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कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी ख़तरे में, 20 विधायक बने बागी

कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी ख़तरे में, 20 विधायक बने बागी

दो दिन पूर्व कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री रमेश जरकीहोली ने चमराजनगर में कहा कि मेरे संपर्क में कांग्रेस के 22 विधायक हैं। लेकिन मैं परीक्षण के आधार पर उनमें से पांच को एक हफ्ते के अंदर तोड़ कर बीजेपी के पाले में ला सकता हूं। जरकीहोली के यह दावा करने के बाद कर्नाटक में मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की कुर्सी ख़तरे में बताई जाने लगी है। कहा जा रहा है कि 20 विधायक मुख्यमंत्री से बगावत की तैयारी कर रहे हैं।

तीन दिन पूर्व इसकी शुरूआत उस समय हुई थी जब मुख्यमंत्री ने अपनी बहन के पोते एनआर संतोष को अपना राजनीतिक सचिव अपॉइंट किया है। इस नियुक्ति के बाद संतोष को राज्यमंत्री का दर्जा मिल गया है। हालांकि, उनकी अचानक हुई इस नियुक्ति को लेकर यहां की राजनीति में हलचल मच गई है। बीएस येदियुरप्पा के पहले से ही तीन राजनीतिक सचिव एसआर विश्वनाथ, एमपी रेणुकाचार्य और शंकर मानावल्ली हैं। अब संतोष के राजनीतिक सचिव होने के बाद संख्या बढ़कर चार हो गई है।

सूत्रों की मानें तो संतोष को राजनीतिक सचिव बनाए जाने के पीछे मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के दो उद्देश्य हैं। पहला परिवार को जोड़े रखना और दूसरा विरोधियों को बांटना। हालांकि, संतोष की नियुक्ति के बाद मुख्यमंत्री का विरोध शुरू हो गया है। बीजेपी के कई लोग इस फैसले से खुश नहीं हैं। इसके चलते कुछ विधायकों ने मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है।

फलस्वरूप कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। एक तरफ कोरोना के खिलाफ जंग तो वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ 20 बागी विधायकों ने मोर्चा खोल दिया है। ऐसे संकेत मिलने लगे हैं कि कर्नाटक में एक बार फिर से राजनीतिक संकट खड़ा हो सकता है। बताया जा रहा है कि सभी बागी विधायक उमेश कत्ती के समर्थक हैं। कत्ती बेलगाम जिले के ताकतवर लिंगायत नेता है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले ज्यादातर विधायक उत्तर कर्नाटक से हैं। ये सारे बागी विधायक उमेश कत्ती से समर्थक हैं। कत्ती बेलगाम जिले के ताकतवर लिंगायत नेता है। दो दिन पहले उन्होंने 20 विधायकों को डिनर पर बुलाया। हालांकि, इस पार्टी और बैठक के बारे में कोई अधिकारिक तौर पर बात नहीं कर रहा है। लेकिन कहा जा रहा है कि ये सारे विधायक मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं।

कहा जा रहा है कि उमेश कत्ती और बाकी विधायक चाहते हैं कि येदियुरप्पा अपने कामकाज़ के तरीके को बदलें। येदियुरप्पा से नाराज़ चल रहे विधायक चाहते हैं कि उमेश कत्ती को कैबिनेट मंत्री बनाया जाए। याद रहे कि कत्ती 8 बार से विधायक हैं। इसके अलावा इन सबकी एक और मांग है कि उमेश कत्ती के भाई रमेश को राज्यसभा भेजा जाए।

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