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गुजरात में 58 दिन में 65 हत्याएं, 21 पैसों के लेन-देन को लेकर

सदियों से हमारे हमारे समाज में पैसों का लेन-देन चल रहा है| लेकिन आज स्थिति यह है कि एक भाई पैसों के लेनदेन के कारण अपने ही भाई की हत्या कर रहा है। पिता पुत्र की, पुत्र पिता की। गुजरात में पिछले 58 दिनों में 65 हत्याएं हुई, जिनमें से 21 हत्याएं पैसे के लेनदेन के कारण हुई है। यह हत्याएं पुलिस, सरकार और समाज के लिए चिंताजनक हैं। इनमें से कुछ हत्याएं तो 10 रुपए के लेनदेन के कारण भी हुई।
अगर हम इन हत्याओं के पैसों का हिसाब करें तो कुल 8 लाख 97 हजार रूपए बनते हैं। गुजरात के पांडेसरा, लिंबायत और डिंडोली क्षेत्र में ज्यादातर हत्याएं हुई  हैं। ज्यादातर हत्याएं लेनदेन, प्रेम प्रकरण, डोमेस्टिक वायलेंस के कारण हुई। 2019 में 97 हत्याएं हुई, सितम्बर महीने में 60 से ज्यादा मामले दर्ज हो गए हैं। साल में ऐसा चार बार देखा गया है कि तीन दिन लगातार  हत्याएं  हुई  हैं  वहीं एक बार लगातार दो दिन है। इसके अलावा पांच दिन ऐसे रहे जिनमें दो हत्याएं हुई हैं।
लॉक डाउन से पहले ज्यादातर  हत्याएं  प्रेम प्रकरण के कारण हुईं| लॉक डाउन के दौरान हत्याएं पैसों के कारण हुई। अनलॉक में तो मामूली धक्का मुक्की और पान थूकने के चलते भी  हुईं । इन हत्याओं से मालूम पड़ता है कि हमारे समाज में आज पैसे से बढ़कर कोई दूसरी चीज नहीं है। प्रेम प्यार, भाईचारा सब पीछे रह गया। बचा है तो केवल पैसा ही। पैसा हमारे समाज और समय की सबसे बड़ी कमजोरी और जरुरत बन गया है। बिना पैसे के हम आज सांस तक नहीं ले सकते, हॉस्पिटल के वेंटिलेटर पर लेटा इंसान तब तक सांस के रहा है, जब तक हम डॉक्टर को पैसे दे रहे हैं जैसे ही पैसे खत्म, इंसान की जिंदगी भी खत्म। क्या हमने ऐसे ही समाज की कल्पना की थी। सवाल उठने स्वाभाविक हैं कि क्या हमारी एजुकेशन में किसी की हत्या करना भी बताया जाता है। क्या हम स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में इसलिए जाते हैं।

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