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बिहार: 28 हजार मजदूर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटे, कर्नाटक मामले पर सियासत गर्म

बिहार: 28 हजार मजदूर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटे, कर्नाटक मामले पर सियासत गर्म

कोरोना वायरस के वजह से अभी पूरे देश में लॉकडाउन लगा है जिसकी वजह से भारत के विभिन्न राज्यों में लोग फंसे हुए हैं। केंद्र सरकार के तरफ से फंसे लोगों को अपने घर जाने की अनुमति दे दी गई जिसके बाद स्पेशल ट्रैन चलाई जा रही हैं। ऐसे ही बिहार के मजदूरों-छात्रों का अपने प्रदेश लौटना जारी है। मिली जानकारी के अनुसार, अभी तक बिहार में सात राज्यों से करीब 24 स्पेशल ट्रेनों में 28,467 मजदूर अभी तक आ चुके हैं।

आज गुरुवार को और 23 स्पेशल ट्रेनें बिहार पहुंच रही हैं। इन ट्रेनों में लगभग 25 हजार मजदूर और छात्र है जो बिहार के अलग-अलग जिलों में पहुंचेंगे। कल बुधवार की रात तक बिहार के अलग-अलग स्टेशनों के लिए ट्रेने रवाना हुई। इसमें आंध्र प्रदेश से एक, गुजरात से आठ, हरियाणा से एक, केरल से दो, महाराष्ट्र से पांच, राजस्थान से तीन, तेलंगाना से पांच ट्रेनें चली है।

कुछ विपक्षी नेता तो केंद्र सरकार पर आरोप भी लगा रहे है कि ट्रेन में आ रहे मजदूरों से किराया लिया जा रहा है।  जिसके बाद इस पर सियासत भी खूब गरमाई हुई है। जिसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने यहाँ तक घोषणा कर दी की मजदूरों को किराया कांग्रेस देगी। जिसके बाद गृह मंत्रालय की तरफ से सफाई दी गई कि मजदूरों से किराया नहीं लिया जा रहा है।

ये भी बताया गया कि 85 फीसदी किराया केंद्र सरकार देगी जबकि 15 फीसदी राज्य सरकारे देगी। पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को कहा था कि अन्य राज्यों से श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटने वाले मजदूरों को किराए की राशि बिहार सरकार लौटा देगी। पर इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से बनाए गए क्‍वारंटीन सेंटर पर 21 दिन तक अलग-थलग रहना होगा।

नीतीश कुमार ने साथ ही यह भी कहा था कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि क्वारंटीन की अवधि पूरी होने के बाद प्रत्येक श्रमिक को कम से कम एक-एक हजार रुपये दिए जाएंगे। पर क्वारंटीन की अवधि खत्म होने के बाद उन्हें अपना टिकट दिखाना होगा।  इसी बीच कर्नाटक सरकार के एक फैसले पर भी विवाद खड़ा हो गया।

वहां की सरकार ने मजदूरों की कमी रोकने के लिए ऐसी ट्रेनें चलाने से इनकार कर दिया। कर्नाटक सरकार ने 6 मई को बिहार से आने वाली तीन ट्रेनों को रद्द कर दिया। साथ ही मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने प्रवासी मजदूरों से अपील की वे कर्नाटक में ही रुक जाएं। अपने घर न जाएं क्योंकि प्रदेश में निर्माण और औद्योगिक काम शुरू होने वाले हैं। अब इस मामले को लेकर बिहार में विपक्षी नेताओं ने सवाल खड़े कर दिए है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कर्नाटक की बीजेपी की सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सरकार प्रवासी मजदूरों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा बर्ताव कर रही है।

वहीं, उन्होंने इस मामले में सीएम नीतीश कुमार से हस्तक्षेप की अपील की। कांग्रेस के बिहार प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने नीतीश सरकार पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि बिहार सरकार ने आने से मना किया होगा। कर्नाटक में फंसे मजदूर सरकार के बंधुआ मजदूर नहीं हैं, मजदूरों को बिहार आने दिया जाए।

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