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तेलंगाना के वारंगल में एक कुएं से मिली 9 मजदूरों की लाश, इलाके में सनसनी

तेलंगाना के वारंगल में एक कुएं से मिली 9 मजदूरों की लाश, इलाके में सनसनी

तेलंगाना में वारंगल के सीमावर्ती इलाके में 9 लोगों का शव एक कुएं से बरामद की गई है। कुएं के पास एक फैक्टी है। उस कुएं से गुरुवार को 4 शव बरामद हुए थे। अब उसी कुएं से शुक्रवार को पांच और शव बरामद हुए हैं। कुएं से निकल रहे शवों को देखकर पुलिस और आस-पास के लोग सकते में है। फिलहाल ये कुआं रहस्य बना हुआ है। क्योंकि शवों पर किसी तरह के कोई घाव नहीं हैं। ऐसे में इनकी मौत कैसे हुई? क्या वे लोग आत्महत्या किए या फिर कोई अनहोनी हुई है इन लोगों के साथ। इसी गुत्थी को सुलझाने में पुलिस जुट गई है। ये भी आशंका की जा रही है कि इस कुएं से और भी शव निकाले जा सकते हैं।

इन शवों में एक बच्चा और एक महिला शामिल है। साथ में एक ही परिवार के छह सदस्य की लाश मिली है। बताया जा रहा है कि 55 साल के मकसूद और 48 की निशा पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे। कुछ साल पहले मजदूरी का काम करने के लिए तेलंगाना आए थे। आजीविका के लिए जूट के बैग की सिलाई का काम करते थे। उनकी एक बेटी बुसरा खातून, दो बेटे साबाद आलम और सोहैल आलम थे, बुसरा की शादी हो गई थी मगर वो अपने बेटे को लेकर माता-पिता के साथ रहती थी। इस परिवार के सभी 6 लोगों का शव कुएं में मिला। इसके अलावा 3 अन्य लोगों का शव भी बरामद हुए हैं।

पुलिस ने बताया कि सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए एमजीएम हॉस्पिटल भेजा गया है। केस दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। प्रवासी श्रमिकों और स्थानीय लोगों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने कहा, “मकसूद का परिवार बीस सालों से यहां रह रहा था। शकील जूट मिल में बतौर ड्राइवर काम करते थे, जबकि श्याम और श्रीराम भी मिल में ही काम करते थे। मकसूद की बेटी का तलाक हो गया है और वह अपने तीन साल के बेटे के साथ पिता के साथ ही रहती थी।”

शुरुआत में पुलिस को संदेह था कि बिहार के दोनों युवक परिवार की गुमशुदगी में शामिल हो सकते हैं, लेकिन शुक्रवार सुबह उनके शव मिलने के बाद इस एंगल को खारिज कर दिया गया। वहीं एसीपी श्याम सुंदर ने आत्महत्या के मामले से इनकार करते हुए कहा, “अगर यह आत्महत्या होती तो सिर्फ एक परिवार के ही लोग आत्महत्या करते लेकिन उनके साथ तीन और शव मिले हैं। हम विभिन्न संभावनाओं को देखते हुए मामले की जांच कर रहे हैं।”

बताया जा रहा है कि मकसूद आलम के छह सदस्यों का परिवार करीमाबाद में किराए के एक मकान में रहते थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद इन्होंने जूट मिल के मालिक से अनुरोध किए थे कि उन्हें गोदाम के ही एक कमरे में रहने दिया जाए। ये परिवार गोदाम के ग्राउंड फ्लोर के एक कमरे में रहते थे। जबकि बिहार के दो लोग पहली मंजिल पर रहते थे। गुरुवार दोपहर को मिल के मालिक एस. भास्कर जब परिसर आए तो उन्हें पता चला कि मकसूद आलम का परिवार और साथ में तीन और लोग लापता हैं।

दूसरी तरफ भास्कर ने पुलिस को बताए हैं कि लॉकडाउन की वजह से फैक्ट्री बंद थी लेकिन इस परिवार और अन्य तीनों के पास पर्याप्त राशन और पैसे थे, वे किसी तरह की तकलीफ में नहीं थे। भास्कर ने आगे कहा कि वह फैक्ट्री दोबारा शुरू करना चाहते थे, इसलिए जब वह गुरुवार दोपहर वहां गए तो उन्हें पता चला कि यह परिवार एवं तीन अन्य लोग लापता हैं। इनके मोबाइल फोन स्विच ऑफ थे इसलिए पुलिस को सूचना दी गई। शाम में आसपास ढूंढने पर कुएं में इनके शव दिखाई दिए। फिर पुलिस ने शुक्रवार को कुएं का पानी बाहर निकाले तो उन्हें पांच और शव मिले। जहां पर यह परिवार रह रहे थे, वहां से पुलिस को आधा खाया हुआ खाना भी मिला है।

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