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एक माँ जिसने अपना बच्चा खोया पर हौसला नहीं, प्रदर्शन में फिर से हुई शामिल

एक माँ जिसने अपना बच्चा खोया पर हौसला नहीं, प्रदर्शन में फिर से हुईं शामिल

दिल्ली के शाहीनबाग में लगभग दो महीने से नागरिकता कानून के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। इस प्रदर्शन में भारी मात्रा में औरतों की मौजूदगी और उनका जुनून देखते बनता है। लेकिन इस प्रदर्शन ने एक माँ को अपने बच्चे से हमेशा के लिए दूर कर दिया। दुनिया का सबसे बड़ा दर्द अपने औलाद को अपने जीते-जी खो देना होता है। नाजिया किस दर्द से गुजर रही होगी ये सिर्फ नाजिया और उनके शौहर मोहम्मद आरिफ ही समझ सकते हैं। नाजिया 18 दिसंबर से हर रोज शाहीन बाग के प्रदर्शन में शामिल हो रही थीं।

चार महीने का मोहम्मद जहान को लेकर हर रोज नाजिया शाहीन बाग में प्रदर्शन के लिए आती। उसकी खिलखिलाहट, उसकी आँखों की चमक लोगों को अपने तरफ खिंचती। वहां की सारी औरतें बारी-बारी से उसे अपनी गोद में लेते, उसके साथ खेलते और उसके गाल पर तिरंगा बनाया करते। औरतों के ही बीच नहीं बल्कि वहां प्रदर्शन में शामिल लगभग सभी उसे गोद लेते। सभी के आंखों का तारा था। लेकिन अब मोहम्मद जहान शाहीन बाग में कभी नजर नहीं आएगा। जहान आखिरी बार 30 जनवरी को प्रदर्शन में आया था। उसी दिन रात को दिल्ली की ठिठुरन भरी सर्द रात ने जहान को सदैव के लिए लील लिया।

माँ नाजिया ने बताया कि जहान की मौत 30 जनवरी की रात को ही हो गई थी। नाजिया कहती हैं, “मैं रात करीब 1 बजे शाहीन बाग से लौटी। जहान और बाकी बच्चों को सुलाने के बाद मैं भी सोने चली गई। सुबह जब हम उठी तो देखा वह हिल-डुल नहीं रहा था। उन्होंने कहा कि जहान को ठंड लगी, जो बाद में जानलेवा हो गई। हालांकि, डॉक्टरों ने बच्चे के डेथ सर्टिफिकेट में मौत का कोई खास कारण नहीं बताया है। नाजिया के शौहर आरिफ ने अपने बच्चे की मौत के लिए सीएए और एनआरसी को जिम्मेदार ठहराया है।” वहीं नाजिया के शौहर आरिफ कहते हैं, “अगर सरकार सीएए और एनआरसी नहीं लाती तो न लोग प्रदर्शन करते, न मेरी पत्नी उसमें शामिल होती, ये सब कुछ नहीं हुआ होता तो आज मेरा बच्चा जिंदा होता।”

नाजिया और आरिफ उत्तर प्रदेश के बरेली के रहने वाले हैं। आरिफ रोजी-रोटी के लिए ई-रिक्शा चलाते हैं और साथ ही एम्ब्रॉयडरी का भी काम करते हैं। एम्ब्रॉयडरी के काम में नाजिया भी उनकी मदद करती हैं। मोहम्मद आरिफ और नाजिया बाटला हाउस इलाके में एक छोटी-सी झोपड़ी में रहते हैं। उनकी एक और 5 साल की बेटी और एक साल का बेटा है। ‘आई लव माय इंडिया’ लिखी ऊनी टोपी पहने हुए जहान की तस्वीर दिखाते हुए आरिफ आगे कहते हैं, “ई-रिक्शा और एम्ब्रॉयडरी का काम करने के बावजूद मैं पिछले महीने उतना कमा नहीं पाया। अब हमने अपना बेटा भी खो दिया, हमारा सब कुछ चला गया।”

नाजिया की पड़ोसी शाजिया ने बताया, “नाजिया ने शाहीन बाग के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अपनी मां और पति से लड़ाई की थी। वह पड़ोस की सभी औरतों को साथ चलने के लिए जमा करती थी और फिर सारी औरतें दो किलोमीटर दूर प्रदर्शन में शामिल होने जाते थे। कई बार उनके पति आरिफ ई-रिक्शा में महिलाओं को शाहीन बाग छोड़ा करते थे।”

नाजिया प्रदर्शन में फिर से शामिल हो गई है। दोबारा आने के बाद नाजिया ने कहा,”सीएए और एनआरसी सभी समुदायों के हितों के खिलाफ है। मैं शाहीन बाग के प्रदर्शन में शामिल हूँ, लेकिन इस बार अपने बच्चे के बगैर।” नाजिया ने आगे कहा, “मैं ये सब क्यों कर रही हूं? अपने और हमारे बच्चों के लिए, जिन्हें इस देश में उज्ज्वल भविष्य की जरूरत है। सीएए लोगों को धर्म के आधार पर बांट रहा है। इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। मैं नहीं जानती कि इसमें राजनीति शामिल है या नहीं लेकिन जो मेरे बच्चों के भविष्य के खिलाफ होगा, मैं उस पर सवाल उठाऊंगी।” इस घटना के बाद शाहीन बाग में मौजूद सभी लोगों की आंखे नम हैं। जहान वापस नहीं आएगा। उसका मुस्कान अब कभी देखने को नहीं मिलेगी।

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