकेश सिंह ,दिनेश सिंह के भाई और अदिति सिंह बागी हो गए। हालांकि दोनों पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाए रखने के साथ-साथ कांग्रेस के विधायक बने हुए हैं और भाजपा के करीबी माने जाते हैं।

कांग्रेस  का गढ़ है रायबरेली लोकसभा सीट
रायबरेली में कांग्रेस अध्यक्ष पंकज तिवारी ने कहा, “रायबरेली कांग्रेस का गढ़ है। रायबरेली में जो भी विकास हुआ है, वह कांग्रेस की वजह से हुआ है। रायबरेली के लोग इस तथ्य से अवगत हैं। अमेठी के लोग यह महसूस कर रहे हैं कि उनसे किए गए वादे पूरे नहीं हुए हैं। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत के बाद अमेठी को परियोजनाओं से वंचित कर दिया गया है। कोई भी अमेठीमें  हुई भूल नहीं दोहराना चाहता है और रायबरेली में भाजपा कभी सफल नहीं होगी।”

पंकज तिवारी ने कहा कि सोनिया गांधी और यूपी के लिए प्रभारी कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, कोरोना के प्रतिबंधों के बावजूद निर्वाचन क्षेत्र के लोगों के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि दोनों ने 2020 के शुरू में निर्वाचन क्षेत्र का दौरा किया था, लेकिन महामारी के कारण फिर से घूमने में असमर्थ थे।

सोनिया गांधी अमेठी से शिफ्ट होने के बाद लगातार रायबरेली सीट जीती। राहुल गांधी ने 2004, 2009 और 2014 के चुनाव में अमेठी जीती, लेकिन वह 2019 में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हार गए।

लखनऊ विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के हेड रह चुके एसके द्विवेदी का कहना है कि हां, रायबरेली के लोगों ने 2019 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को वोट दिया। सोनिया गांधी पिछले कुछ समय से अच्छी सेहत में नहीं हैं और चुनाव क्षेत्र में उतनी बार नहीं जा सकीं, जितनी बार वे किया करती थीं। प्रियंका गांधी वाड्रा उनके विकल्प के रूप में काम कर सकती हैं, लेकिन निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने का फैसला करना है। भाजपा एक उगता हुआ सूरज है जबकि कांग्रेस नेतृत्व के मुद्दे को हल नहीं कर पाई है। भाजपा ऐसी स्थिति में भी रायबरेली सीट पर कब्जा कर सकती है।

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