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दीपोत्सव : 5 लाख 50 हज़ार दीपों से जगमगायेगा अयोध्या

भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या में इस बार भव्य दीपावली होने जा रही है जिसके तहत लगभग  पांच लाख 50 हजार दीप जलाकर पूरे अयोध्या को जगमग किया जायेगा। साथ ही मुख्यमंत्री अयोघ्या को 373 करोड़ 69 लाख रूपए की सौगात भी देंगे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार लगातार तीसरे साल भव्य दीपोत्सव पर अयोध्यावासियों को 373 करोड 69 लाख रूपए की सौगात मिलने जा रही है। अयोध्या में पूरी हो चुकी 15 बड़ी परियोजनाओं के लोकार्पण की पूरी तयारी कर ली गई है । दीपोत्सव के मुख्य उत्सव 26 अक्तूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामकथा पार्क से इसे समर्पित करेंगे। इसमें मेडिकल कॉलेज का निर्माण, राम की पैड़ी में अविरल जल प्रवाह, गुप्तारघाट पर नए घाट का निर्माण, भजन संध्या स्थल, जिला महिला चिकित्सालय में सौ बेड का मैटरनिटी सेंटर, अयोध्या के प्रवेश व निकासी द्वार समेत अन्य योजनाएं शामिल हैं।

मौजूदा समय में अधिकतर निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। राम की पैड़ी पर अविरल जल प्रवाह, राम की पैड़ी की रिमाडलिंग, भजन संध्या स्थल समेत कुछ विकास कार्यों में हल्की-फुल्की कसर रह गई है।

अयोध्या में आयोजित होने वाले दीपोत्सव में 26 अक्टूबर को देश-विदेश से बुलाए गए 1700 कलाकार अपनी अपनी शैली की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से लोगों का मन मोहेंगे। इनमें से 1 हजार कलाकार रथों पर सवार होकर रामकथा का प्रदर्शन करते हुए शोभा यात्रा निकालेंगे। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह के मुताबिक इस साल के दीपोत्सव में सांस्कृतिक दलों का चयन इस मकसद से किया गया है कि वे यहां के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद जब अपने प्रदेश या देश वापस जाएं तो वे वहां अयोध्या व यहां दीपोत्सव का प्रचार भी करें। इसीलिए उन इलाकों से लोगों को चुना गया है जो अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए श्रीराम के प्रति अनुराग की भावना दर्शाते हैं।

विरह गीत गायन के लिए मशहूर नेपाल मिथिला के जनकपुर के कलाकारों की टोली हिस्सा लेने आ रही है। जनकपुर जानकी जी का मायका कहा जाता है। जहां उनके विवाह पर जश्न मनाकर विदाई गीत में दर्द का एहसास करवाया जाता है। छत्तीसगढ़ मां कौशल्या का मायका है। यहां की सांस्कृतिक टोली इस साल के कार्यक्रम का हिस्सा बन रही है, जिससे मां कौशल्या के अयोध्या रिश्ते को लोकसंगीत के बल पर जोड़ा जा सके।

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निदेशक डॉ. सिंह ने बताया कि इंडोनेशिया, थाईलैंड, नेपाल, श्रीलंका व मॉरिशस की रामलीला मंडलियां भी अपनी शैली की रामलीलाओं का मंचन दीपोत्सव के मुख्य स्थल राम की पैड़ी के अलावा 10 मिनी मंचों पर करेंगे। संस्कृति विभाग के संयोजन में होने वाले इन कार्यक्रमों का मकसद पूरी अयोध्या में त्रेतायुग के उस माहौल की झलक को वापस लाना है, जैसा प्रभु श्री राम के लंका पर फतेह कर यहां की वापसी पर बना था।

साहित्यकारों को किया जायेगा सम्मानित 

भारतीय भाषाओं में राम कथा पर काम करने अथवा लेखन करने वाले 17 साहित्यकारों को सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा जनकपुर में 60 साल से सीताराम नाम का कीर्तन किया जा रहा है। यहां के महंत को भी सम्मानित किया जाएगा। इसी तरह से जबलपुर में 53 साल से राम चरितमानस का अखंड पाठ करने वाली टोली को भी इस साल के दीपोत्सव में सीएम योगी आदित्यनाथ सम्मानित करेंगे।

अयोध्या को कर्नाटक से जोड़ने की मंशा 

कर्नाटक पवन सुत हनुमानजी की जन्म स्थली है। किष्किंधा का रिश्ता अयोध्या से कितना गहरा है, यह वहां की रामलीला और लोक संगीत में दिखेगा। इसके पीछे मंशा कर्नाटक संगीत से अयोध्या को जोड़ने की। इसी तरह श्रीलंका का राम कथा से गहरा रिश्ता है। वहां का राजा रावण हर राम लीला का प्रमुख पात्र बनता है। ऐसे में वहां की रमा लीला मंडली को अयोध्या से जोड़ने की कोशिश इस साल के दीपोत्सव में की गई है।

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