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21 दलों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 21 विपक्षी दलों की सुनावाई पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है। विपक्षी दलों ने मांग की थी कि आगामी लोकसभा  चुनाव 2019 में परिणामों की घोषणा से पहले वीवीपैट के साथ 50 फीसद ईवीएम के परिणामों का मिलान किया जाना चाहिए। विपक्षी दलों का मानना है कि इससे परिणामों पर शक नहीं रहेगा।
मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग ने कोर्ट की सहायता के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति करने के लिए कहा है।
इस याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण के 1975 के फैसले में कहा था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का एक हिस्सा हैं।
‘तेलगु देशम पार्टी’, ‘तृणमूल कांग्रेस’, ‘समाजवादी पार्टी’, ‘बहुजन समाज पार्टी’ और ‘आम आदमी पार्टी’ सहित विपक्षी 21 दलों की ओर से यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में मांग की गई है कि सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग को निर्देश दे कि कुल इस्तेमाल की जा रही ईवीएम में 50 फीसदी दर्ज मतों का वीवीपैट में मौजूद पर्चियों से मिलान किया जाए।
अपील कर्ताओं में एनसीपी के वरिष्ठ नेता शरद पवार, कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल, तृणमूल के डेरेक ओ  ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के शरद यादव, समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव, बसपा के सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके नेता एमके स्टालिन, सीपीएम के टीके रंगराजन, राष्ट्रीय जनता दल के मनोज कुमार झा, नेशनल काॅन्फ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, सीपीआई के एसएस रेड्डी वहीं बीएसपी के दानिश अली, राष्ट्रीय लोक दल के अजीत सिंह, एआईडीयूएफ के मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल, ‘हम’ के जीतन राम मांझी, प्रो ़अशोक कुमार सिंह, टीडीपी और ‘आप’ आदि शामिल हैं।
इससे पहले इन दलों ने गत माह 5 फरवरी को चुनाव आयोग से यह मांग की थी, लेकिन आयोग ने गत सप्ताह चुनावों की घोषणा करते हुए वीवीपीएटी मिलान का फीसद बढ़ाने से आदेश देने से इंकार कर दिया था। आयोग ने कहा था कि इस बारे में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से राय ली जा रही है और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। आयोग ने यह भी कहा था कि इस संबंध में  मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। चुनावों में फिलहाल एक विधानसभा सीट पर एक ईवीएम के मतों का वीवीपैट पर्चियों से मिलान किया जाता है।
एक अन्य मामले में  कांग्रेस महिला विंग की अध्यक्ष सुष्मिता देव ने याचिका दायर कर शिकायत की है कि चुनाव आयोग द्वारा स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद मोदी और शाह ने नफरत फैलाने वाले भाषण दिए और सशक्त बलों का अपने रैलियों में इस्तेमाल किया। सांसद और पार्टी महिला विंग की अध्यक्ष सुष्मिता देव की एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा किए जा रहे चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन के शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
 मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के सामने इस याचिका को पेश किया गया था। देव ने शिकायत की है कि चुनाव आयोग द्वारा स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद मोदी और शाह ने नफरत फैलाने वाले भाषण दिए और सशक्त बलों का अपने रैलियों में इस्तेमाल किया। सुष्मिता देव का दावा है कि कांग्रेस के पास इन आरोपों के स्पष्ट सबूत हैं।
जब कांग्रेस सांसद और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने इस याचिका को पेश किया, तो मुख्य न्यायाधीश ने पूछा कि उल्लंघन किसके द्वारा किए जाने का आरोप है। इस पर सिंघवी ने प्रधानमंत्री और अमित शाह का नाम लिया।

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