[gtranslate]
Country

ब्रेकअप के बाद लड़की पर एसिड अटैक 

किसी का कत्ल हो जाए तो वो सिर्फ एक बार मरता है,लेकिन किसी की महिला आबरू लूट ली जाए या तेजाब फेंक कर चेहरा जला दिया जाए तो वो बार-बार मरती हैं। समाज में उनकी स्थिति तिरस्कृत सी हो जाती है। पिछले दिनों 14 दिसंबर को दिल्ली के मोहन गार्डन थाना क्षेत्र में  एसिड हमला देखने को मिला है,जिसमे 1 7 साल की लड़की के ऊपर एसिड से अटैक किया है। फिलहाल पीड़िता का इलाज सफदरजंग अस्पताल में कराया जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक,पीड़ित लड़की बहुत बुरी तरह से झुलस  चुकी है।

दरअसल,दिल्ली पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी सचिन अरोड़ा पीड़िता को पहले से जानता था। दोनों का एक-दूसरे के साथ रिश्ता भी था। ब्रेकअप होने के बाद ही आरोपी ने लड़की पर एसिड अटैक के बारे में प्लानिंग की थी। आरोपी ने तेजाब ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट से खरीदा था। इस मामले में अभी तक दिल्ली पुलिस ने तीनों आरोपियों सचिन अरोड़ा, हर्षित अग्रवाल और वीरेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।आरोपियों ने एसिड को ऑनलाइन वेबसाइट से ऑर्डर करके मंगाया था। फिलहाल पुलिस एक्सपर्ट के जरिए जानने की कोशिश कर रही है कि जिस एसिड का इस्तेमाल किया गया है वह कितना खतरनाक है। इसके लिए पुलिस को फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। पुलिस के मुताबिक,आरोपी सचिन अरोड़ा की उम्र 20 साल है,जो वॉलपेपर लगाने का काम करता है, जबकि 19 साल का हर्षित एक प्राइवेट कंपनी में पैकिंग का काम करता है। 22 साल का वीरेंद्र जनरेटर मैकेनिक का काम करता है। पुलिस के मुताबिक, एसिड अटैक से पहले सचिन ने हर्षित और वीरेंद्र के साथ पूरी प्लानिंग कर ली थी। सचिन बाइक पर पीछे बैठा था और उसी ने ही एसिड पीड़िता पर फेंका था,बाइक हर्षित चला रहा था,जबकि वीरेंद्र आरोपियों के मोबाइल लेकर दूसरी जगह छिपा था ताकि जांच में मोबाइल लोकेशन दूसरी जगह का दिखे। इस घटना के बाद दिल्ली में बिक रही तेजाब को लेकर फिर से बहस तेज हो गई है,जबकि न्यायालय ने साल 2015 में लक्ष्मी  बनाम भारत संघ मामले के बाद खुलेआम बिक्री पर रोक लगा दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने साल 2015 में लक्ष्मी  बनाम भारत संघ मामले में एसिड सर्वाइवर्स के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया था,जिसमे एसिड की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के संबंध में निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जहर अधिनियम, 1919 के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती बनाने की दिशा में काम करेंगे,जब तक एसिड और अन्य संक्षारक पदार्थों की बिक्री को विनियमित करने के नियम लागू नहीं होते, तब तक तेजाब की बिक्री प्रतिबंधित रहेगी। न्यायालय ने निजी अस्पतालों को यह निर्देश भी जारी किया था कि वे एसिड अटैक के शिकार लोगों का मुफ्त एवं पूरा इलाज करेंगे। इस फैसले के बाद ही देश में एसिड हमले को गंभीर अपराध की श्रेणी में डाला गया था और पीड़ितों के लिए मुआवजे की योजना प्रस्तावित की गई थी,जिसके बाद तेजाब बिक्री को लेकर कई नियम भी बनाए। जिसके मुताबिक,दुकानदारों  को तेजाब खरीदने वाले का नाम, पता और तेजाब की मात्रा का रिकॉर्ड रखना होता। पुलिस द्वारा पूछे जाने पर दुकानदारों को खरीदारों की जानकारी भी सौपनी होती है। इतना ही नहीं भारत सरकार की तरफ से जारी आईडी प्रूफ की जांच के बगैर तेजाब नहीं बेच सकते  है। हर 15 दिन के बाद स्थानीय एसडीएम को अपने स्टॉक की जानकारी भी देनी होती है। सबसे अहम बात तो यह है कि कोई भी दुकानदार 18 साल से कम उम्र के व्यक्ति को किसी कीमत पर तेजाब बेच नहीं सकता है। तेजाब बेचने के लिए विक्रेता के पास उसका लाइसेंस भी होना जरूरी है। इसके अलावा उसे पॉइजन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड करना भी  जरूरी होता है। लेकिन इन सबके बावजूद तेजाब बिक रहा है, जिसके वजह से तेजाब अटैक के घटना सामने आते रहते है।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक, देश भर में तेजाब से हमले के मामले साल  2021 में 176, 2020 में 182 और 2019 में 249 मामले दर्ज किए गए है। वहीं,अगर सिर्फ दिल्ली की बात करें तो साल 2021 में तेजाब से हमले के 9 मामले दर्ज किए गए है। गृह मंत्रालय ने भी सदन में एक सवाल के जवाब में कहा था कि 2018 से 2022 के बीच देश में 386 मामले दर्ज हुए है। एनसीआरबी के मुताबिक, जिन मामलों में न्यायिक कार्रवाई की जाती है, परिणाम निराशाजनक निकलते हैं। पिछले दस साल में तेजाब हमलों के लिए दोष साबित होने की दर में कई कमी देखी गई है। साल 2021 में यह दर 71.4 प्रतिशत से गिरकर 20 प्रतिशत हो गई। इसके अलावा, 2017 से 2021 के बीच सिर्फ 175 लोगों को सजा हुई है। 2021 में तेजाब से हमले के प्रयास के तहत 79 और 2020 में 60 मामले दर्ज किए गए।

यह भी पढ़ें :यूपी निकाय चुनाव में मुश्किल होगी भाजपा की राह!

You may also like

MERA DDDD DDD DD