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बाबरी विध्वंस मामले में  आडवाणी ,जोशी कल्याण  उमा सहित कई अन्य बाइज्जत बरी 

बाबरी विध्वंस मामले में आखिरकार  28 वर्षों बाद फैसला आ गया।  स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने केस का फैसला दो हजार पन्नों में लिखा। जज सुरेंद्र कुमार यादव ने फैसला पढ़ा। उन्होंने कहा कि घटना सुनियोजित नहीं थी।  किसी भी आरोपी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इसलिए सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी किया जाता है।

बाबरी विध्वंस मामले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, सतीश प्रधान, महंत नृत्य गोपालदास और उमा भारती समेत सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया गया है।  जज एसके यादव ने कहा है कि विवादित ढांचा गिराने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। यह  घटना अचानक हुई थी।

ये थे आरोपी 

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती , महंत नृत्य गोपाल दास, साध्वी ऋतम्भरा, चम्पत राय, विनय कटियार, राम विलास वेदांती, महंत धरम दास, पवन पांडेय, ब्रज भूषण शरण सिंह, साक्षी महाराज,सतीश प्रधान, आरएन श्रीवास्तव, तत्कालीन डीएम, जय भगवान गोयल, रामचंद्र खत्री , सुधीर कक्कड़, अमरनाथ गोयल, संतोष दुबे, प्रकाश शर्मा, जयभान सिंह पवैया, धर्मेंद्र सिंह गुर्जर, लल्लू सिंह, वर्तमान सांसद, ओम प्रकाश पांडेय, विनय कुमार राय, कमलेश त्रिपाठी, गांधी यादव, विजय बहादुर सिंह, नवीन शुक्ला, आचार्य धर्मेंद्र, रामजी गुप्ता।

बता दें कि अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी के विवादित ढांचे को गिराए जाने के मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस मामले में कुल 49 आरोपी थे, जिनमें 17 आरोपियों की मौत हो चुकी है। ऐसे में कोर्ट ने मामले में बाक़ी बचे सभी 32 मुख्य आरोपियों पर फ़ैसला सुनाया है।

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