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नागालैंड – अरुणाचल के 12 जिलों में जारी रहेगा अफस्पा कानून

देश के पूर्वोत्तर राज्यों में हमेशा से ही अशांति का माहौल बना हुआ है। जिसे रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सेना को कुछ विशेष अधिकार दिए हैं। इन अधिकारों को ‘सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम’ (अफस्पा) कानून के रूप में लागू किया गया है।

 

हालांकि काफी बार इस कानून को हटाने की मांग भी उठाई गई है और कई राज्यों से इसे हटाया भी जा चुका है। लेकिन नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के 12 जिलों में बढ़ती अशांति को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा अफ्स्पा कानून को अगले 6 महीने तक बढ़ाये जाने का आदेश दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आदेश देते हुए कहा कि पूरे राज्य में कानून व्यवस्था की समीक्षा की गई है। इसके बाद ही इन क्षेत्रों में अफस्पा लागू किया गया है। सशस्त्र बल विशेष शक्तियां अधिनियम , 1958 की धारा 3 के तहत 1 अक्टूबर 2022 से अगले 6 महीने तक के लिए इन क्षेत्रों को अशांत घोषित किया जाता है।

 

 

किन जिलों में बढ़ाया गया अफस्पा

 

अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग,लोंगडिंग और नामसाई जिलों के साथ-साथ महादेवपुर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्र भी शामिल हैं। इसके अलावां नगालैंड के जिन क्षेत्रों को अशांत बताया गया है उनमें दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और जुन्हेबोटो शामिल हैं। इसके अलावा नागालैंड के चार अन्य जिलों कोहिमा, मोकोकचुंग, लोंगलेंग और वोखा के क्षेत्र में आने वाले 16 पुलिस स्टेशनों में इस कानून को बढ़ाया गया है।

 

इससे पहले किन राज्यों में लागू था अफस्पा

 

अफस्पा कानून को साल 1958 में असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, चंडीगढ़ और जम्मू-कश्मीर समेत कई हिस्सों में लागू किया गया था। हालांकि बढ़ते विरोधों कारण बाद में कई इलाकों से इसे हटा भी दिया गया। पहले यह कानून जम्मू-कश्मीर, नागालैंड, मणिपुर की (राजधानी इम्फाल के 7 क्षेत्रों को छोड़कर), असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में लागू था। जिसके बाद हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा असम, नागालैंड, और मणिपुर के कुछ क्षेत्रों में अफस्पा के क्षेत्र को घटा दिया गया। त्रिपुरा, मिजोरम और मेघालय से इसे पहले ही हटा दिया गया है।

क्या है अफस्पा

 

अफस्पा एक ऐसा कानून है जो अंग्रेज़ी शासन के दौरान ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को सैनिकों द्वारा कुचलने के लिए लागू किया गया था। आज़ाद भारत में इसे सबसे पहले 1958 में मणिपुर और असम में लागू किया गया, 1972 में मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिज़ोरम और नगालैंड सहित समस्त पूर्वोत्तर भारत में लागू किया गया। 1987 में त्रिपुरा में, 1983 में पंजाब एवं चंडीगढ़, और 1990 में जम्मू-कश्मीर में लागू किया गया। इनमे से 2008 में पंजाब, 2012 में चंडीगढ़,2015 में त्रिपुरा और मेघालय से 2017 में इसे पूर्ण रूप से हटाया जा चुका है। यह कानून अशांत क्षेत्रों में लागू किया गया है। अशांत क्षेत्र से अभिप्राय उन क्षेत्रों से है जहां शांति बनाए रखने के लिए सैन्य बल की आवश्यकता होती है। इस कानून के द्वारा सेना को कुछ विशेषाधिकार (शक्तियां) दी गई हैं।

 

 इस कानून में प्रावधान है कि यदि कोई व्यक्ति कानून तोड़ता है तो उसे एक बार चेतावनी दी जाएगी और यदि वह फिर भी वही कार्य है तो सीधा उसे मृत्यु दंड दिया जा सकता है ।

किसी भी व्यक्ति को बिना किसी वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है व किसी के भी घर की तलाशी ली जा सकती है।

यदि सशस्त्र बलों को शंका होती है की 5 भवन या किसी इमारत में कोई आतंकवादी या अपराधी छुपे हुए हैं तो वह उस बिल्डिंग को गिरा सकती है।

यह कानून कैसे लागू किया जाता है?

 

अफस्पा कानून को लागू करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों सरकार की सहमति होना जरूरी है यदि इस सन्दर्भ में बात की जाए तो, अफस्पा की धारा (3) के तहत इसमें राज्य सरकार की राय होना भी जरूरी है कि वह क्षेत्र, अशांत क्षेत्र है या नहीं। अगर ऐसा नहीं है तो राज्य सरकार इसे खारिज कर सकती है। राज्य सरकार की सहमति के बाद केंद्र सरकार इसे लागू करती है।

 

यह भी पढ़ें : अफस्पा को पूरी तरह हटाने की उठी मांग

 

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