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किसानो से डरी केंद्र सरकार, 3 दिसंबर तक क्या करेंगे किसान ? 

दो माह पूर्व जब केंद्र सरकार ने संसद के दोनों सदनों में तीन कृषि बिलो को संसोधित कर पास कराया तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने इसे किसान हित में बताया था। लेकिन तभी सिर मुड़ाते ओले पड़ने वाली कहावत चरितार्थ हो गयी। जिसके तहत केंद्र सरकार में अकाली दल की मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने इस्तीफा दे दिया था। आखिर अकाली दल ने भाजपा से अपनी 40 साल पुरानी दोस्ती को तोड़ दिया। यही नहीं बल्कि अकाली दल किसानो के मन को अच्छी तरह जान चुकी थी। जिसके चलते ही उसने अपनी केंद्रीय मंत्री की बलि दे दी थी। क्योकि 2020 में पंजाब के विधानसभा चुनाव होने है ऐसे में अकाली दल ने किसान कार्ड खेल दिया। हालाँकि किसानो की इस लड़ाई में पंजाब की सत्तासीन कांग्रेस भी कूदी लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
फिलहाल दो माह बाद पंजाब के किसान दिल्ली कूच कर आंदोलन का सिंहनाद कर चुके है। किसानो को दिल्ली जाने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बॉर्डरसील कर दिए है। सिंधु बॉर्डर पर किसानो और पुलिस बल के बीच खूब तनातनी हो चली है। जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने यह कह दिया है कि उनकी सरकर किसानो से तीन दिसंबर को वार्ता करेगी। ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि तीन दिसंबर तक किसानो के आंदोलन का क्या होगा। क्या किसान वापिस जायेंगे या दिल्ली कूच जारी रखेंगे ?
पंजाब के करीब डेढ़ लाख किसानो ने दिल्ली में डेरा डालने की पूरी तैयारी कर दी है। किसान इस बार करो या मरो की नीति के तहत आंदोलन कर रहे है। इससे पहले दो महीने तक रेलवे ट्रैक पर डेरा डालने वाले किसान अब दिल्ली में डेरा डालने की पूरी रणनीति बना रहे है। इसके चलते ही वह दो महीने का राशन पानी अपने हजारो टेक्टरो में भरकर ला रहे है। फ़िलहाल केंद्र सरकार किसानो से डर चुकी है। यही वजह है कि आंदोलनकारी नेता मेधा पाटेकर को आगरा में रोक कर नजर बंद कर दिया है जबकि स्वराज पार्टी के नेता योगेंद्र यादव को हरियाणा के गुरुग्राम में बंदी बना लिया गया है। यही नहीं बल्कि किसानो के समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने भी किसानो के हक़ में अपनी आवाज बुलंद कर दी है। इससे अब ऐसा लगने लगा है कि केंद्र सरकार के खिलाफ पंजाब से शुरू हुआ किसान आंदोलन पुरे देश में फ़ैल सकता है। फ़िलहाल पंजाब के किसानो के साथ हरियाणा के किसानो ने भी अपने शुर मिला दिए है।

किसान बिलो के समर्थन में केंद्र सरकार कह रही है कि ये बिल किसानों की भलाई के लिए हैं। इनसे उनकी आमदनी बढ़ेगी। वहीं, किसानों का मानना है कि नए कानूनों से एमएसपी प्रणाली खत्म हो जाएगी। किसान वैधानिक गारंटी चाहते हैं। वहीं, कमीशन एजेंट का कहना है कि उनका एकाधिकार और बंधा हुआ मुनाफा खत्म हो जाएगा। उधर राज्य सरकारों का कहना था कि उन्हें मंडी शुल्क के रूप में मोटा राजस्व प्राप्त होता है। खासकर पंजाब, हरियाणा व पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में। राजनीतिक दल कह रहे हैं कि राज्यों में सत्तारूढ़ दल मंडी शुल्क नहीं खोना चाहते हैं। दूसरी तरफ, यह भी कहा जा रहा है कि कमीशन एजेंट प्रायोजित तरीके से सत्तारूढ़ व विपक्षी दलों के नेताओं से प्रदर्शन करवा रहे हैं।  गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके है कि किसानो को भड़काया जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि भाजपा सर्कार के खिलाफ किसानो को भड़का कौन रहा है।

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