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एक्टर श्रीराम लागू का 92 की उम्र में निधन

हिंदी सिनेमा के जाने -माने दिग्गज और 70 और 80 के दशक की बड़ी फिल्मों का हिस्सा रह चुके एक्टर श्रीराम लागू का लंबी बीमारी के बाद पुणे के दीनानाथ मंगेशकर हॉस्पिटल में निधन हो गया। मशहूर अभिनेता डॉ. श्रीराम लागू का 92 साल की उम्र में 17 दिसंबर ,मंगलवार को निधन हो गया। बीमार चल रहे लागू का निधन कार्डिएक अरेस्ट के चलते हुआ। उनके बेटे और बहू के अमेरिका से आने के बाद डॉ. लागू का अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की खबर आते ही बॉलीवुड में शोक की लहर छा गई और ऋषि कपूर सहित कई सेलिब्रिटीज़ ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
 एएनआई द्वारा ट्विटर पर इसकी जानकारी देते हुए बताया गया कि डॉ. श्रीराम लागू ने पुणे के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। बहुत कम लोग जानते हैं कि डॉ. श्रीराम लागू एक बेहतरीन एक्टर होने के साथ ENT सर्जन भी थे। उन्होंने अपने करियर में फ़िल्मों के अलावा 20 मराठी नाटकों का निर्देशन भी किया। अस्सी और नब्बे के दशक में डॉ. लागू फ़िल्मों में एक जाना-पहचाना चेहरा बन चुके थे। इस दौरान उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा की क़रीब साठ फ़िल्मों में अलग-अलग भूमिकाएं अदा कीं। 1990 के बाद पर्दे पर उनकी मौजूदगी कम हो गयी थी, मगर थिएटर में वो सक्रिय रहे।
डॉ. लागू को एक्टिंग का शौक़ मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही लग गया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत थिएटर से की थी। उन्होंने 1971 में आयी आहट- एक अजीब कहानी से हिंदी सिनेमा में बतौर एक्टर पारी शुरू की थी। अपने करियर में उन्होंने कई तरह के किरदार निभाये। विधाता(1982),खुद्दार (1994),लावारिस (1981),काला बाज़ार (1989) इन फिल्मों में उनके शानदार अभिनय के लिए आज भी उन्हें याद किया जाता है।
1978 में घरौंदा फ़िल्म के लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के लिए फ़िल्मफेयर अवॉर्ड प्रदान किया गया था।1997 में उन्हें कालीदास सम्मान से नवाज़ा गया था। 2006 में डॉ. लागू को सिनेमा में योगदान के लिए मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान ने सम्मानित किया था। वहीं, 2010 में उन्हें संगीत नाटक एकेडमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया था। बहुमुखी प्रतिभा के धनी डॉ. श्रीराम लागू ने लमान शीर्षक से आत्मकथा भी लिखी।

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