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बंगाल चुनाव में मुद्दा नही बनी 13 लाख बीड़ी मजदूरों की पीडा

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला पूरे देश में अपनी बीड़ी  के लिए जाना जाता है।  यहां की बीडी देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में पी जाती है। ऐसे में जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं सभी राजनीतिक दल अपने अपने एजेंडे में नए-नए विकास के मुद्दे शामिल कर रहे है । लेकिन वहीं दूसरी तरफ मुर्शिदाबाद के बीड़ी मजदूरों की तरफ किसी ने भी नहीं सोचा है।
यहां के विधानसभा चुनाव में कोई भी ऐसा राजनीतिक दल नहीं है जिन्होंने मुर्शिदाबाद के बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझा हो। अगर बीड़ी मजदूरों की पीड़ा को समझा जाता तो उनके लिए राजनीतिक दल अपने चुनावी घोषणा पत्र में जरूर महत्व देते। मुर्शिदाबाद के बीडी कारखानों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि आज के महंगाई के युग में भी वह अपने यहा कार्यरत मजदूरों को हजारों बीडी प्रतिदिन बनाने के बाद भी पेट भर रोटी नसीब नहीं करा पाते है। ऐसे में जब देश में न्यूनतम मजदूरी भी पांच सौ से अधिक की है तो यहां के मजदूरों को मजदूरी के नाम पर नाममात्र की राशि देकर उनका शोषण किया जा रहा है।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में करीब 13 लाख बीड़ी मजदूरों में से कुछ को सप्ताह में तीन दिन तो कुछ को सप्ताह में चार दिन ही काम मिल पाता है। इस वजह से उनकी स्थिति दयनीय होती जा रही है। जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल में एक हजार बीड़ी बनाने पर मजदूर को मात्र 152 रुपये मिलते हैं। इसमें इस्तेमाल होनेवाली सामग्री कंपनी उपलब्ध कराती है। जबकि केरल में एक हजार बीड़ी बनाने पर 340 रुपये मिलते हैं।
बताया जा रहा है कि पूरे देश में करीब एक करोड़ से अधिक बीड़ी मजदूर हैं। इनमें करीब 13 लाख अकेले मुर्शिदाबाद जिले में हैं। पूर्व में देश में उत्पादित बीड़ी का करीब 40 फीसद अरब देशों को निर्यात होता था, लेकिन अब वह घटकर पांच से सात फीसद रह गया है। वर्तमान में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, असम आदि राज्यों में यहां से बीड़ी भेजी जाती है। उधर, दूसरी तरफ कड़े नियम-कायदे के कारण बीड़ी की खपत लगातार घट रही है।

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