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इस साल दुनिया पर मंडरा रहे हैं 10 बड़े खतरें, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

कोरोना महामारी ने चलती-फिरती-घूमती दुनिया को रोक दिया है। करोड़ों की संख्या में लोग इसके संक्रमण से प्रभावित है, लाखों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। लोगों के सामने आजीविका का संकट और खड़ा हो गया है। हाल ही में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की नई ‘द ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट 2021’ जारी हुई है। जिसमें बताया गया है कि 2021 में दुनिया पर मंडराने वाले 10 बड़े खतरों पर सर्वे और विश्लेषण किया गया है। इन खतरों को तीन भागों में बांटा गया है। पहला लघुकालीन खतरा, दूसरा मध्यम काल खतरा और तीसरा है दीर्घकालीन खतरा।

रिपोर्ट के अनुसार जब लोगों से लघुकालीन खतरों को लेकर बात की तो 58 प्रतिशत लोगों ने माना कि उनको संक्रमण बीमारियों से डर लगता है। जीवन यापन पर संकट (55.1 फीसद), एक्सट्रीम वेदर इवेंट जैसे बाढ़, सूखा (52.7 फीसद), साइबर सुरक्षा (39 फीसद) और डिजिटल असमानता (38.3) को भी लोग बड़ा संकट मानते हैं। इसके बाद लंबे समय तक नीतियों में आने वाली जड़ता को 38.3 फीसद, आतंकी हमले को 37.8 फीसद, युवाओं के मोहभंग को 36.4 फीसद, सामाजिक सामंजस्य में कमी को 35.6 फीसद और पर्यावरण के नुकसान को 35.6 फीसद लोग दुनिया के सामने आने वाली बड़ी चुनौती के रूप में देखते हैं।

एसेट बबल ब्रस्ट को 53.3 फीसद लोग, आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर ब्रेकडाउन को 53.3 फीसद, मूल्य अस्थिरता को 52.9 फीसद, कमोडिटी शॉक्स को 52.7 फीसद, कर्ज को 52.3 फीसद लोग रिस्क मानते हैं। वहीं, अंतरराज्यीय संबंध खराब होना 50.7 फीसद, अंतरराज्यीय संघर्ष 49.5 फीसद, साइबर सुरक्षा की विफलता 49.0 फीसद, टेक गवर्नेंस की विफलता 48.1 फीसद और रिसोर्स जियोपॉलिटाइजेशन 47.9 फीसद लोगों की चिंता का कारण है।

लघु और मध्यम काल की तुलना में जब दीर्घकालीन खतरे की बात होती है तो लोगों की चिंताएं बदल जाती हैं। 62.7 फीसद लोग सामूहिक विनाश के हथियार को सबसे बड़ा खतरा मानते हैं। वहीं, राज्य का पतन 51.8 फीसद, जैव विविधता की हानि 51.2 फीसद, प्रतिकूल तकनीक का विकास 50.2 फीसद और प्राकृतिक संसाधन संकट 43.9 फीसद लोगों की चिंता का कारण हैं।

रिपोर्ट की अन्य बातें
70 फीसद महिलाओं ने माना है कि कोरोना के कारण उनका करियर धीमा हो गया है

4 गुना डाटा जेनरेट होगा भारत में 2025 तक

85 मिलियन नौकरियां ऑटोमेटेड हो जाएंगी

30 फीसद युवाओं के पास तकनीक का अभाव है, जिससे वे डिजिटल की दुनिया में पिछड़ रहे हैं

80 फीसद युवा मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं कोरोना काल में

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