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भारत और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के करोड़ों लोग भुखमरी का शिकार

इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जंग लड़ रही है और अब धीरे-धीरे कोरोना नियंत्रण में आने ही लगा था कि नए वेरिएंट ने दस्तक दे दी है। नए वेरिएंट ओमीक्रॉन के बढ़ते खतरे को देखते हुए कई देशों में लॉकडाउन लग गया है।

कोरोना महामारी के दौरान दुनिया भर में लोगों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ी है। कोरोना काल के चलते कई लोगों की थाली से भोजन दूर हो गया तो कहीं तक तो पंहुचा ही नहीं।

खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और यूनिसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के 12 करोड़ लोगों को कोरोना महामारी ने गरीबी में धकेल दिया है। इस बात का जिक्र खुद संयुक्‍त राष्‍ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटारेस द्वारा किया गया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रहने वाले 180 करोड़ लोगों की पहुंच से पोषक आहार बाहर है। इन लोगों की संख्या में पिछले 12 महीनों के दौरान करीब 15 करोड़ की वृद्धि हुई है। यह जानकारी हाल ही में जारी खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) और यूनिसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट से सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार इनका मुख्य कारण काफी हद तक स्वस्थ और पोषक आहार की बढ़ती कीमतें, गरीबी और आय में फैली असमानता है।

2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में रहने वाले 37.5 करोड़ से अधिक लोग भुखमरी से ग्रसित थे। यही आकंड़ा वर्ष 2019 में 32.1 करोड़ था, जिसका साफ़ अर्थ निकलता है कि कोरोना महामारी के कहर के बाद से भुखमरी से ग्रस्त लोगों की इस संख्या में 5.4 करोड़ का इजाफा देखा गया है। जो वहीं इस क्षेत्र में रहने वाले करीब 110 करोड़ लोगों को दो वक्त का भरपेट भोजन नसीब नहीं हो पा रहा है।

लापरवाही से बढ़ता Omicron

एफएओ की ओर से इससे पहले जारी एक अन्य रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर 2021’ में बताया गया था कि अपने बच्चों के लिए दुनिया की 42 फीसदी आबादी पोषक आहार खरीदने में असमर्थ है, जिसका आंकड़ा 300 करोड़ से अधिक है। वहीं ऑक्सफेम ने भी एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का शीर्षक ‘द हंगर वायरस मल्टीप्लाइज’ है। इस रिपोर्ट से भी उजागर होता है कि दुनिया भर में भूख के चलते हर मिनट 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं।  कोविड-19, संघर्ष और जलवायु परिवर्तन इसके कारण हैं।

2018-20 के लिए एफएओ की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में 20 करोड़ से ज्यादा लोग कुपोषण का शिकार थे। यानी कि करीब 15.3 फीसदी आबादी पोषण की कमी का सामना कर रही थी। वहीं पांच वर्ष से कम उम्र के करीब एक तिहाई बच्चों का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है।

रिपोर्ट में समस्या के साथ ही समाधान भी दिया गया है। समाधान का जिक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकारें उचित समय पर आवश्यक उपाय न करती तो महामारी के दौरान प्रभावी सामाजिक सुरक्षा उपायों की कमी में खाद्य सुरक्षा की स्थिति और भी खराब स्तर पर पहुंच सकती थी।

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