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गाजियाबाद की हाईटेक सिटी में 572 करोड़ का घोटाला,योगी ने दिए जांच के आदेश 

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के कार्यकाल में बहुप्रतीक्षित योजना हाइटेक सिटी ( वेव सिटी ) अब घोटाले के घेरे में आ चुकी है । दोनों सरकारों के कार्यकाल के दौरान गाजियाबाद स्थित हाईटेक वेवसिटी में 572 करोड़ का घोटाला हुआ। यह घोटाला गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और हाइटेक सिटी के प्रबंधकों की मिलीभगत से हुआ। प्रदेश की योगी सरकार ने इसके जांच के आदेश दे दिए हैं। इसके चलते समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी पर घोटाले की आंच आनी तय है।
यह मामला अक्टूबर, 2010 से अक्टूबर, 2013 के दौरान पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का है। प्रदेश में तब सपा व बसपा की सरकारें थी। ग़ौरतलब है कि इन सरकारों के कार्यकाल में जीडीए के सीएजी से ऑडिट की अनुमति नहीं होती थी। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने इस ऑडिट को कराने का फ़ैसला किया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2005 में प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद में हाईटेक टाउनशिप के विकास के लिए दो विकासकर्ताओं का चयन किया था। तब महायोजना-2001 प्रभावी थी, जिसके अनुसार हाईटेक टाउनशिप के लिए नामित क्षेत्र की भू-उपयोग कृषि था। जुलाई 2005 में सरकार ने महायोजना-2021 को मंजूरी दी। इसके तहत हाईटेक टाउनशिप के लिए चिह्नित भूमि का उपयोग सांकेतिक था, इसलिए विकासकर्ताओं को भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क देना था। वर्ष 2006 और 2007 में बनाई गई नीतियों में भी विकासकर्ताओं से भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क लिए जाने की बात शामिल थी।
इसके बाद महायोजना-2021 के संबंध में 23 अप्रैल 2010 को एक शासनादेश हुआ कि उत्तर प्रदेश शहरी नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 के तहत हाईटेक टाउनशिप के लिए भू-उपयोग सांकेतिक दिखाने का कोई प्राविधान नहीं है। क्योंकि गाजियाबाद महायोजना-2021 में जैसा भू-उपयोग दिखाया गया था, उस प्रकार की भूमि का उपयोग आवासीय माना जाएगा। अत: इस क्षेत्र पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क देय नहीं होगा।
मई 2017 में ऑडिट के दौरान पाया गया कि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने विकासकर्ताओं के अनुरोध पर महायोजना में सांकेतिक भू-उपयोग को आवासीय में परिवर्तित कर उन्हें शुल्क से राहत दे दी। इस तरह विकासकर्ताओं को अनुचित लाभ दिया गया और प्राधिकरण को 572.48 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

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