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आजम का कंधा, अखिलेश का निशाना

जहां एक ओर जौहर विश्वविद्यालय को लेकर आजम खां की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं वहीं दूसरी ओर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को लेकर जो एक्शन प्लान तैयार किया है उसमें काफी हद तक उनका और उनकी पार्टी का निजी स्वार्थ छिपा हुआ है। अखिलेश यादव अपने प्रिय नेता आजम खां के कंधे के सहारे इस मुद्दे को कितना लम्बा खींच पायेंगे, यह सरकार के प्रतिउत्तर पर ही निर्भर करता है। यदि सरकार ने दस्तावेजों के आधार पर आजम की मुश्कें कसीं तो निश्चित तौर पर अखिलेश को बैकफुट पर जाना पड़ सकता है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सितारे उनकी राजनीति से मेल नहीं खा रहे या फिर बुजुर्ग नेताओं की बद्दुआएं उनके हर काम में रोड़ा अटका रही हैं। कुछ ऐसा ही हाल है सपा प्रमुख अखिलेश यादव का। हालांकि अपने पिता मुलायम सिंह यादव की तर्ज पर वे अब पूरी तरह से राजनीति में सक्रिय हैं और मीडिया के सहारे सरकार का विरोध उनकी दैनिक गतिविधियों में शामिल हो चुका है फिर भी उनकी किस्मत है कि उनका साथ देती नजर नहीं आ रही। सरकार के खिलाफ उठाया गया उनका हर मुद्दा फेल साबित हो रहा है। ऐसे में हाल-फिलहाल उनके हाथ लगा है आजम खां का मुद्दा। वे इस मुद्दे को किसी कीमत पर अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहते। आजम खान के कंधे पर राजनीति की बंदूक रखकर निशाना साधने की कोशिश में लगे अखिलेश यादव बेहद सक्रियता का परिचय दे रहे हैं। अखिलेश आज रामपुर गए हैं, आजम के मुद्दे पर रामपुर की जनता को जगाने। हालांकि अखिलेश की योजना मोहर्रम के दिनों में ही रामपुर जाकर इस मुद्दे को कैश कराने की थी लेकिन स्थानीय प्रशासन की गुजारिश पर योगी सरकार ने उन्हें वहां जाने की इजाजत नहीं दी। अब मोहर्रम समाप्ति के पश्चात अखिलेश रामपुर के लिए रवाना हो गए हैं। आज उनकी मीटिंग आजम खां से सिर्फ इस बात के लिए होगी कि कैसे इस मुद्दे को कैश कराया जाए। समाजवादी पार्टी नेताओं की मानें तो आजम के मुद्दे को लेकर सिर्फ रामपुर में ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में जनान्दोलन छेड़े जाने की तैयारी को अमली जामा पहनाया जायेगा। केन्द्र में भले ही आजम का मुद्दा होगा लेकिन निशाने पर योगी सरकार होगी।
बताते चलें कि हाल ही में पूर्व सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने प्रेस वार्ता के दौरान आजम खां के पक्ष में एक बड़ा आन्दोलन छेड़े जाने का ऐलान किया था। उस वक्त अखिलेश यादव ने किसी प्रकार की टिप्पणी नहीं थी। बताया जा रहा है कि आजम खां के मुद्दे को लेकर जनान्दोलन छेड़े जाने के पक्ष में अखिलेश नहीं थे। वे किसी बड़े मुद्दे की तलाश में थे लेकिन मुलायम की नसीहत ने उन्हें अपनी राय बदलने पर विवश किया। वैसे भी सपा में आजम खां ही इकलौते ऐसे प्रभावशाली नेता हैं जो अखिलेश की हर मुसीबत में साथ नजर आए हैं। ऐसे में अखिलेश उनका साथ न दें तो सपा में उनका साथ देने वाला कोई नहीं बचेगा। शायद यही गुरु मंत्र मुलायम ने दिया होगा, तभी अखिलेश ने अपनी राय बदली और खाका तैयार हो गया आजम के मुद्दे को कैश कराने का। अखिलेश यादव के साथ नेता विपक्ष रामगोविंद चैधरी, राजेंद्र चैधरी और पार्टी के विधायक सहित कई अन्य नेता भी उनके साथ रामपुर गए हैं।
अखिलेश और उनकी टीम ने इस मुद्दे को लेकर जो रणनीति तैयार की है उसे देखकर तो ऐसा ही लगता है कि आजम का यह मुद्दा अब लम्बा खिंचने वाला है। रामपुर दौरे के दौरान अखिलेश यादव सबसे पहले वहां के मुस्लिम धर्मगुरुओं से मुलाकात करेंगे ताकि आजम के पक्ष में धर्मगुरुओं को एकजुट किया जा सके। धर्मगुरुओं को एकजुट करने का तात्पर्य बड़ी संख्या में ऐसी भीड़ जुटाना है जो कभी समाजवादी पार्टी की युवजन सभा में हुआ करती थी। पार्टी नेताओं के अनुसार यदि युवाओं की भीड़ जुटाने में कामयाबी मिल गयी तो रामपुर ही सही एक बार फिर से ‘हल्ला बोल’ रैली की याद ताजा हो जायेगी।
तय कार्यक्रम के मुताबिक अखिलेश जौहर विश्वविद्यालय तो जायेंगे ही साथ ही नगर पालिका अध्यक्षों और वकीलों से भी उनकी मुलाकात होगी। रामपुर पुलिस से प्रताड़ित परिवारों से भी मुलाकात का कार्यक्रम बनाया गया है।
फिलहाल सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आजम के कंधे से राजनीति चमकाने का जो एक्शन प्लान बनाया है उसे देखते हुए अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि प्लान के अनुरूप सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो निश्चित तौर पर अखिलेश यादव के नेतृत्व में इस बार सपा का योगी सरकार के खिलाफ ‘हल्ला बोल’ अपना असर दिखा सकता है।

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